Thoughts of Swami Vivekananda: उच्च कोटि के नैतिक मूल्यों से  परिपूर्ण युवा ही राष्ट्र की संपत्ति हैं

Thoughts of Swami Vivekanandain Hindi : स्वामी जी का मानना था कि युवा ही राष्ट्र का कायाकल्प करने का सामर्थ्य रखते हैं। वे चाहते थे कि मेरे देश का युवा उच्च कोटि के चारित्रिक मूल्यों से युक्त हो। प्रत्येक युवा में श्रेष्ठ चारित्रिक गुणों की दैवी संपत्ति हो जिससे वह अपने राष्ट्र को नई दिशा दे सकें।
 

Haryana News Post, (नई दिल्ली) National Youth Day 2024 : 12 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है ।युवा शब्द से ही उत्साह, स्फूर्ति, सक्रियता आदि गुणों का बोध होता है।

12 जनवरी युगपुरुष सन्यासी स्वामी विवेकानंद जी का जन्म दिवस है। सन 1984 में भारतीय सरकार ने इसे युवा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। युवा किसी भी राष्ट्र की उन्नति का आधार स्तंभ होते हैं। युवा पीढ़ी जिस और करवट लेती है राष्ट्र की उन्नति और अवनति उसी और ढल जाती है।

स्वामी विवेकानंद स्वयं एक युवा सन्यासी एवं प्रखर वक्ता थे। उनका जन्म दिवस राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाए जाने का प्रमुख कारण उनका दर्शन, सिद्धांत, अलौकिक विचार और उनके आदर्श हैं जिनका उन्होंने पालन किया तथा पूरे विश्व को भी इसका संदेश दिया।

स्वामी जी का चिंतन था कि युवा सादगी, प्रेम, दया, विनम्रता, सत्य, त्याग, अहिंसा एवं पुरुषार्थ की प्रतिमूर्ति हों। ऐसे दिव्य नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण युवा शक्ति को भारतवर्ष में स्वामीजी देखना चाहते थे।

इतिहास साक्षी है कि अगर मनुष्य के अंदर यह दिव्य गुण, आत्मविश्वास है तो दुनिया स्वयं उसके आदर्शों की अनुगामी हो जाती है ।वर्तमान समाज में जो युवाओं की स्थिति है उसके संदर्भ में विवेकानंद के आदर्श अत्यंत अनिवार्य हैं।

आज का युवा निराशा, चरित्र हीनता ,भ्रष्टाचार के वातावरण में पूर्ण रूप से हताश हो चुका है । वह अपनी सांस्कृतिक विरासत से पूर्ण रूप से अनभिज्ञ होकर पाश्चात्य संस्कृति के मकड़जाल में फंसा हुआ है।

आज का युवा विवेकानंद के सिद्धांतों से दूर जा चुका है। स्वामी जी के विचार ऐसे निराशावादी एवं चरित्र हीनता की दलदल में धंसे युवाओं के लिए आशा की किरण के समान है। ऐसे में राष्ट्र की युवा शक्ति को जागृत करना एवं उन्हें देश के प्रति कर्तव्यों का बोध कराना अत्यंत आवश्यक है।

स्वामी विवेकानंद ने 1897 में मद्रास में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था कि हम विश्व की महानतम संस्कृति के संवाहक हैं। हम उसी प्राचीन तम संस्कृति के पुत्र हैं जो उच्च कोटि के नैतिक मूल्यों एवं श्रेष्ठ आचरण पर अवलंबित है।

मैं चाहता हूं कि मेरे देश का प्रत्येक युवा उच्च कोटि के श्रेष्ठ चरित्र का उपासक बने। देश का हर एक युवा दिव्य गुणों का भंडार बने। स्वामी जी की युवाओं से बड़ी उम्मीदें थी। परंतु आज का युवा संस्कार हीन होकर  चल रहा है।

उसे स्वयं के अस्तित्व का बोध ही नहीं है ।वह निराशा, नकारात्मक विचारधारा व पाश्चात्य संस्कृति के कीचड़ में फंसा हुआ है। स्वामी जी का कहना था कि युवा पुरुषार्थ, संघर्ष की भट्टी में तप कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करें। उनका चिंतन था कि उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए।

स्वामी जी युवाओं के प्रेरणा स्रोत थे। उनके विचार मनुष्य में नई ऊर्जा, उत्साह आशा, पुरुषार्थ का संचार करने वाले हैं। आज की युवा पीढ़ी को स्वामी जी के सिद्धांतों का अनुगमन करना चाहिए। प्रत्येक युवा को स्वामी जी के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने व्यक्तित्व में श्रेष्ठ नैतिक मूल्यों को आत्मसात करना चाहिए।

आज की युवा शक्ति जिस और जा रही है उसे केवल इस युवा सन्यासी के क्रांतिकारी विचार ही सन्मार्ग की ओर ले जा सकते हैं। आज हमारे देश में अधिकतर आबादी युवाओं की है परंतु आज के युवा जीवन में आने वाली बाधाओं ,प्रतिकूल परिस्थितियों एवं थोड़ी सी असफलता से इतना टूट जाते हैं कि वह बहुत जल्दी जीवन से हार मान लेते हैं।

स्वामी जी का पूरा जीवन बाधाओं, संघर्षों , अभावों की कहानी है, परंतु फिर भी उन्होंने अपने आत्मबल एवं श्रेष्ठ व्यक्तित्व के बल पर पूरे विश्व में भारतीय सनातन संस्कृति का उद्घोष किया।

आज प्रत्येक युवा को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। जिस देश के युवा में उच्च कोटि के नैतिक चारित्रिक मूल्यों का समावेश है एवं जिसमें आत्मिक दृढ़ता है, बड़ी बड़ी बाधाएं भी उसके मार्ग को नहीं रोक सकती।

National Youth Day 2024: विकास या विनाश युवा शक्ति पर निर्भर