1. Home
  2. Agriculture

Top Variety of Mustard: जानें सरसों की टॉप वैरायटी कौन सी है जो किसानों को दे रही सबसे ज्‍यादा मुनाफा

Top Variety of Mustard: जानें सरसों की टॉप वैरायटी कौन सी है जो किसानों को दे रही सबसे ज्‍यादा मुनाफा
किसानों भाई सरसों की इन किस्मों का चयन अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार कर सकते हैं। सरसों की इन उन्नत किस्मों में तेल की मात्रा 37 से 42 प्रतिशत और औसत उपज 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहती है। आईए, सरसों कि उच्च उत्पादन देने वाली इन टॉप 5 सरसों की किस्मों के बारे में जानें। 

हिसार, Which mustard seed is best: किसानों को सरसों की खेती से कम समय में अधिक उत्पादन के लिए कीट रोगों के प्रति रोधक क्षमता रखने वाली उन्नत किस्मों के बीज का ही चयन करना चाहिए। वर्तमान में कृषि बाजारों में अलग-अलग ब्रांड के विभिन्न प्रकार की सरसों किस्म मौजूद है, जो कम समय और सिंचाई में अधिक पैदावार देने वाली सरसों की किस्म है।

सरसों की नई किस्‍म पूसा मस्टर्ड-32

इस नई किस्म का नाम है पूसा मस्टर्ड-32। इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्था (IARI) पूसा ने विकसित किया है। यह सरसों की पहली एकल शून्य किस्म है, जिसमें सफेद रतुआ रोग का कोई खतरा नहीं है। इस किस्म की खेती पश्चिम बंगाल में की जा रही है, जहां किसानों को इससे बहुत फायदा हो रहा है।

सरसों की खेती कैसे करें

सरसों की नई किस्म पूसा मस्टर्ड-32 की खेती करने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। इस किस्म की बुआई का समय अक्टूबर के पहले सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक है। इस किस्म की बुआई के लिए जमीन को अच्छी तरह से तैयार करना होगा। जमीन को दो बार हल चलाकर बारीक करना होगा।

बीज को बुआई से पहले फंगसाइड से छिड़कना होगा। बीज को 2.5 सेंटीमीटर की गहराई पर बुआई करना होगा। बुआई के बाद जमीन को हल्का सा दबाना होगा। बुआई के बाद जमीन को नम रखना होगा। बुआई के 25 दिन बाद फॉस्फोरस और पोटैशियम का उर्वरक देना होगा।

बुआई के 45 दिन बाद नाइट्रोजन का उर्वरक देना होगा। बुआई के 60 दिन बाद फिर से नाइट्रोजन का उर्वरक देना होगा। बुआई के 75 दिन बाद फॉस्फोरस और पोटैशियम का उर्वरक देना होगा। बुआई के 90 दिन बाद फिर से नाइट्रोजन का उर्वरक देना होगा। सरसों की खेती में पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती है।

कितनी होगी पैदावार

सरसों की नई किस्म पूसा मस्टर्ड-32 के कई फायदे हैं। इस किस्म की खेती करने के लिए बीज की ज्यादा आवश्यकता नहीं होती है। सिर्फ 100 ग्राम सरसों बीज से आप 1 बीघे में खेती कर सकते हैं। इस किस्म में तेल की मात्रा भी बेहतर है। इसमें तेल की मात्रा 37 प्रतिशत है, जबकि सामान्य सरसों में यह 30 प्रतिशत होती है।

इस किस्म से प्रति हैक्टेयर 25 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है। इससे किसानों को प्रति हैक्टेयर करीब 1.16 लाख रुपए की कमाई हो सकती है। इसके अलावा, इस किस्म का उपयोग पशु चारे के रूप में भी किया जा सकता है, क्योंकि इसमें ग्लूकोसिनोलेट की मात्रा बहुत कम है।

स्टार 10-15 सरसों किस्म

स्टार (star) 10-15 सरसों किस्म, स्टार एग्रीसीड्स की एक हाइब्रिड काली सरसों किस्म है। सरसों की इस संकर किस्म की बुवाई किसान भाई किसी भी प्रकार की भूमि में आसानी से कर सकते हैं। इस किस्म की फसल तैयार होने का औसत समय 120 से 125 दिन का है। यह उन्नत किस्म पाले के प्रति सहनशील है।

स्टार (स्टार) 10-15 सरसों किस्म से सरसों के बीज में तेल की मात्रा 42 प्रतिशत तक प्राप्त होती है। इस किस्म की उत्पादन क्षमता 15 से 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहती है। सरसों की यह उन्नत हाइब्रिड किस्म को केवल 2 सिंचाई की आवश्यकता होती है। इस किस्म की फसल की फली में दानों की संख्या भी अधिक रहती है। 

राज विजय सरसों

राज विजय सरसों-2 किस्म उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। सरसों की इस किस्म में तेल की मात्रा 37 से 41 प्रतिशत तक पाई जाती है। राज विजय सरसों-2 किस्म की परिपक्ता अवधि 120 से 135 दिनों की होती है। उपयुक्त समय पर इस किस्म की बुवाई करने से इसकी फसल से औसतन उत्पादन 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिल सकती है। 

Mango Farming: आम के पेड़ पर मंजर आ गए हैं तो ये काम भी निपटा लें जल्‍द, फसल देगी बंपर पैदावार


देश दुनिया के साथ ही अपने शहर की ताजा खबरें पाने के लिए अब आपHaryanaNewsPostकेGoogle Newsपेज औरTwitterपेज से जुड़ें और फॉलो करें।
whtsapp-img
News Hub