Bhagavad Gita पर संस्कृत में श्लोक और भावार्थ, गीता Jayanti 2023 पर शेयर करें श्रीमद्भगवद्गीता ये विशेष संदेश
Bhagavad Gita Sanskrit quotes for instagram : भगवद गीता को एक ऐतिहासिक पुस्तक और एक पार-ऐतिहासिक पुस्तक दोनों के रूप में देखा जा सकता है। आप यहां से bhagavad gita quotes on karma, krishna quotes in sanskrit for instagram bio, bhagavad gita quotes for instagram bio in sanskrit शेयर करें। ऐतिहासिक रूप से भगवद गीता दो नायकों कृष्ण और अर्जुन के बीच बातचीत के रूप में सामने आती है। दुनिया के सबसे लंबे युग महाभारत में 700 से अधिक संस्कृत श्लोकों और 18 अध्यायों वाली उनकी बातचीत इस बारे में है कि इस समय किसी के कर्तव्य की प्रकृति क्या है।
Bhagavad Gita Jayanti Shlok in sanskrit
दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः।
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः।
इन वर्णसंकरकारक दोषों से, कुलघातियों द्वारा सनातन कुल, धर्म और जाति धर्म नष्ट हो जाते हैं।
उत्सन्कुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन।
नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम।
हे जनार्दन! जिनका कुलधर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्यों का अनिश्चित काल तक नरक में वास होता है, ऐसा हम सुनते आये हैं।
श्रीभगवानुवाच
कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम्।
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन।
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्तवोत्तिष्ठ परंतप।
श्री भगवान बोलेः हे अर्जुन! तुझे इस असमय में यह मोह किस हेतु से प्राप्त हो रहा है? क्योंकि यह श्रेष्ठ पुरुषों का आचरण नहीं, न ही यह आचरण स्वर्ग को देने वाला है और न ही कीर्ति कमाने वाला है। इसीलिए हे अर्जुन! नपुंसकता को मत प्राप्त हो, तुझमें यह उचित नहीं जान पड़ती। हे पार्थ! हृदय की तुच्छ दुर्बलता को त्यागकर युद्ध के लिए खड़ा हो जा।
Bhagavad Gita Quotes in sanskrit
निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन।
पापमेवाश्रयेदस्मान् हत्वैतानाततायिनः।
हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या ही प्रसन्नता होगी? ऐसे पापियों को मारकर तो हमें केवल पाप ही लगेगा। (जब अर्जुन अपने धर्म को धारण करने में संकोच करने लगे।)
कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत।
अपने ही कुल के नाश से सनातन कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं, कुलधर्म के नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में केवल पाप ही फैलता है।
संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च।
पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः।
वर्णसंकर कुलघातियों को और कुल को नरक में ले जाने के लिए ही होता है, लुप्त हुई पिण्ड अर्थात् श्राद्ध और तर्पण से वंचित इनके पितर लोग भी अधोगति को प्राप्त होते हैं।
Powerful Bhagavad Gita Shlok in Sanskrit
न कांक्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च।
किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा।
हे कृष्ण! ऐसी विजय की लालसा क्या रखनी जिसमें स्वजनों से ही युद्ध लड़ना पड़े। हे गोविन्द ! हमें ऐसे राज्य या ऐसे जीवन से क्या ही लाभ मिलेगा? (बंधनों के फंदे में फसकर अर्जुन जब कर्मों पर ही प्रश्न उठाने लगते हैं।)
धृतराष्ट्र उवाच
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय।
धृतराष्ट्र बोलेः हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छावाले मेरे पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया? (जिस भूमि से धर्म ज्ञान का प्रचार होता है, वो भूमि ही धर्मभूमि कहलाती है।)
अर्जुन उवाच
दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम्
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति।
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते।
अर्जुन बोलेः हे कृष्ण! युद्धक्षेत्र में डटे हुए अपने स्वजनों को देखकर शरीर का हर अंग शिथिल हुए जा रहा हैं और मुख सूखा जा रहा है। (स्वजनों को युद्ध क्षेत्र में देखकर अर्जुन मोह बंधनों में फसने लगे)
Bhagavad Gita quotes for instagram
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि |
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा
न्यन्यानि संयाति नवानि देही ||
Bhagavad Gita chapter 2 verse 22
भावार्थ :
हे अर्जुन ! जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नए वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने तथा व्यर्थ के शरीरों को त्याग कर नवीन भौतिक शरीर धारण करता है ।
हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् |
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय: ||
Bhagavad Gita chapter 2 verse 47
भावार्थ :
हे अर्जुन ! तुम यदि युद्ध में मारे जाओगे तो स्वर्ग प्राप्त करोगे या यदि तुम जीत जाओगे तो पृथ्वी के साम्राज्य का भोग करोगे । अतः दृढ़ संकल्प करके खड़े होओ और युद्ध करो।
Bhagavad gita quotes in hindi
“सृष्टि में हर जीव के हृदय में नारायण का ही वास है, मनुष्य को चाहिए कि वह अपने भीतर के नारायण का स्वरूप जाने।”
“जब कभी भी सृष्टि पापियों के पाप से आतंकित होती है, तब नारायण इस धरती पर धर्म बचाने, सृष्टि की संस्कृति, ज्ञान और मानवता के संरक्षण के लिए अवतार लेते हैं।”
“परमात्मा की लीलाओं को जिसने शून्य होकर जान लिया, उसने जीवन के अनन्त ज्ञान की प्राप्ति कर ली।”
“राजसी, तामसी और सात्विक के आधार पर ही मानव के गुण, प्रकृति और व्यवहार का निर्धारण होता है।”
“जीवन का एक ही सार होता है “श्रीमद्भागवत गीता”, यही सार यदि जीवन का आधार बन जाए तो जीवन सफल बन जाता है।”
Bhagavad gita quotes in sanskrit with english translation
असक्तबुद्धि: सर्वत्र जितात्मा विगतस्पृह: |
नैष्कर्म्यसिद्धिं परमां सन्न्यासेनाधिगच्छति ||
chapter 18 verse 49
भावार्थ :
हे अर्जुन ! जो आत्मसंयमी तथा अनासक्त है एवं जो समस्त भौतिक भोगों की परवाह नहीं करता, वह सन्यास के अभ्यास द्वारा कर्मफल से मुक्ति की सर्वोच्च सिद्ध-अवस्था प्राप्त कर सकता है ।
यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ |
समदु:खसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते ||
Bhagavad Gita chapter 2 verse 15
भावार्थ :
हे अर्जुन ! जो पुरुष सुख तथा दुःख मैं विचलित नहीं होता और इन दोनों में समभाव रखता है, वह निश्चित रूप से मुक्ति योग्य है ।
Bhagavad gita quotes in english
“योगियों की यही पहचान होती है कि उनकी इंद्रियां उनके अधीन होती हैं।”
“भयमुक्त होता है वह प्राणी जो परमात्मा की इच्छा को अपने लिए आदेश मानकर चलता है।”
“चिंताओं की चिता को दाग वहीं प्राणी देता है, जो पूर्णतः मन भाव से स्थिर हो जाता है।”
“सच्ची श्रृद्धा और परमात्मा के प्रति समर्पण तब ही सफल माना जाता है, जब उसमें कोई शंका न हो।”
Bhagavad gita quotes on karma
य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम् |
उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते ||
Bhagavad Gita chapter 2 verse 19
भावार्थ :
हे अर्जुन ! जो इस जीवात्मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसे मरा हुआ समझता है, वे दोनों ही अज्ञानी हैं, क्योंकि आत्मा न तो मारता है और न मारा जाता है ।
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च |
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ||
Bhagavad Gita chapter 2 verse 27
भावार्थ :
हे अर्जुन ! जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात् पुनर्जन्म भी निश्चित है । अतः अपने अपरिहार्य कर्तव्यपालन में तुमने शोक नहीं करना चाहिए ।
Krishna quotes in sanskrit for instagram bio
सुखदु:खे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ |
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ||
Bhagavad Gita chapter 2 verse 38
भावार्थ :
हे अर्जुन ! तुम सुख या दुःख, हानि या लाभ, विजय या पराजय का विचार किये बिना युद्ध करो । ऐसा करने से तुम्हे कोई पाप नहीं लगेगा।
यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन |
ज्ञानाग्नि: सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा ||
Bhagavad Gita chapter 4 verse 37
भावार्थ :
जैसे प्रज्ज्वलित अग्नि ईंधन को भस्म कर देती है, उसी तरह हे अर्जुन ! ज्ञान रूपी अग्नि भौतिक कर्मों के समस्त फलों को जला डालती है ।
Bhagavad gita quotes for instagram bio in sanskrit
बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जित: |
अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्ते तात्मैव शत्रुवत् ||
Bhagavad Gita chapter 6 verse 6
भावार्थ :
हे अर्जुन ! जिसने मन को जीत लिया है, उसके लिए मन सर्वश्रेष्ठ मित्र है, किन्तु जो ऐसा नहीं कर पाया उसके लिए मन सबसे बड़ा शत्रु बना रहेगा ।
सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु |
साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते ||
Bhagavad Gita chapter 6 verse 9
भावार्थ :
हे अर्जुन ! जो मनुष्य निष्कपट हितैषियों, प्रिय मित्रों, तटस्थों, मध्यस्थों, इर्ष्यालुओं, शत्रुओं तथा मित्रों, पुण्यात्माओं एवं पापियों को सामान भाव से देखता है, तो वह और भी उन्नत माना जाता है।