सूर्य देव के वृश्चिक राशि में प्रवेश का पर्व वृश्चिक संक्रांति हर साल भक्तों के लिए शुभ और ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।
वृश्चिक संक्रांति 2025 इस साल 16 नवंबर रविवार को मनाई जाएगी, जब सूर्य दोपहर 1:45 बजे वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।
इस दिन स्नान, दान और सूर्य पूजा का विशेष महत्व है, जिससे पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है।
पुण्यकाल सुबह 08:02 से दोपहर 01:45 तक और महापुण्यकाल 11:58 से 01:45 तक रहेगा, पूजा का यही सबसे शुभ समय है।
गंगा, यमुना या नर्मदा में स्नान शुभ माना गया है, नदियों तक न जा सकें तो घर पर गंगाजल से स्नान करें।
तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, चंदन और गुड़ मिलाकर सूर्य देव को “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र के साथ अर्घ्य दें।
सूर्य पूजा के बाद ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करें, इससे सूर्य देव की कृपा और नई ऊर्जा प्राप्त होती है।
इस दिन वस्त्र, अन्न, तिल, गुड़ या धातु का दान करें और पितरों के लिए तर्पण कर पुण्य अर्जित करें।
गाय का दान या गौसेवा इस दिन सबसे श्रेष्ठ मानी गई है, इससे सुख, समृद्धि और आरोग्य मिलता है।
वृश्चिक संक्रांति पर सूर्य पूजा, स्नान और दान करने से जीवन में सुख, समृद्धि और आत्मबल बढ़ता है।
अगली स्लाइड के लिए क्लिक करें।