अंबाला, 14 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख महीने की अमावस्या का पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व है। इस साल यह पुण्य तिथि 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषियों के मुताबिक इस बार अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए सिद्धियां प्राप्त करने और बाधाओं को दूर करने का सुनहरा मौका है। हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालु इस दिन कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर या हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थों पर आस्था की डुबकी लगाएंगे।
तिथि और मुहूर्त का सटीक गणित
अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल को रात 8:11 बजे से ही हो जाएगी। इसका समापन अगले दिन 17 अप्रैल को शाम 5:21 बजे होगा। शास्त्र सम्मत उदयातिथि की मान्यता के अनुसार स्नान-दान और व्रत 17 अप्रैल को ही किया जाएगा। पूजा-अर्चना के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:09 से 5:09 बजे तक रहेगा। यदि आप किसी विशेष कार्य की शुरुआत या बड़ा दान करना चाहते हैं, तो दोपहर 11:55 से 12:45 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त सबसे उत्तम फल देने वाला है।
ऐसे करें पूजा और तर्पण की शुरुआत
इस खास दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान से करें। यदि आप गंगा या यमुना जैसी किसी पवित्र नदी पर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिला लें। स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें और तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें। सूर्य को जल देने से न केवल स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करें और उनके नाम पर भोजन या वस्त्र का दान करें।
दान और सेवा से मिटेंगे कष्ट
वैशाख की चिलचिलाती गर्मी में किए गए दान का महत्व शास्त्रों में विस्तार से बताया गया है। पितरों की शांति के लिए इस दिन मिट्टी का घड़ा (मटका), सत्तू, छाता या खरबूजे का दान करना चाहिए। मान्यता है कि वैशाख अमावस्या पर जरूरतमंदों को पानी पिलाना और छाया की व्यवस्था करना व्यक्ति को गंभीर रोगों और आर्थिक तंगी से मुक्ति दिलाता है। पूर्वजों के नाम पर पीपल या बरगद का पौधा लगाना भी इस तिथि पर बेहद शुभ माना जाता है।
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