दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नौकरीपेशा लोगों और आम मुसाफिरों के लिए सफर अब बेहद सस्ता और सुगम होने जा रहा है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेनो वेस्ट और दिल्ली को जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जोड़ने के लिए आगामी 15 जून से अत्याधुनिक ई-सिटी बसों का पहिया घूमने लगेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का औपचारिक शुभारंभ नोएडा के सेक्टर 33 स्थित शिल्प हाट से किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 40 ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस उद्घाटन समारोह के दौरान गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा और नोएडा के विधायक पंकज सिंह भी जमीन पर मौजूद रहेंगे।
पहले चरण में कितनी बसें चलेंगी और क्या है पूरा प्लान?
इस पूरी परिवहन परियोजना के तहत दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर कुल 510 ई-सिटी बसें उतारने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। हालांकि, पहले चरण के तहत केवल 110 बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के साथ एक विशेष अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इस शुरुआती चरण के बाद अगले 4 से 5 महीनों के भीतर ‘मुख्यमंत्री ई-सिटी बस योजना’ के तहत बेड़े में 100 अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक बसें और शामिल कर दी जाएंगी।
बसों का रूट, समय और किराया कितना होगा?
आम जनता को बसों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा क्योंकि हर 15-15 मिनट के अंतराल पर यह बसें स्टैंड पर उपलब्ध रहेंगी। इन बसों में सफर करने के लिए न्यूनतम किराया 10 रुपये और अधिकतम किराया 30 रुपये निर्धारित किया गया है। प्रत्येक ई-बस को हर दिन करीब 200 किलोमीटर का सफर तय करना होगा। पहले चरण के बेड़े में 12 मीटर लंबी 100 सामान्य ई-बसें और रूट पर पहली बार 10 डबल डेकर बसें उतारी जा रही हैं। इन बसों को मुख्य रूप से दो प्रमुख रूटों पर चलाया जाएगा। पहले रूट में बॉटेनिकल गार्डन से गोल्फ कोर्स, सिटी सेंटर, होशियारपुर, सेक्टर-51, पर्थला खंजूरपुर और ग्रेनो वेस्ट का गौर चौक शामिल हैं। वहीं, दूसरा सबसे महत्वपूर्ण रूट जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, परी चौक, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और दोनों शहरों के प्रमुख सेक्टरों को आपस में जोड़ेगा। इसके अलावा ये बसें दिल्ली के आईएसबीटी सराय काले खां, आनंद विहार और गाजियाबाद के विभिन्न अंदरूनी इलाकों तक भी फेरे लगाएंगी। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: दिल्ली मेट्रो का सबसे लंबा सबवे बनेगा, राजीव चौक से एयरपोर्ट पहुंचना होगा आसान
20 चार्जिंग प्वाइंट तैयार, ऐसे बंटेगी तीनों प्राधिकरणों की हिस्सेदारी
परियोजना के सफल संचालन के लिए सेक्टर-90 स्थित एनएमआरसी (NMRC) डिपो को मुख्य केंद्र बनाया गया है। इस डिपो में बसों को रीचार्ज करने के लिए 20 हाई-स्पीड ई-चार्जिंग प्वाइंट पूरी तरह तैयार कर लिए गए हैं, जहां 5000 किलोवाट के दो भारी-भरकम बिजली कनेक्शन लगाए जा रहे हैं। डिपो परिसर में ही एक आधुनिक सर्विस सेंटर, ड्राइवर-कंडक्टरों के लिए विश्राम गृह और प्रशासनिक कार्यालय बनाया गया है। सफर के दौरान किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए बॉटेनिकल गार्डन बस स्टैंड पर चार वैकल्पिक चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट के खर्च और संचालन को तीनों स्थानीय विकास प्राधिकरणों के बीच एक निश्चित रेशियो में बांटा गया है। इसमें वित्तीय घाटे की भरपाई के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) का फॉर्मूला तय हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, तीनों प्राधिकरण इस पूरे प्रोजेक्ट में 50:25:25 के आर्थिक अनुपात में आपसी सहयोग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यात्रियों की मांग और रूट पर भीड़ को देखते हुए ई-बसों की संख्या में और इजाफा किया जाएगा।













