Shiprocket IPO: ई कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और टेक इनेबलमेंट प्लेटफॉर्म Shiprocket Limited ने अपने प्रस्तावित आईपीओ के लिए सेबी के पास अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर दिया है। यह कदम कंपनी के शेयर बाजार में प्रवेश की दिशा में अहम माना जा रहा है।
प्रस्तावित आईपीओ का कुल आकार करीब 2342 करोड़ रुपये तक हो सकता है। इसमें नए इक्विटी शेयरों का इश्यू और मौजूदा निवेशकों द्वारा शेयर बिक्री दोनों शामिल हैं।
आईपीओ की संरचना और आकार
Shiprocket के ड्राफ्ट के अनुसार आईपीओ में दो हिस्से होंगे
करीब 1100 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू
लगभग 1242 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल
हर इक्विटी शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये तय की गई है। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग बीएसई और एनएसई दोनों पर की जाएगी।
कौन संभाल रहा है आईपीओ की जिम्मेदारी
इस इश्यू के लिए कई बड़े निवेश बैंक बुक रनिंग लीड मैनेजर की भूमिका निभा रहे हैं। इनमें
Axis Capital
BofA Securities India
JM Financial
Kotak Mahindra Capital
शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन नामों की मौजूदगी आईपीओ की तैयारी को मजबूत बनाती है।
किन निवेशकों की हिस्सेदारी बिकेगी
Shiprocket में कई जाने माने संस्थागत और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं।
ऑफर फॉर सेल में प्रमुख नाम
Bertelsmann Nederland
Tribe Capital
Arvind Limited
LR India Fund
500 Startups
MCP3 SPV LLC
इसके अलावा कंपनी के फाउंडर साहिल गोयल और गौतम कपूर भी अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचने की योजना में हैं। वहीं विशेष खुराना भी ऑफर फॉर सेल का हिस्सा होंगे।
कौन बाहर है
Zomato ब्रांड से जुड़ी Eternal Limited के पास Shiprocket में करीब 6.85 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लेकिन यह इस ऑफर फॉर सेल में भाग नहीं ले रही है। इसी तरह Temasek से जुड़ी इकाई MacRitchie Investment भी फिलहाल शेयर नहीं बेच रही है।
Shiprocket का बिजनेस मॉडल क्या है
Shiprocket खुद को मर्चेंट फर्स्ट टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के रूप में पेश करती है। यह खास तौर पर भारत के MSME और डिजिटल रिटेलर्स को ई कॉमर्स संचालन आसान बनाने में मदद करती है।
कंपनी के प्रमुख ऑपरेशन सेगमेंट
कोर बिजनेस
घरेलू शिपिंग प्लेटफॉर्म
शिपिंग से जुड़े ऐप्स और टूल्स
इमर्जिंग बिजनेस
क्रॉस बॉर्डर ट्रेड
कार्गो सेवाएं
फुलफिलमेंट सॉल्यूशन
डिजिटल चेकआउट टेक्नोलॉजी
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत में ई कॉमर्स के बढ़ते दायरे के साथ ऐसे प्लेटफॉर्म की मांग लगातार बढ़ रही है।
यह आईपीओ क्यों अहम है
Shiprocket का आईपीओ केवल कंपनी के विस्तार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारत के लॉजिस्टिक्स टेक सेक्टर की बढ़ती ताकत को भी दिखाता है। इससे निवेशकों को एक ऐसे बिजनेस मॉडल में हिस्सेदारी का मौका मिल सकता है, जो ई कॉमर्स इकोसिस्टम की रीढ़ बनता जा रहा है।
आगे क्या देखने को मिलेगा
अब सेबी की समीक्षा के बाद आईपीओ की तारीख और प्राइस बैंड जैसे अहम विवरण सामने आएंगे। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस इश्यू पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी, खासकर उन लोगों की जो टेक आधारित ग्रोथ स्टोरी में भरोसा रखते हैं।













