यमुनानगर नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स वसूली को लेकर इस बार बेहद कठोर रुख अपनाया है। शहर में ऐसे 146 बड़े डिफाल्टरों की पहचान की गई है, जिन पर दस लाख रुपये से अधिक का टैक्स बकाया है। लंबे समय से नोटिस भेजने, समझाने और बार-बार मौके पर जाकर चेतावनी देने के बाद भी जब भुगतान नहीं हुआ, तब निगम ने अब सीधे व्यक्तिगत सुनवाई और सीलिंग की कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है।
यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि बकाया टैक्स की बड़ी राशि शहर के विकास कार्यों को लगातार धीमा कर रही है।
व्यक्तिगत सुनवाई क्यों जरूरी बनी
निगम अधिकारियों के अनुसार अब हर बड़े डिफाल्टर को व्यक्तिगत रूप से बुलाया जा रहा है। उनसे पूछा जाएगा कि वे सालों से टैक्स क्यों नहीं भर रहे।
अगर कोई व्यापारी, होटल, संस्थान या प्रॉपर्टी मालिक किसी गंभीर आर्थिक कारण या वैध मजबूरी का हवाला देता है, तो उसकी जांच की जाएगी। लेकिन यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला, तो निगम उनके प्रतिष्ठानों को सील करने की कार्रवाई तुरंत शुरू कर देगा।
इससे पहले एक अंतिम नोटिस जारी कर आखिरी मौका भी दिया जाएगा।
शहर में 216224 प्रॉपर्टी, लेकिन वसूली अटकी
यमुनानगर नगर निगम क्षेत्र में कुल दो लाख से अधिक संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग समय पर टैक्स भरते हैं। लेकिन जिन 146 प्रॉपर्टी मालिकों पर दस लाख से ज्यादा का बकाया है, वे लगातार वसूली अभियान को चुनौती दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इतने बड़े पैमाने पर टैक्स बकाया रहने से शहर की वित्तीय क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। सड़कें, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, पार्क और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए पैसा निगम को टैक्स से ही मिलता है। जब प्रवाह रुकता है तो विकास की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।
निगम अब इन मामलों की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बना चुका है।
टैक्स वसूली नहीं तो सीलिंग अनिवार्य
अधिकारियों का कहना है कि इस बार अभियान को बेहद सख्त रखा गया है। टीमों को साफ निर्देश है कि सुनवाई के दौरान डिफाल्टरों को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि अगर भुगतान नहीं हुआ तो सीलिंग से बचने का कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा।
निगम प्रशासन पहले ही इन डिफाल्टरों की सूची सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और लोगों में जागरूकता बढ़े।
आम आदमी समय पर टैक्स देता है, बड़े क्यों नहीं
सीनियर एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि बड़े डिफाल्टरों पर सख्त कार्रवाई बिल्कुल जरूरी है।
उनके अनुसार जब आम नागरिक अपनी क्षमता के अनुसार टैक्स जमा करता है, तो बड़े प्रतिष्ठानों और संस्थानों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
वे कहते हैं कि निगम की यह कार्रवाई न सिर्फ वसूली बढ़ाएगी बल्कि शहर के विकास कार्यों को भी नई रफ्तार मिलेगी।
निगम अधिकारियों का बयान
क्षेत्रीय कराधान अधिकारी अजय वालिया ने कहा विशाल बकाया वाले सभी प्रॉपर्टी मालिकों की व्यक्तिगत सुनवाई की जाएगी। उनसे पूछा जाएगा कि वे टैक्स क्यों नहीं भर रहे। अगर कोई ठोस वजह सामने नहीं आती, तो उनकी प्रॉपर्टी सील करना हमारा अंतिम और अनिवार्य कदम होगा।











