April Vrat Tyohar 2025: अप्रैल 2025 में चैत्र नवरात्रि से अक्षय तृतीया तक, जानें इस महीने के खास व्रत और त्योहार

April Vrat Tyohar 2025: चैत्र नवरात्रि और चैती छठ
1 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि अपने पूरे रंग में होगी, और इसी दिन विनायक चतुर्थी भी मनाई जाएगी। 2 अप्रैल को चैती छठ की शुरुआत "नहाय-खाय" से होगी, जो 3 को संध्या अर्घ्य और 4 को ऊषा अर्घ्य के साथ सूर्य को समर्पित होगी। यह पर्व खासकर बिहार और पूर्वी भारत में जोश से मनाया जाता है। 6 अप्रैल को राम नवमी का उत्सव भगवान राम के जन्म की खुशी में रंग लाएगा। यह महीना शुरू से ही भक्ति और परंपरा का संगम बना रहेगा।
मध्य अप्रैल: हनुमान जयंती और वैशाख की शुरुआत
8 अप्रैल को कामदा एकादशी का व्रत होगा, जो भगवान विष्णु की कृपा पाने का दिन है। 10 को प्रदोष व्रत और 12 को हनुमान जयंती के साथ चैत्र पूर्णिमा का संयोग बनेगा। हनुमान जी की भक्ति में डूबा यह दिन शक्ति और समर्पण का प्रतीक है। 13 अप्रैल से वैशाख मास शुरू होगा, और 14 को मेष संक्रांति सूर्य के राशि परिवर्तन का उत्सव लेकर आएगी। 16 को विकट संकष्टी चतुर्थी गणेश भक्तों के लिए खास होगी। यह समय आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा रहेगा।
महीने का समापन: अक्षय तृतीया की चमक
अप्रैल का अंत भी कम शानदार नहीं। 24 को वरुथिनी एकादशी, 25 को प्रदोष व्रत, और 26 को मासिक शिवरात्रि शिव भक्तों के लिए खास होंगे। 27 को वैशाख अमावस्या और 29 को परशुराम जयंती आएगी। महीने का समापन 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया से होगा, जो समृद्धि और नए कार्यों की शुरुआत का दिन माना जाता है। यह महीना हर दिन एक नई भक्ति की कहानी कहेगा।
राम नवमी का खास महत्व
राम नवमी अप्रैल का सबसे बड़ा आकर्षण है। 6 अप्रैल को चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। विष्णु के सातवें अवतार राम ने अधर्म को खत्म करने के लिए त्रेता युग में जन्म लिया। अयोध्या से लेकर देशभर में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में पूजा करते हैं, और रामायण का पाठ करते हैं। यह दिन सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि सत्य और प्रेम का संदेश भी देता है।
अप्रैल का संदेश: भक्ति और साधना का मेल
अप्रैल 2025 हर धर्म के लिए कुछ न कुछ खास लेकर आएगा। हिंदुओं के लिए नवरात्रि और हनुमान जयंती, जैनियों के लिए महावीर जयंती, और बौद्धों के लिए बुद्ध पूर्णिमा इस महीने को विविधता से भर देगी। यह समय व्रत, दान, और पूजा के लिए सबसे शुभ है। तो तैयार हो जाइए अपने कैलेंडर पर निशान लगाएं और इन पवित्र दिनों को श्रद्धा के साथ मनाएं।