कालभैरव जयंती 2025 की तिथि तय! जानिए पूजा विधि, मंत्र और महत्व।

मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाई जाती है कालभैरव जयंती।

इस दिन भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की विशेष आराधना की जाती है।

अष्टमी तिथि 11 नवंबर सुबह 11:08 से 12 नवंबर सुबह 10:58 तक रहेगी।

उदया तिथि के अनुसार कालभैरव जयंती बुधवार, 12 नवंबर को मनाई जाएगी।

पूजा से पहले स्नान करें, संकल्प लें और भगवान भैरव की मूर्ति स्थापित करें।

सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं और गुग्गल की धूप अर्पित करें।

भैरव को बेलपत्र, काले तिल, उड़द दाल, फल और जलेबी का भोग लगाएं।

‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें और आरती करें।

कालभैरव की पूजा से भय, पाप और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है, जीवन में आती है शांति।