Kurukshetra Pashu Mela 2026: हरियाणा के पशुपालकों के लिए कुरुक्षेत्र से एक बहुत ही उत्साहजनक खबर सामने आई है। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में आज से 41वीं राज्यस्तरीय पशु प्रदर्शनी का भव्य आगाज हो गया है। 8 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस मेले में न केवल पशुओं की खूबसूरती और उनकी नस्ल का प्रदर्शन होगा बल्कि पशुपालकों के लिए बुलेट मोटरसाइकिल और स्कूटी जैसे शानदार ईनाम जीतने का अवसर भी मिलेगा।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मेला ग्राउंड पर आयोजित यह कार्यक्रम हरियाणा के ग्रामीण आर्थिक ढांचे को मजबूती देने और पशुपालन को एक आधुनिक व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
पशुपालकों के लिए खास लकी ड्रा और सुविधाएं
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपनिदेशक डॉ रविन्द्र सहरावत के अनुसार इस मेले को बेहद आकर्षक बनाया गया है। इसमें भाग लेने वाले पशुपालकों के लिए प्रशासन ने कई विशेष इंतजाम किए हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।
ईनामों की बौछार: मेले में हर दिन लकी ड्रा निकाला जाएगा। इसमें भाग्यशाली विजेता बुलेट मोटरसाइकिल, स्कूटी और दूध निकालने की मधानी जैसे ईनाम घर ले जा सकेंगे।
फ्री बस सेवा: पूरे हरियाणा से पशुपालकों को कुरुक्षेत्र लाने के लिए 200 निशुल्क बसों का संचालन किया जा रहा है।
मुफ्त भोजन और ठहरना: मेले में आने वाले किसानों और पशुपालकों के लिए चाय, पानी और भोजन की व्यवस्था पूरी तरह से मुफ्त रखी गई है।
1600 उत्तम नस्ल के पशु दिखाएंगे दम
मेले के नोडल अधिकारी डॉ अनिल ने बताया कि इस बार प्रतियोगिता का स्तर बहुत ऊंचा रखा गया है। हरियाणा के कोने-कोने से लगभग 1600 बेहतरीन नस्ल के पशु इस प्रदर्शनी का हिस्सा बन रहे हैं।
इन पशुओं को 12 मुख्य श्रेणियों और 53 उप-श्रेणियों में बांटा गया है। प्रतियोगिता में अव्वल आने वाले पशुओं के मालिकों को न केवल प्रशस्ति पत्र मिलेगा बल्कि उन्हें मोटी नकद प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित भी किया जाएगा। इसमें विशेष रूप से हरियाणा की शान माने जाने वाले मुर्राह भैंसे और उच्च दूध क्षमता वाली गायों पर सबकी नजर रहेगी।
पशुपालन व्यवसाय को मिलेगा नया आयाम
इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करने के लिए प्रेरित करना है। विशेषज्ञ यहाँ किसानों को पशुओं के आहार, टीकाकरण और नस्ल सुधार के बारे में जानकारी देंगे।
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ऐसी प्रदर्शनियां पशुपालकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करती हैं। जब एक पशुपालक दूसरे के उन्नत पशु को देखता है तो वह खुद भी अपनी डेयरी के स्तर को सुधारने की कोशिश करता है। इससे राज्य में दूध उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में भी इजाफा होता है।
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