OBC Politics: मोदी ने हरियाणा में भी चौंकाया, विपक्ष की ओबीसी राजनीति कमजोर होगी

Haryana Politics: हरियाणा में विधानसभा चुनाव से ठीक 6 महीने पहले अचानक मनोहर लाल खट्टर से इस्तीफा दिलवा सैनी की अगुवाई में नई सरकार का गठन करवा दिया। इसी तरह उत्तराखण्ड में भी बीजेपी ने चुनाव से पहले मुख्यमंत्री बदलने का दांव खेला था जो सफल रहा था। बीजेपी ने हरियाणा में बदलाव कर जहां खट्टर सरकार के खिलाफ एंटी इनकनवेंसी को तो ख़त्म किया ही विपक्ष के मंसूबों पर पानी फेर दिया। ओबीसी समुदाय से आने वाले सैनी अभी कुरुषेत्र से सांसद हैं और प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
 
मोदी ने हरियाणा में भी चौंकाया, विपक्ष की ओबीसी राजनीति कमजोर होगी

नई दिल्ली, Haryana Politics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देश को चौंकाया दिया है। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद हरियाणा में अचानक सत्ता में बदलाव करवा ओबीसी के चेहरे नायाब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बना बड़ा चुनावी दांव खेल दिया। अंतर इतना भर है कि तीनों प्रदेशों में विधानसभा चुनाव के बाद फैसला किया गया।

मुख्यमंत्री बनने के बाद सैनी के सामने पहली चुनौती लोकसभा की सभी सीट जिताने की तो रहेगी ही साथ ही 6 माह बाद अपनी सरकार भी रिपीट करवानी होगी। सैनी पर खेला गया दांव हरियाणा में बीजेपी को लाभ दिलवाएगा ही साथ ही पड़ोसी राज्य राजस्थान पर भी असर पड़ेगा। सैनी जिस जाति से आते हैं उसी जाति से राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी आते हैं। सैनी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बीजेपी राजस्थान में इसे भुनाएगी। दूसरा विपक्ष का ओवीसी का मुद्दा भी कमजोर होगा।

लेकिन सबसे बड़ी हैरानी की बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी ने गत सोमवार को खट्टर के साथ गुरुग्राम में कई योजनाओं को हरी झंडी दिखाई थी। एक बार भी नहीं लगा था कि अगले दिन हरियाणा में सत्ता बदल जाएगी। बदलाव की बात जरूर थी, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद। लेकिन मोदी हैं तो कुछ भी मुमकिन है का कथन हरियाणा में घट गया।

अचानक ख़बर आई खट्टर मंत्रिमंडल ने इस्तीफा दे दिया। थोड़ी देर में सैनी नए मुख्यमंत्री चुन लिए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ा फैसला कर राजनीतिक पंडितों को चोंका दिया। निश्चित तौर पर इसका लोकसभा चुनाव पर तो असर पड़ेगा ही लेकिन साथ ही कांग्रेस की राजनीति भी गड़बड़ाएगी। कांग्रेस के रणनीतिकारों को लगता था कि खट्टर के रहते चुनाव आसान रहेगा। लेकिन अब फिर से रणनीति बनानी होगी।

दूसरा बीजेपी ने सफाई से दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी से भी किनारा कर उल्टा उसमें सेंध लगा दी। बीजेपी के रणनीतिकारों को लगता है कि कांग्रेस भूपेंद्र हुड्डा की अगुवाई में चुनाव लडेगी। वहीं जेजेपी भी उनसे अलग हो मैदान में होगी। ऐसे में जाट वोट में विभाजन होगा जिसका बीजेपी को सीधा लाभ मिलेगा। बीजेपी हरियाणा में गैर जाट की राजनीति करती आई है जबकि कांग्रेस और जेजेपी को जाट राजनीति का ही भरोसा है। इसलिए बीजेपी ने लोकसभा चुनाव से पहले ही बड़ा फैसला कर विपक्ष को फंसा दिया।

दरअसल बीजेपी में लोकसभा चुनाव बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर भी फैसला किया जाना है। खट्टर को भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का एक प्रबल दावेदार माना जा रहा है। ऐसी संभावना थी कि लोकसभा चुनाव बाद खट्टर दिल्ली आ जायेंगे और हरियाणा में किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी दे दी जाएगी। लेकिन पार्टी आलाकमान ने लोकसभा चुनाव की घोषणा से पूर्व ही हरियाणा में बदलाव कर चौंका दिया।

जो संकेत हैं मनोहर लाल  खट्टर लोकसभा का चुनाव लड़ दिल्ली जा सकते हैं। पार्टी अध्यक्ष बनते हैं या प्रधानमंत्री मोदी की टीम का हिस्सा कुछ दिन बाद ही पता चल पाएगा। जुलाई में कई राज्यपालों की भी नई नियुक्तियां होनी है।

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