चंडीगढ़, 01 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। वैशाख पूर्णिमा पर चंद्रमा का पूर्ण प्रभाव हमारे मन और कर्म पर पड़ता है। आज के दिन मंत्र साधना के साथ-साथ अपनी राशि के अनुसार उपाय करने से कुंडली के दोष शांत होते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज का दिन मेष राशि वालों के लिए ऊर्जा से भरा रहेगा, वहीं मिथुन राशि के जातकों को अपनी बौद्धिक क्षमता से कार्यक्षेत्र में सम्मान मिलेगा। कर्क राशि के लिए चंद्रमा का स्वराशि में होना मानसिक शांति और पारिवारिक सुख में वृद्धि का कारक बनेगा।
आर्थिक लाभ और करियर का योग
सिंह और कन्या राशि के जातकों के लिए वैशाख पूर्णिमा का दिन निवेश के लिहाज से उत्तम है। अटके हुए सरकारी काम आज गति पकड़ सकते हैं। वृश्चिक राशि वालों को आज अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, लेकिन उन्हें क्रोध से बचने की आवश्यकता है। धनु और मीन राशि के जातकों पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहेगी, जिससे उनके आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि होगी। मकर और कुंभ राशि के लोगों को आज कड़ी मेहनत के बाद ही शुभ परिणाम प्राप्त होंगे।
इन उपायों से चमकेगी किस्मत
आज पूर्णिमा के दिन अपनी राशि के दोषों को कम करने के लिए कुछ विशेष दान जरूर करें। अग्नि तत्व की राशियों (मेष, सिंह, धनु) को तांबे का पात्र या गुड़ दान करना चाहिए। पृथ्वी तत्व की राशियों (वृषभ, कन्या, मकर) के लिए तिल और वस्त्र का दान शुभ है। वायु तत्व वाली राशियों (मिथुन, तुला, कुंभ) को जल सेवा करनी चाहिए, जबकि जल तत्व की राशियों (कर्क, वृश्चिक, मीन) को दूध, चावल और चांदी की वस्तुओं का दान करने से विशेष मानसिक शांति प्राप्त होगी।
मंत्र शक्ति से दूर होंगी जीवन की बाधाएं
आध्यात्मिक उन्नति के लिए आज मंत्र जाप का विशेष महत्व है। यदि आप आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं, तो ‘ॐ विष्णवे नमः’ और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप स्थिरता प्रदान करता है। वहीं, बौद्ध परंपरा के अनुसार ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ और ‘ॐ मणि पद्मे हुं’ मंत्रों का उच्चारण मन को शुद्ध कर करुणा का भाव जगाता है। जानकारों का कहना है कि शांत स्थान पर बैठकर दीपक जलाकर किया गया ध्यान आज के दिन कई गुना अधिक फल प्रदान करता है।
चंद्र अर्घ्य और दान का विशेष फल
आज की रात चंद्र देव की आराधना के लिए सर्वोत्तम है। मानसिक शांति के लिए चांदी के लोटे में जल, दूध, चावल और फूल मिलाकर ‘ॐ सों सोमाय नम:’ मंत्र के साथ चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। इसके अलावा, इस पावन तिथि पर अन्न, जल और वस्त्रों का दान करने की परंपरा है। तपती गर्मी के इस मौसम में राहगीरों को जल पिलाना और गरीबों की सेवा करना ही बुद्ध और विष्णु की सच्ची पूजा मानी गई है। कृषि प्रधान हरियाणा में किसान भी इस दिन को समृद्धि के प्रतीक के रूप में मनाते हैं।
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