चंडीगढ़, 17 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। इस साल सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के 12वीं कक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद से ही ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा था। पास प्रतिशत में गिरावट और उम्मीद से कम नंबर आने पर सोशल मीडिया पर डिजिटल मूल्यांकन को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा। इस विवाद को शांत करने और छात्रों के हित की रक्षा के लिए अब CBSE ने खुद सामने आकर स्थिति साफ की है और रीइवैल्युशन की प्रक्रिया को बेहद आसान और सस्ता बना दिया है।
700 रुपये की जगह अब मात्र 100 रुपये में दिखेगी कॉपी
मध्यमवर्गीय परिवारों और छात्रों को राहत देते हुए बोर्ड ने रीइवैल्युशन फीस के पुराने ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। अब छात्र सिर्फ 100 रुपये की मामूली फीस देकर अपनी स्कैन की हुई आंसर शीट ऑनलाइन देख सकेंगे, जिसके लिए पहले 700 रुपये चुकाने पड़ते थे। इसके अलावा, यदि किसी छात्र को पूरी कॉपी के बजाय किसी खास सवाल के मूल्यांकन पर आपत्ति है, तो वह प्रति प्रश्न महज 25 रुपये देकर उसकी दोबारा जांच करा सकता है। इस फैसले से उन हजारों छात्रों को सीधे तौर पर फायदा होगा जो पैसे की कमी के कारण अपनी कॉपियां दोबारा चेक नहीं करवा पाते थे।
2014 से चल रही है व्यवस्था, कैंब्रिज बोर्ड का दिया हवाला
शिक्षा मंत्रालय और CBSE के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ऑन स्क्रीन मार्किंग कोई नया प्रयोग नहीं है। बोर्ड ने इस आधुनिक व्यवस्था की शुरुआत साल 2014 में ही कर दी थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण इसे पूरी तरह लागू करने में वक्त लगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कैंब्रिज जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित बोर्ड भी इसी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का उपयोग करते हैं। इस सिस्टम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें टोटलिंग और नंबर जोड़ने जैसी मानवीय गलतियां पूरी तरह खत्म हो जाती हैं और देश के किसी भी कोने से विशेषज्ञ शिक्षक कॉपियों की निष्पक्ष जांच कर पाते हैं।
हल्की स्याही वाली 13 हजार कॉपियां दोबारा मैनुअल जांची गईं
बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस शैक्षणिक सत्र में रिकॉर्ड 98 लाख 66 हजार उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल जांच की गई। कॉपियों को पहले उच्च तकनीक से स्कैन किया गया और फिर तीन स्तरीय सुरक्षा वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म पर परीक्षकों को भेजा गया। हालांकि, बोर्ड ने यह भी स्वीकार किया कि लगभग 13 हजार कॉपियों में हल्की स्याही या खराब स्कैनिंग की समस्या आई थी। छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, ऐसी सभी उत्तर पुस्तिकाओं को तुरंत सिस्टम से अलग कर पारंपरिक मैनुअल (कागज-पेन) तरीके से दोबारा जांचा गया ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।
19 मई से खुलेगा पोर्टल, अंक बढ़े तो पैसे होंगे रिफंड
CBSE ने पारदर्शी नीति अपनाते हुए घोषणा की है कि अगर रीचेकिंग या वेरिफिकेशन के बाद छात्रों के नंबरों में बढ़ोतरी होती है, तो आवेदन के समय जमा की गई पूरी राशि छात्र के खाते में वापस (रिफंड) कर दी जाएगी। शेड्यूल के मुताबिक, छात्र 19 मई से अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को देखने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद, अंकों के सत्यापन और विशेष प्रश्नों के पुनर्मूल्यांकन के लिए 26 मई से 29 मई तक विंडो खोली जाएगी। छात्र अपनी कॉपियों में स्टेप-बाय-स्टेप मार्किंग को खुद लाइव देख सकेंगे।
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