Tulsidas Dohe on Lord Ram: राम मंदिर पर शेयर करें तुलसीदास के भगवान राम पर दोहे
Shri Ramcharitmanas Chaupai Dohe on Lord Ram : सभी मित्रों और साथियों को राम मंदिर की शुभकामनाएं। बहुत हर्ष का विषय है कि भगवान राम का मंदिर बन चुका है। इसका शुभारंभ 22 जनवरी 2024 को होगा। इस अवसर पर सभी को ram mandir photo, ram mandir pran Pratishtha, tulsidas ke dohe, ramcharitmanas, Ram Ji Ke Dohe, Poem On Lord Rama In Hindi भेजकर शुभकामनाएं और बधाई संदेश दें।
Tulsidas Ram ji ke Dohe in Hindi
नाम राम को अंक है सब साधन हैं सून।
अंक गएँ कछु हाथ नहिं अंक रहें दस गून॥
अर्थ – राम-नाम की महिमा का वर्णन करते हुए तुलसीदास कहते हैं कि इस संसार में केवल श्रीराम का नाम ही अंक है, उसके अतिरिक्त शेष सब शून्य है। अंक के न रहने पर कुछ प्राप्त नहीं होता, परंतु शून्य के पहले अंक के आने पर वह दस गुना हो जाता है। अर्थात् राम-नाम का जाप करते ही साधन दस गुना लाभ देनेवाले हो जाते हैं।
नाम राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु।
जो सुमिरत भयो माँग तें तुलसी तुलसीदासु॥
अर्थ – कलियुग में केवल राम-नाम ही ऐसा कल्पवृक्ष है, जो मनोवांछित फल प्रदान करनेवाला तथा परम कल्याणकारी है। इसका सुमिरन करने से तुलसी भाँग से बदलकर तुलसी के समान हो गए हैं। अर्थात् काम, क्रोध, मोह, लोभ आदि विषय-विकारों से मुक्त होकर पवित्र, निर्दोष और ईश्वर के प्रिय हो गए हैं।
Ayodhya Ram Mandir Shayari : अयोध्या राम मंदिर शायरी भेजकर सभी को दें शुभकामनाएं
होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥
अर्थ है: जो कुछ राम ने रच रखा है, वही होगा. तर्क करके कौन शाखा (विस्तार) बढ़ाए. यानि भविष्य के बारे में सोचकर क्यों बात को विस्तार देना. ऐसा कहकर शिवजी भगवान श्रीहरि का नाम जपने लगे और सीताजी वहां गईं, जहां सुख के धाम प्रभु श्री रामचंद्रजी थे.
राम नाम जपि जीहँ जन भए सुकृत सुखसालि।
तुलसी इहो जो आसली गयो आज की कालि।।
अर्थ है: जिन लोगों के जिह्वा पर हमेशा राम नाम का जाप रहता है, वो सभी दुखों से मुक्त होकर परम मुखी और पुण्यात्मा हो जाते हैं. लेकिन जो आलस्य के कारण इस नाम से विमुख रहते हैं, उनका वर्तमान और भविष्य नष्ट समझना चाहिए.
नाम राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु।
जो सुमिरन भयो माँग तें तुलसी तुलसीदासु।।
अर्थ है: कलयुग संसार में सिर्फ राम नाम ही ऐसा कल्पवृक्ष है, जो मनोवांछित फल प्रदान करने वाला और परम कल्याणकारी है. इसका सुमिरन करने से तुलसी भांग से बदलकर तुलसी के समान हो गए हैं. यानी काम, भोग, लोभ, वासना, मोह आदि विषय विकारों से मुक्त होकर पवित्र, निर्दोष और ईश्वर के प्रिय हो गए हैं.
राम नात रति राम गति नाम बिस्वासा।
सुमिरत सुभ मंगल कुसल दुहुँ दिसि तुलसीदास।।
अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं, जिन मनुष्यों का राम नाम से प्रेम है, जिनकी राम ही एकमात्र गति हैं, जो राम नाम में अगाध विश्वास रखते हैं, राम नाम का स्मरणमात्र करने से ही लोक और परलोक में उनका शुभ-मंगल हो जाता है.
राम नाम सुमिरत सुजस भाजन भए कुजाति।
कुतरुक सुरपुर राजमग लहत भुवन बिख्याति॥
अर्थ: राम-नाम का सुमिरन करने से क्ह्नक्तलहीन और नीच मनुष्य भी सद्गुणों से युक्त होकर यश के पात्र हो गए हैं। स्वर्ग के राजमार्ग पर स्थित बुरे वृक्ष भी तीनों लोकों में ख्याति प्राप्त कर लेते हैं।
मोर मोर सब कहँ कहसि तू को कहु निज नाम।
कै चुप साधहि सुनि समुझि कै तुलसी जपु राम॥
अर्थ: हे जीव! तू सबको ‘मेरा-मेरा’ कहता है, लेकिन तू स्वयं कौन है? तेरा नाम क्या है? तुलसीदास कहते हैं कि हे जीव! तुम नाम और रूप के रहस्य को सुनकर और समझकर चुप हो जा अर्थात् ‘मेरा-मेरा’ कहना छोड़कर अपने स्वरूप में स्थित हो जा अथवा राम-नाम का जाप कर।
राम नाम अवलंब बिनु परमारथ की आस।
बरषत बारिद बूँद गहि चाहत चढ़न अकास॥
अर्थ: जो मनुष्य राम-नाम का सहारा लिये बिना ही परमार्थ अर्थात् मोक्ष की कामना करते हैं, उनकी स्थिति उन मनुष्यों जैसी होती है, जो वर्षा की बूँदों को पकड़कर आकाश पर चढ़ना चाहते हैं। अर्थात् राम-नाम की शरण लिये बिना जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्त होना असंभव है।
बिगरी जनम अनेक की सुधरै अबहीं आजु।
होहि राम को नाम जपु तुलसी तजि कुसमाजु॥
अर्थ: तुलसीदास कहते हैं कि हे मनुष्य! यदि तुम कई जन्मों से बिगड़ी हुई अपनी स्थिति को सुधारना चाहते हो तो क्ह्नक्तसंगति और मन के समस्त विकारों को त्यागकर राम-नाम का सुमिरन करो, राम के बन जाओ।
राम नाम नर केसरी कनककसिपु कलिकाल।
जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहि दलि सुरसाल॥
अर्थ: राम का नाम भगवान् नृसिंह तथा कलियुग हिरण्यकशिपु है; श्रीराम के नाम का जाप करनेवाले भक्त प्रह्लाद हैं। इस संसार में राम-नाम रूपी नृसिंह भगवान् ही कलियुग रूपी हिरण्यकशिपु द्वारा संतप्त भक्तों की रक्षा करेंगे।
राम नाम कलि कामतरु सकल सुमंगल कंद।
सुमिरत करतल सिद्धि सब पग पग परमानंद॥
अर्थ: भगवान् राम का नाम कल्पवृक्ष के समान है तथा सभी प्रकार से श्रेष्ठ मंगलों का भंडार है। उनका सुमिरन करने से सभी सिद्धियाँ उसी प्रकार प्राप्त हो जाती हैं, जेसे हथेली पर रखी हुई कोई वस्तु। राम-नाम का जाप पग-पग पर परम आनंद प्रदान करता है।
सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन।
नाम सुप्रेम पियूष हृद तिन्हुहुँ किए मन मीन॥
अर्थ: जो प्राणी सभी कामनाओं से रहित होकर श्रीराम की भक्ति में डूबे हुए हैं, उन महात्माओं ने भी राम-नाम के प्रेम रूपी अमृत-सरोवर में स्वयं को मछली बना रखा है। अर्थात् राम-नाम को त्यागने मात्र के विचार से ही वे मछली की भाँति तड़पने लगते हैं।
सबरी गीध सुसेवकनि सुगति दीन्हि रघुनाथ।
नाम उधारे अमित खल बेद बिदित गुन गाथ॥
अर्थ: श्रीरघुनाथ (राम) ने शबरी, जटायु आदि भक्तों को सुगति अर्थात् मोक्ष प्रदान किया है। लेकिन राम-नाम ने तो असंख्य पापियों और अधर्मियों का उद्धार कर दिया है। वेदों में भी राम-नाम की गुणगाथा वर्णित है।
Ram Mandir ki Hardik Shubhkamnaye : राम मंदिर निर्माण पर सभी को भेजें शुभकामनाएं और बधाई संदेश