Agriculture Scheme: 10 सरकारी योजनाएं जो किसानों के लिए हैं वरदान: टेंशन होगी दूर, खेती होगी आसान!

सरकारी योजनाएं किसानों की सहायता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये योजनाएं किसानों को खेती के लिए वित्तीय सहायता, कृषि उपकरणों और तकनीकों तक पहुंच, और बेहतर उत्पादन और आय प्राप्त करने में मदद करती हैं।
 

खेती-किसानी भारत के गांवों की आत्मा में बसती है और कृषि की भारतीय अर्थव्यवस्था में एक बड़ी भूमिका है. आजकल लोग पारंपरिक खेती को छोड़कर मिश्रित और नकदी फसल की खेती करने लगे हैं और अच्छी आमदनी करने लगे हैं. यही कारण है कि लोग अब खेती को भी एक प्रोफेशन के तौर पर देखने लगे हैं. सरकार भी खेती-किसानी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं, जिनका लाभ लेकर किसान खेती बाड़ी को आसान भी बना सकते हैं और मुनाफे को भी बढ़ा सकते हैं. अगर आप भी खेती करने का मन बना रहे हैं तो आज हम आपको ऐसी ही कुछ सरकारी योजनाओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका लाभ लेकर आप खेती बाड़ी कर सकते हैं.

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan):

  • यह योजना किसानों को सालाना ₹6000 की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • पात्रता: 2 हेक्टेयर तक की कृषि योग्य भूमि वाला किसान।

किसानों को खेती-बाड़ी के दौरान सबसे बड़ी समस्या अपने उत्पाद के नुकसान की होती है और इसमें प्रकृति का एक बड़ा रोल होता है. अक्सर आपने सुना होगा की खेती बाड़ी के दौरान कीट-पतंग और बीमारी के कारण किसानों की फसल को नुकसान पहुंच जाता है. ऐसे में फसल की सुरक्षा के लिए किसानों के हित में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई जाती है. इसके तहत प्राकृतिक आपदा, कीट और बीमारियों के कारण फसल को पहुंचने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है और किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जाती है. इस योजना के तहत किसानों को प्रीमियम का भुगतान करना होता है. जिसके बाद केंद्र और राज्य की सरकार इस पर सब्सिडी देती है. आसानी से किसी भी किसान सलाहकार के जरिए आप इस योजना का लाभ ले सकते हैं.

राष्ट्रीय कृषि मिशन (National Agriculture Mission):

  • यह योजना किसानों को कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करती है।
  • योजना के तहत, किसानों को कृषि उपकरणों, बीजों, उर्वरकों और अन्य कृषि आदानों पर सब्सिडी मिलती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY):

  • यह योजना किसानों को फसल नुकसान से बचाने के लिए बीमा कवरेज प्रदान करती है।
  • योजना के तहत, किसानों को कम प्रीमियम पर अपनी फसलों का बीमा करवाने की सुविधा मिलती है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card):

  • यह योजना किसानों को अपनी मिट्टी की उर्वरता का परीक्षण करवाने और उचित उर्वरक और खाद के उपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद करती है।

ग्रामीण इलाकों में खेती करने वाले किसानों के समीप एक बड़ी समस्या मिट्टी के जांच की होती है. किसानों को यह पता ही नहीं होता है कि उनकी मिट्टी किस फसल के लिए बेहतर उपजाऊ साबित हो सकती है और किसान परंपरागत खेती करते रहते हैं. इस स्थिति से निपटने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरुआत की गई है. जिसके तहत किसान अपनी मिट्टी की जांच करवा सकते हैं और उन्हें यह भी बताया जाता है कि उनकी मिट्टी किस फसल के उत्पादकता के लिए बेहतर है. इसे लेकर सभी प्रखंडों में आत्मा और जिले में कृषि विज्ञान केंद्र बनाया गया है. किसान वहां से संपर्क कर अपनी मिट्टी की जांच कर कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत अपनी मिट्टी का कार्ड बनवा सकते हैं.

परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY):

  • यह योजना किसानों को परंपरागत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • योजना के तहत, किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और अन्य परंपरागत कृषि पद्धतियों के लिए प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

जैविक उत्पादन की प्रक्रिया, प्रमाणीकरण, लेवलिंग, पैकेजिंग और परिवहन के लिए केंद्र सरकार की यह योजना चलाई जा रही है. जिसके तहत परंपरागत कृषि को बढ़ावा दिया जाता है. इसके तहत सरकार किसानों को 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता प्रदान करती है. इसका लाभ किसान हर 3 साल में ले सकते हैं. इस योजना के तहत सरकार जैविक खेती को भी प्रोत्साहित करती है.

राष्ट्रीय कृषि बाजार (eNAM):

  • यह योजना किसानों को अपनी उपज को ऑनलाइन मंडियों में बेचने की सुविधा प्रदान करती है।
  • योजना के तहत, किसानों को बेहतर मूल्य और व्यापक बाजार तक पहुंच मिलती है।

कृषि क्रेडिट कार्ड (KCC):

  • यह योजना किसानों को खेती के लिए ऋण प्राप्त करने में मदद करती है।
  • योजना के तहत, किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण मिलता है।

किसान क्रेडिट कार्ड एक ऐसी योजना है जिसके तहत किसानों को सरकार खेती बाड़ी करने के लिए आर्थिक मदद प्रदान करती है. कृषि से संबंधित गतिविधियों के लिए किसान आसानी से लोन ले सकते हैं और इस पर काफी कम या न के बराबर ब्याज होता है. इस योजना के तहत किसानों को क्रेडिट कार्ड निर्गत किया जाता है. जिससे किसान लोन ले सकते हैं. इस लोन का इस्तेमाल किसान खाद, बीज, उर्वरक, कीटनाशक, मशीनरी इत्यादि खरीदने के लिए कर सकते हैं. किसानों के पास खेती युक्त भूमि कितनी है इसके अनुपात में किसानों को लोन मिल जाता है. किसी भी बैंक से किसान केसीसी का लोन ले सकते हैं.

किसान कल्याण योजना (Kisan Kalyan Yojana):

  • यह योजना किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करती है।
  • योजना के तहत, किसानों को कृषि क्षेत्र से संबंधित सभी जानकारी एक ही स्थान पर मिल जाती है।

कृषि विज्ञान केंद्र (KVK):

  • ये केंद्र किसानों को कृषि वैज्ञानिकों और तकनीशियनों से नवीनतम कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद करते हैं।

कृषि विश्वविद्यालय (Agricultural Universities):

  • ये विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र से संबंधित शिक्षा और अनुसंधान प्रदान करते हैं।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार के द्वारा इस योजना का शुभारंभ किया गया था ताकि किसानों को समय पर खेतों में पानी मिल सके. इसके तहत किसानों को सब्सिडी पर सोलर पैनल दिया जाता है, जिससे वह आसानी से बिजली का उत्पादन कर सकते हैं और अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं. किसान चाहे तो उस बिजली को बेचकर आय भी कमा सकते हैं. इस योजना के तहत किसान सोलर पंप भी खरीद सकते हैं. हालांकि अभी इस कई राज्यों में लागू नहीं किया गया है पर कुछ राज्यों में यह योजना चल रही है.

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

खेती के दौरान सिंचाई के लिए किसानों को पानी उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की यह योजना काफी लाभदायक है. इसके तहत किसानों को जल प्रबंधन के लिए उचित संसाधन मुहैया कराया जाता है. जिसके तहत किसान अपने खेतों में वॉटर स्प्रिंकलर, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम सहित अन्य सिंचाई के उपकरण लगवा सकते हैं. इसका लाभ भी किसानों को आसानी से मिल जाता है.

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