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Tulsidas ke 10 prasiddh dohe: रामभक्त तुलसीदास के ये 10 अमर दोहे बदल देंगे आपकी सोच, ज़रूर पढ़ें एक बार!

On: जुलाई 30, 2025 8:51 अपराह्न
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Tulsidas ke 10 prasiddh dohe: रामभक्त तुलसीदास के ये 10 अमर दोहे बदल देंगे आपकी सोच, ज़रूर पढ़ें एक बार!
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Tulsidas ke 10 prasiddh dohe: गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के वो चमकते सितारे हैं, जिनकी लेखनी आज भी लोगों के जीवन में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

उन्होंने रामचरितमानस जैसी कालजयी रचना के जरिए श्रीराम के जीवन को जन-जन तक पहुंचाया। लेकिन उनकी सबसे बड़ी विरासत हैं उनके दोहे – जो छोटी पंक्तियों में गहरा जीवन ज्ञान समेटे हुए हैं।

चाहे जीवन में संयम की बात हो, मित्र की परख या सच्चे धर्म की पहचान, तुलसीदास जी के दोहे हर परिस्थिति में मार्गदर्शन करते हैं।

Tulsidas ke 10 prasiddh dohe: तुलसीदास जी के 10 सबसे प्रसिद्ध दोहे

1. “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर, पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर।”

अर्थ: जो सिर्फ ऊंचाई में बड़ा हो, लेकिन दूसरों को कोई लाभ न पहुंचाए, उसकी महानता व्यर्थ है।

2. “धीरज, धर्म, मित्र और नारी, आपद काल परखिए चारी।”

अर्थ: किसी के धैर्य, धर्म, मित्रता और स्त्री के गुणों की असली पहचान संकट के समय ही होती है।

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3. “पर उपदेश कुशल बहुतेरे, जे करहीं ते नर न घनेरे।”

अर्थ: उपदेश देना तो आसान है, लेकिन उस पर चलना मुश्किल। ऐसे लोग बहुत कम होते हैं।

4. “सठ सुधरहिं सत संगत पाई, पारस परस कुधातु सुहाई।”

अर्थ: गलत व्यक्ति भी अगर अच्छे संगत में आए तो सुधर सकता है, जैसे पारस से लोहे को सोना बनाया जा सकता है।

5. “जो न तरनि तरु बीजव रहाहीं, ते बिपति बात न जिय कराहीं।”

अर्थ: जो समय रहते बुराइयों से नहीं बचते, बाद में उनके लिए पछतावा ही बचता है।

6. “तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुँ ओर, वशीकरण इक मंत्र है, परिहरु वचन कठोर।”

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अर्थ: मीठे बोल हर जगह सुख पैदा करते हैं। कठोर वचन से बचना चाहिए।

7. “भक्ति रहित माया जड़, जीव अमर अविनाशी।”

अर्थ: माया और शरीर तो नाशवान हैं, लेकिन आत्मा और भक्ति अमर होती है।

8. “तुलसी के राम न घालियै, चाहे दुनिया सारी खोट करै।”

अर्थ: तुलसीदास कहते हैं कि भगवान राम में विश्वास कभी न छोड़ो, चाहे पूरी दुनिया ही आपके खिलाफ हो जाए।

9. “निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय। बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।”

अर्थ: आलोचक को अपने पास रखना चाहिए क्योंकि वह बिना किसी साधन के हमारे स्वभाव को शुद्ध करता है।

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10. “कबहुँक बेरि बास कबहुँक, माखन-मिसरी खाय। तुलसी जग जीवन यही, साँच झूठ कर जाय।”

अर्थ: जीवन में कभी कष्ट आता है, तो कभी सुख। यही संसार का सत्य है – सच और झूठ की परख ही जीवन है।

तुलसीदास जी के दोहे भले ही सदियों पुराने हों, लेकिन उनके संदेश आज भी उतने ही ताजे लगते हैं। चाहे वो रिश्तों की समझ हो, समाज की सच्चाई हो या आत्मज्ञान की बात तुलसीदास की पंक्तियां आज के समय में भी जीवन को दिशा देती हैं।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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