Nautapa 2026 Start and End Date: मई का महीना अपने आखिरी पड़ाव पर है और देश के अधिकांश हिस्सों में पारा आसमान छूने लगा है। इसी बीच आज से नौतपा ने अपनी आमद दे दी है। अगले नौ दिनों तक सूरज की किरणें सीधे धरती पर लंबवत पड़ेंगी, जिससे तापमान में भारी उछाल आना तय है। सनातन संस्कृति और वैदिक ज्योतिष में नौतपा को साल का सबसे गर्म कालखंड माना जाता है। हालांकि, इस चिलचिलाती धूप और पसीने से तरबतर करने वाले मौसम के बीच एक आध्यात्मिक पहलू भी है, जो आम इंसान को संकटों से उबरने का रास्ता दिखाता है।
रोहिणी नक्षत्र में सूर्य का जाना और सोई किस्मत का जागना
खगोलीय और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब ग्रहों के अधिपति सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में कदम रखते हैं, तब पृथ्वी के साथ उनका कोण ऐसा बनता है कि गर्मी अपने प्रचंड रूप में आ जाती है। ज्योतिषशास्त्र में सूर्य को हमारी आत्मा, पिता, मान-सम्मान और सरकारी सेवा का प्रतिनिधित्व प्राप्त है। अगर आपकी नौकरी में दिक्कतें आ रही हैं या आत्मविश्वास डगमगा रहा है, तो इस दौरान की गई सूर्य साधना आपके लिए वरदान साबित हो सकती है। सुबह की पहली किरण के साथ सूर्य को नमन करना इस समय सबसे ज्यादा फलदायी होता है। Nautapa Ke Upay
प्यासे कंठ को तरावट और चंद्रमा की शीतलता
नौतपा (Nautapa) में भले ही सूर्य देव अपने चरम पर हों, लेकिन इसी समय शीतलता के देवता चंद्रमा को भी अनुकूल किया जा सकता है। चिलचिलाती धूप में जब पशु-पक्षी और इंसान पानी की एक-एक बूंद के लिए बेहाल होते हैं, तब किया गया जलदान सीधे आपके चंद्रमा को बल देता है। जगह-जगह प्याऊ लगवाना, राहगीरों को मीठा शरबत पिलाना या छतों पर सकोरे रखना सिर्फ सामाजिक काम नहीं, बल्कि बड़ा धार्मिक पुण्य है। इससे मानसिक तनाव दूर होता है और घर-परिवार में आ रही अशांति का नाश होता है।
अर्घ्य की ताकत और दान से शांत होगा ग्रहों का गुस्सा
इस विशेष अवधि का पूरा लाभ लेने के लिए सुबह जल्दी उठने का नियम बनाएं। तांबे के पात्र में साफ जल लेकर, उसमें रोली, अक्षत और लाल फूल मिलाएं और उगते हुए भगवान भास्कर को अर्घ्य दें। इस दौरान गायत्री मंत्र या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दोपहर के समय जरूरतमंदों को खरबूजा, तरबूज, सत्तू, छाछ या धूप से बचने के लिए छाता भेंट करने से सूर्य देव का तीखापन शांत होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
जितना तपेगा नौतपा, उतनी ही झूमकर आएगी बरखा
नौतपा (Nautapa) का सरोकार सिर्फ पूजा-पाठ या ग्रहों के फेरबदल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध हमारी खेती-किसानी और पर्यावरण से भी है। गांवों में बड़े-बुजुर्ग आज भी मौसम का मिजाज भांपने के लिए नौतपा के दिनों की गिनती करते हैं। विज्ञान और लोक मान्यता दोनों ही मानते हैं कि इन 9 दिनों में जितनी ज्यादा गर्मी पड़ेगी और वायुदाब कम होगा, समुद्र से मानसूनी हवाएं उतनी ही तीव्रता से मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ेंगी। यानी साफ है कि नौतपा का यह तपना, आने वाले दिनों में अच्छी फसल और खुशहाली की गारंटी है। Nautapa Ke Upay
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