Top 51 Gangaur ke Dohe in Hindi: गणगौर 2025 'पिया जी को हो गया मुझसे प्यार' जैसे दोहों से सजाएं माता की पूजा
Top 51 Gangaur ke Dohe in Hindi: गणगौर के दोहे
गणगौर की पूजा में दोहे गाना एक पुरानी परंपरा है। पानी पिलाते वक्त महिलाएं अपने पति का नाम लेकर दोहे गाती हैं। जैसे: "एक दूनी दो, दो दूनी चार, पिया जी को हो गया मुझसे प्यार"—इसमें "पिया जी" की जगह अपने पति का नाम लें। या फिर: "बगीचे में क्यारी, क्यारी में पानी, पिया जी मेरे राजा, मैं पिया जी की रानी"। ये दोहे प्यार को हल्के-फुल्के अंदाज में बयां करते हैं। कुछ में शरारत भी होती है, जैसे: "कमरे में अलमारी, अलमारी में नोटों की थप्पी, पिया जी ने चुपके से ले ली मेरी पप्पी"। ये बोल पूजा को मजेदार बनाते हैं।
गणगौर को पानी पिलाने के दोहे
एक दूनी दो, दो दूनी चार, पिया जी को हो गया मुझसे प्यार।
खेत, खेत में क्यारी मैं अपने पिया जी की प्यारी।
गोरा के मन में है, ईसर, राधा के मन में श्याम
जो मेरे मन को भावे पिया जी है उनका नाम।
किसी को वाइट पसंद है, किसी को लाइट पसंद है
मुझे तो पिया जी की हाइट पसंद है।
32,000 की बग्गी मेरी, 40000 का घोड़ा
पिया जी के लिए मैंने उज्जैन (जिस शहर से हैं आप उसका नाम लेना है) शहर छोड़ा।
पति के लिए दोहे
गणगौर में पति की तारीफ में दोहे खूब गाए जाते हैं। मिसाल के तौर पर: "1234567, पिया जी हैं मेरे heaven" या "फागुन का महीना और गुलाबी रंग, पिया जी का और मेरा जीवन भर का संग"। इनमें अपने शहर और पति का नाम जोड़कर इसे निजी बनाया जाता है। जैसे: "32,000 की बग्गी मेरी, 40,000 का घोड़ा, पिया जी के लिए मैंने जयपुर शहर छोड़ा"। ये दोहे प्यार और समर्पण को हंसी-खुशी के साथ पेश करते हैं, जो हर सुनने वाले के चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं।
गणगौर के पिया जी के लिए दोहे
1234567 पिया जी है मेरे heaven
चप्पल पहनु बाटा ,साड़ी पहनु कोटा
पिया जी जाए बाहर, तो मैं करूं टाटा।
फागुन का महीना और गुलाबी रंग
पिया जी का और मेरा जीवन भर का संग।
मीरा ने पीया विष का प्याला, राधा ने श्याम को मदहोश कर डाला
गौरी ने पहनाई शिव को माला, गणगौर पूजा से मुझे मिला
पियाजी जैसा दिलवाला।
(इसमें पिया जी की जगह अपने पति का नाम लेना है)
माता के लिए दोहे: परंपरा की खुशबू
गणगौर माता को समर्पित दोहे भी खास हैं। एक लोकप्रिय दोहा है: "जात है गुजरात है, गुजरात का बाणया खाटा खूटी ताणया, गिण मिण सोला, सात कचोला इसर गोरा"। इसमें माता की पूजा के साथ भाई और परिवार का जिक्र होता है। ये दोहे पूजा में एकजुटता का भाव लाते हैं। महिलाएं इसे गाते हुए माता को हरी दूब, लड्डू और पेड़ा चढ़ाती हैं, जिससे माहौल भक्तिमय हो जाता है।
Gangaur Mata ke Dohe
जात है गुजरात है, गुजरात का बाणया खाटा खूटी ताणया
गिण मिण सोला, सात कचोला इसर गोरा
गेहूं ग्यारा, म्हारो भाई ऐमल्यो खेमल्यो, लाडू ल्यो ,
पेडा ल्यो जोड़ जवार ल्यो, हरी हरी दुब ल्यो, गोर माता पूज ल्यो
गणगौर का महत्व और उमंग
गणगौर सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि परिवार और प्यार का उत्सव है। विसर्जन के दिन ये दोहे गाना पूजा को अधूरापन से बचाता है। महिलाएं एक साथ बैठकर माता की आरती करती हैं और इन दोहों को गाकर माहौल में हंसी-खुशी भर देती हैं। यह पर्व दांपत्य जीवन की मिठास को बढ़ाता है और माता से सुख-शांति की प्रार्थना करता है।
गणगौर के दोहे
कटोरे में कटोरा, कटोरे में घेवर
पिया जी मेरी भाभी के देवर।
लाल मिर्च खाते नहीं, हरी मिर्च लाते नहीं
पिया जी मुझे लिए बगैर कहीं जाते नहीं।
बगीचे में क्यारी, क्यारी में पानी,
पिया जी मेरे राजा, मैं पिया जी की रानी।
सोने के कड़े में हीरे जड़े
पीछे पलट के देखा तो पिया जी खड़े।
इमली खाऊ, खट्टी -मीठी और मैं खाऊं बोर
पिया जी है ईसर मेरे,मैं उनकी गणगौर।
गागर में सागर, सागर में पानी
पिया जी नहीं घर पर ,तो नींद कैसे आनी।
आपकी मुस्कुराहट ने ऐसा अटैक किया
पिया जी आपको सिलेक्ट किया,बाकी सब को रिजेक्ट किया
मस्तक पर तिलक, गले में हार है
मुझे पिया जी से पिया जी को मुझसे प्यार है।
वह है दीपक मैं उनकी बाती
हर जन्म में हो पिया जी मेरे जीवन साथी।
कमरे में अलमारी ,अलमारी में नोटों की थप्पी
पिया जी ने चुपके से ले ली मेरी पप्पी।
इस गणगौर 31 मार्च को माता की पूजा में इन दोहों को जरूर शामिल करें। अपने पति और शहर का नाम जोड़कर इसे अपना बनाएं। यह न सिर्फ आपकी भक्ति को गहरा करेगा, बल्कि परिवार के साथ मस्ती का मौका भी देगा। तो तैयार हो जाइए—गणगौर के दोहों से माता को रिझाएं और प्यार का रंग बिखेरें।