चंडीगढ़. हरियाणा में अपना घर बनाने का सपना देख रहे और सरकारी प्रक्रियाओं में उलझे हजारों लोगों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने ‘टाउन इंप्रूवमेंट ट्रस्ट’ (Town Improvement Trust) योजना के तहत आवंटित प्लाटों की रजिस्ट्री यानी सेल डीड करवाने की समय सीमा को बढ़ा दिया है।
यह फैसला उन आवंटियों के लिए संजीवनी की तरह है जो लंबे समय से अपने प्लाट के मालिकाना हक का इंतजार कर रहे थे। हालांकि सरकार ने इस राहत के साथ कुछ शर्तें भी जोड़ी हैं जिसके तहत अब लाभर्थियों को एक्सटेंशन फीस चुकानी होगी।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला
जानकारों के मुताबिक प्रदेश में हजारों ऐसे प्लाट धारक थे जिन्हें इंप्रूवमेंट ट्रस्ट योजना के तहत जमीन तो मिल गई थी लेकिन किसी न किसी कारणवश वे तय समय में निर्माण कार्य पूरा नहीं कर सके या कागजी कार्रवाई पूरी नहीं कर पाए। इस कारण उनकी सेल डीड रुकी हुई थी। सरकार के इस कदम का मकसद पुराने मामलों का निपटारा करना और शहरी विकास को गति देना है।
शहर के हिसाब से लगेगा शुल्क
सरकार ने एक्सटेंशन फीस यानी समय सीमा बढ़ाने के लिए जो शुल्क तय किया है वह शहर की श्रेणी और प्लाट की स्थिति पर निर्भर करेगा। इसे तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है।
1. गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर (सबसे महंगे जोन) ये शहर हरियाणा के आर्थिक केंद्र हैं इसलिए यहां दरें सबसे ज्यादा हैं।
खाली प्लाट: इन शहरों में यदि आपका प्लाट खाली पड़ा है तो आपको 60 रुपए प्रति वर्ग मीटर सालाना के हिसाब से फीस देनी होगी।
अधूरा निर्माण: यदि निर्माण शुरू हुआ है लेकिन पूरा नहीं हुआ या कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं है तो यह फीस आधी यानी 30 रुपए प्रति वर्ग मीटर होगी।
2. नगर परिषद् क्षेत्र
खाली प्लाट: यहां के लिए सरकार ने 40 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर तय की है।
अधूरा निर्माण: जिन प्लाटों पर निर्माण कार्य बाकी है वहां 15 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से शुल्क लगेगा।
3. नगर पालिका और अन्य निगम
खाली प्लाट: नगर पालिकाओं में यह फीस सबसे कम 20 रुपए प्रति वर्ग मीटर रखी गई है।
अधूरा निर्माण: अन्य नगर निगमों के लिए 20 रुपए और नगर पालिकाओं के लिए यह दर महज 10 रुपए प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है।
क्या है इंप्रूवमेंट ट्रस्ट योजना
नई पीढ़ी के पाठकों के लिए यह जानना जरूरी है कि इंप्रूवमेंट ट्रस्ट योजना आखिर है क्या। दरअसल आजादी के बाद और राज्यों के गठन के समय शहरों के नियोजित विकास के लिए यह ट्रस्ट बनाए गए थे। इनका मुख्य काम बेतरतीब बसी बस्तियों या खाली जमीनों का अधिग्रहण कर वहां व्यवस्थित सेक्टर काटना था।
इस योजना के तहत सरकार बिजली, पानी, सीवर और पक्की सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करती है और फिर प्लाटों की नीलामी करती है। नीलामी के बाद आवंटी को अस्थायी पत्र मिलता है और शर्तें पूरी करने पर पक्की रजिस्ट्री होती है।
हजारों परिवारों को मिलेगा मालिकाना हक
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से रियल एस्टेट सेक्टर में भी थोड़ी हलचल देखने को मिलेगी। अक्सर निर्माण कार्य पूरा न होने की वजह से रजिस्ट्री अटक जाती थी। अब लोग निर्धारित एक्सटेंशन फीस जमा करवाकर कानूनी रूप से अपने प्लाट के मालिक बन सकेंगे। इससे भविष्य में किसी भी तरह के कानूनी विवाद से बचने में भी मदद मिलेगी।












