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केतु का पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में बड़ा गोचर, सिंह और वृश्चिक राशि वालों को मिलेगा राजयोग जैसा फल

On: जनवरी 19, 2026 2:42 अपराह्न
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केतु का पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में बड़ा गोचर, सिंह और वृश्चिक राशि वालों को मिलेगा राजयोग जैसा फल
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केतु की बदलती चाल और ज्योतिषीय गणना वैदिक ज्योतिष में केतु को एक छाया ग्रह माना जाता है जो मोक्ष और अचानक होने वाली घटनाओं का कारक है। जब भी केतु अपनी चाल या नक्षत्र बदलते हैं तो इसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ता है।

ताजा ज्योतिषीय गणना के अनुसार केतु अब पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के पहले चरण में प्रवेश कर रहे हैं। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है जो सुख और विलासिता का ग्रह है। केतु का शुक्र के नक्षत्र में जाना एक दुर्लभ संयोग बना रहा है जो अगले कुछ महीनों तक सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा।

सिंह और वृश्चिक राशि वालों की चमकेगी किस्मत

केतु इस समय सिंह राशि में विराजमान हैं। नक्षत्र परिवर्तन का सबसे शुभ प्रभाव सिंह राशि के जातकों पर ही देखने को मिलेगा।

सिंह राशि: ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान सिंह राशि वाले लोगों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होगा। जिन्हें लंबे समय से संतान पक्ष से जुड़ी चिंताएं थीं वह अब दूर होंगी। कार्यक्षेत्र में आपके प्रदर्शन की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा।

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वृश्चिक राशि: इस राशि के लोगों के लिए केतु का यह बदलाव आर्थिक मोर्चे पर शानदार रहने वाला है। अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। यदि आपका पैसा कहीं फंसा हुआ था तो उसके वापस मिलने की पूरी संभावना है। आध्यात्मिक कार्यों में भी आपकी रुचि बढ़ेगी।

इन दो राशियों को रहना होगा सावधान

हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। जहां कुछ राशियों को लाभ होगा वहीं मिथुन और तुला राशि वालों को थोड़ा संभलकर रहने की सलाह दी गई है।

तुला और मिथुन: इन दोनों राशियों के जातकों को अपनी जेब पर नियंत्रण रखना होगा। केतु का यह गोचर आपके खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी करा सकता है। बिना सोचे समझे किया गया निवेश नुकसान का कारण बन सकता है। इसके अलावा मानसिक तनाव और छोटी मोटी यात्राओं से थकान हो सकती है। इसलिए धैर्य बनाए रखना ही इसका एकमात्र उपाय है।

कुंडली में कमजोर केतु के संकेत

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक की कुंडली में केतु अशुभ स्थान पर बैठा हो या कमजोर हो तो उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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  1. सेहत पर असर: खराब केतु के कारण व्यक्ति को हृदय संबंधित विकार या त्वचा से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई बार बीमारी का सही निदान नहीं हो पाता।

  2. मानसिक स्थिति: केतु के खराब होने पर व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है और वह भ्रम की स्थिति में रहता है।

  3. करियर और रिश्ते: नौकरी में अस्थिरता बनी रहती है और परिवार के सदस्यों के साथ बिना वजह मनमुटाव होने लगता है।

ज्योतिषचार्यों के अनुसार केतु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए भगवान गणेश की आराधना सबसे उत्तम मानी गई है। इसके अलावा कुत्तों को रोटी खिलाने और जरूरतमंदों को काला कंबल दान करने से भी केतु शांत होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं। यह समय आत्मविश्लेषण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहतरीन है।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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