चंडीगढ़, 11 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। पूरे उत्तर भारत में 10 मई से ‘रोग पंचक’ की शुरुआत हो गई है। ज्योतिष गणना के अनुसार, 14 मई तक चलने वाला यह समय स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति के लिए बेहद संवेदनशील है। इस दौरान बीमारियों और तनाव से बचने के लिए विशेष दान और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
ज्योतिषियों का मानना है कि रविवार से शुरू होने वाला पंचक सीधे तौर पर व्यक्ति की सेहत और मानसिक ऊर्जा पर प्रहार करता है।
क्या है रोग पंचक और क्यों बढ़ी चिंता?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब भी पंचक रविवार के दिन से आरंभ होता है, तो उसे ‘रोग पंचक’ की संज्ञा दी जाती है। 10 मई को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर इसकी शुरुआत हुई है। स्थानीय पंडितों का कहना है कि यह समय रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है, जिससे पुरानी बीमारियां दोबारा उभर सकती हैं।
मानसिक तनाव और कार्यों में रुकावट की आशंका
यह पंचक 14 मई, गुरुवार को रात 10 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगा। इन पांच दिनों के दौरान व्यक्ति को अकारण थकान, मानसिक बेचैनी और कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस दौरान किसी भी तरह के बड़े निवेश या कानूनी विवाद में न पड़ें, क्योंकि गलत निर्णय लेने की संभावना अधिक रहती है।
दान और पुण्य से कटेगा संकट
शास्त्रों में पंचक के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए दान का विशेष महत्व बताया गया है। गरीब और जरूरतमंदों को गेहूं, चावल या बनी हुई रसोई का दान करना इस समय सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा, बीमार लोगों को दवाइयां और फल बांटने से भी ग्रह दोष शांत होते हैं।
इन चीजों का दान है विशेष लाभकारी
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, रोग पंचक में हरी मूंग और ताजी सब्जियों का दान स्वास्थ्य लाभ देता है। वहीं, काले तिल और गुड़ का दान करने से नकारात्मक ऊर्जा घर से दूर रहती है। अगर आप किसी विशेष मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, तो सफेद वस्त्रों का दान शांति प्रदान कर सकता है।
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यह सामग्री ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सामान्य सूचना प्रदान करने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। Haryana News Post इस जानकारी की पूर्णता, सटीकता या विश्वसनीयता के संबंध में कोई दावा नहीं करता है और न ही किसी प्रकार की जिम्मेदारी स्वीकार करता है। इस आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए पाठक स्वयं उत्तरदायी होंगे।
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