हरियाणा के 6 विश्वविद्यालयों में इनक्यूबेशन सेंटर शुरू हुए, सुपवा यूनिवर्सिटी में भी जल्द होगा शुरू

चंडीगढ़। पिछले कुछ सालों में डिजिटल तकनीक के निरंतर प्रमोशन के बाद इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना और स्टार्टअप आइडियाज को लेकर काम में तेजी आई है। इनक्यूबेशन सेंटर के जरिए युवाओं और उधमियों के स्टार्टअप आइडियाज को अमली जामा पहनाने के लिए व्यापक स्तर पर इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की जा रही है।
स्टार्ट अप को लेकर काम करने के इच्छुक लोगों के लिए इनक्यूबेशन सेंटर में एक ही छत के नीचे तमाम सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसी कड़ी में ये बता दें कि हरियाणा के कई विश्वविद्यालयों को उद्योग और वाणिज्य विभाग द्वारा अपने संबंधित विश्वविद्यालयों में इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने के लिए वित्त पोषित किया गया है ताकि वहां पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स अपने स्टार्ट अप आइडियाज को लेकर वहां बिना किसी परेशानी और तमाम जरुरी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ काम कर सकें।
बता दें कि इन सेंटर में किसी भी आइडिया पर काम करने के हर तरह का तकनीकी टूल भी उपलब्ध है। सेंटर में तैयार लैब में किसी भी नए सामान को असेंबल किया जा सकता है। इसके साथ ही थ्रीडी प्रिंटर इसकी लाइव वर्किंग तक देखी जा सकती है। हालांकि पिछले पांच वर्षों के दौरान एचएसआईआईडीसी द्वारा राज्य में कोई आईटी पार्क, फ्लेटेड फैक्ट्रियां, थमिक आवास कंपनियां स्थापित नहीं की गई हैं।
हरियाणा के 6 जिलों के 7 विश्वविद्यालयों को वित्त पोषित किया गया
पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टरों, आईटी पार्को, इनक्यूबेशन सेंटरों, मेगा रीसाइक्लिंग प्लांट, फ्लेटेड फैक्ट्रियों, श्रमिक आवास कॉलोनियों की जिलेवार और वर्षवार संख्या को लेकर जानकारी रिपोर्ट हुई। आधिकारिक जानकारी अनुसार एचएसआईआईडीसी, आईएमटी सोहना, जिला नूंह, में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार, की ईएमसी 2.0 योजना के तहत 500 एकड़ के क्षेत्र में, एमईआईटीवाई से 331 करोड़ रुपये और राज्य सरकार से 30 करोड़ रुपये के अनुदान के साथ एक इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित कर रहा है।
इसके अलावा, हरियाणा भर में कुल सात (07) विश्वविद्यालयों को उद्योग और वाणिज्य विभाग द्वारा अपने संबंधित विश्वविद्यालयों में इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने के लिए वित्त पोषित किया गया है। इन विश्वविद्यालयों में जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद, गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, हिसार, दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू), भिवानी और पंडित लखमी चंद स्टेट परफॉर्मिग यूनिवर्सिटी ऑफ विजुअल आर्ट्स, रोहतक शामिल हैं।
इनक्यूबेशन सेंटर स्थापना को लेकर वित्त पोषण पाने वाले विश्वविद्यालय
1 जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद
2. गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, हिसार
3. दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल
4. महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक
5. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र
6. चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू), भिवानी
7. पंडित लखमी चंद स्टेट परफॉर्मिग यूनिवर्सिटी ऑफ विजुअल आर्ट्स, रोहतक
गुरुग्राम में दो इनक्यूबेटर चालू, 6 यूनिवर्सिटीज में भी चालू
उपर्युक्त सात विश्वविद्यालयों में ने 6 ने अपने इनक्यूबेशन केंद्र ने प्रचालन शुरू कर दिया है। केवल एक विश्वविद्यालय पंडित लखमी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स, रोहतक अपना इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया में है । इसके अलावा, उद्योग और वाणिज्य विभाग के दायरे में दो अन्य इनक्यूबेटर अर्थात स्टार्ट- अप वेयरहाउस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स (सीओई-आईओटी) को हारट्रोन कैंपस, गुरुग्राम में सफलतापूर्वक स्थापित और चालू किया गया है।
आईएमटी, रोहतक में 500000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की रीसाइक्लिंग क्षमता के साथ लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में 150 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एक अत्याधुनिक मेगा रीसाइक्लिंग प्लांट (स्टील स्क्रैप का बेडिंग और कंप्रेसिंग) स्थापित किया गया है। संयंत्र का व्यावसायिक उत्पादन 01.08.2021 को शुरू हो गया है।
जानिए क्या सुविधाएं मिलती है इनक्यूबेटर में
सेंटर में नए स्टार्ट अप का आइडिया लेकर पहुंचने वाले को एक ही छत के नीचे सभी तरह की सुविधाएं मिलेंगी। सेंटर में किसी नए आइडिया को दिमाग में विचार आने के बाद इसके हर चरण पर काम करने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है और सेंटर की ओर हर तरह के विशेषज्ञों की टीम तैयार की गई है।
किसी भी बेहतर आइडिया पर काम करने की सोच रखने वाले के आइडिया को कागज पर उतारने, उसे चरणबद्ध करने से लेकर थ्रीडी प्रिंटर के माध्यम से उसका डिजाइन और वर्किंग तक दिखाने के लिए सेंटर में अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए जाते हैं। इतना ही नहीं अपने प्रोजेक्ट पर व्यक्तिगत से रूप से कार्य करने के लिए अलग कक्ष तैयार किए जाते हैं। । इन कक्षों में एयर कंडीशनर से लेकर जरूरी फर्नीचर और हाइ स्पीड इंटरनेट की सुविधा तक मुहैया करवाई गई है। इसके साथ कंप्यूटर पर कार्य करने के लिए से अलग से कंप्यूटर लैब भी होती है।
कई जिलों में स्कूलों में भी खोले गए हैं इनक्यूबेशन सेंटर
प्राप्त जानकारी में भी सामने आया है कि प्रदेश के कई जिलों में स्कूलों में भी इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की गई है। शिक्षा विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि समग्र शिक्षा विभाग ने नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक विषय के रूप में विभिन्न पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। साथ ही नई शिक्षा नीति के अंतर्गत अधिकारियों ने स्कूलों में इनक्यूबेशन केंद्र खोलने की मांग मुख्यालय से की थी और कई शुरु भी हो चुके हैं।
इसके अलावा स्कूलों में ऑटोमोबाइल, प्लंबर, कृषि और पर्यटन पाठ्यक्रम शुरू कराने की मंजूरी मांगी गई है। विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ तकनीकी शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इन केंद्रों पर अन्य स्कूलों के विद्यार्थी भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। बता दें कि इनक्यूबेशन सेंटर शुरू करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्रों को अब इंटर्नशिप या अप्रेंटिसशिप करने के लिए किसी बड़े संस्थान या कंपनियों में नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि इनक्यूबेशन सेंटर खुलने के बाद छात्रों को वहां अभ्यास कराया जाएगा। इनक्यूबेशन केंद्र शुरू करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ रोजगार के लिए आत्मनिर्भर बनाना है।
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