मणिकर्णिका स्नान 2025: वैकुंठ चतुर्दशी पर हरि-हर के मिलन का पवित्र पर्व, मोक्ष का अवसर।
4 नवंबर 2025 को होगा मणिकर्णिका स्नान, लाखों श्रद्धालु काशी में गंगा डुबकी लगाएंगे।
इस दिन भगवान विष्णु ने काशी में स्नान कर शिव की पूजा की थी, मिला था मोक्ष का वरदान।
मणिकर्णिका घाट वाराणसी का मोक्षदायिनी स्थल, जहां शिव-पार्वती ने ध्यान लगाया था।
माता पार्वती का कुंडल यहां गिरा था, तभी से इस पवित्र स्थान का नाम पड़ा मणिकर्णिका।
मणिकर्णिका स्नान से पापों का नाश होता है और आत्मा को मिलती है शांति और मोक्ष।
वैकुंठ चतुर्दशी पर विष्णु और शिव की पूजा से हरि-हर की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है।
गंगा स्नान से तन, मन और आत्मा होती है शुद्ध, पुराने पापों से भी मिलती है मुक्ति।
वाराणसी में हजारों श्रद्धालु घाटों पर जुटते हैं, आरती और मंत्रों से गूंज उठती है काशी।
मणिकर्णिका स्नान आत्मशुद्धि और मोक्ष की दिशा में पहला कदम माना जाता है।
अगली स्लाइड के लिए क्लिक करें।