ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

सूर्य ग्रहण आज रात: मेष, कर्क, सिंह समेत इन 5 राशियों को रहना होगा सतर्क

On: अगस्त 12, 2026 2:15 अपराह्न
Follow Us:
सूर्य ग्रहण आज रात: मेष, कर्क, सिंह समेत इन 5 राशियों को रहना होगा सतर्क | solar-eclipse-12-august-2026-five-zodiac-signs-caution
Join WhatsApp Group

साल 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात लगेगा। दिए गए ज्योतिषीय विवरण के अनुसार ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 4 मिनट पर होगी, पूर्ण ग्रहण रात 10 बजकर 28 मिनट से शुरू होगा और परमग्रास यानी ग्रहण का चरम समय रात 11 बजकर 16 मिनट रहेगा। ग्रहण का समापन 13 अगस्त की रात 1 बजकर 28 मिनट पर होगा।

भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां इसके लिए सूतक मान्य नहीं माना जाएगा। हालांकि ज्योतिषीय मान्यता में ग्रहण के दिखाई देने या न दिखाई देने से ग्रहों की स्थिति से जुड़े प्रभावों को अलग नहीं माना जाता।

कर्क राशि में सूर्य ग्रहण क्यों माना जा रहा खास?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा कर्क राशि में अश्लेषा नक्षत्र के दौरान रहेंगे। कर्क राशि को चंद्रमा की अपनी राशि माना जाता है, जबकि अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध हैं। ग्रहण के समय कर्क राशि में बुध, सूर्य और गुरु की मौजूदगी भी बताई गई है।

सूर्य को ज्योतिष में आत्मविश्वास, पिता, सत्ता, प्रतिष्ठा और आत्मबल से जोड़ा जाता है। वहीं चंद्रमा मन, भावनाओं, माता, घर और मानसिक शांति का कारक माना जाता है। इसलिए ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इन दोनों के ग्रहण की स्थिति व्यक्ति के निजी जीवन और निर्णय लेने की क्षमता पर असर डाल सकती है।

अश्लेषा नक्षत्र में ग्रहण का क्या संकेत है?

अश्लेषा नक्षत्र का स्वामी बुध है। ज्योतिष में बुध को बुद्धि, संवाद, सूचना, तर्क, कारोबार और निर्णय लेने की क्षमता से जोड़ा जाता है। अश्लेषा की प्रकृति को गहराई, रणनीति और छिपी हुई बातों को सामने आने से संबंधित माना जाता है।

ग्रहण के समय बुध के सूर्य और चंद्रमा के साथ रहने से ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार भावनाओं और तर्क के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में किसी की बात को आधी जानकारी के आधार पर सच मान लेना या रिश्तों में सामने वाले के इरादे का अनुमान लगाना परेशानी बढ़ा सकता है।

पुरानी नाराजगी, दबा हुआ तनाव या रिश्तों से जुड़ी अनकही बातें भी सामने आने की संभावना बताई गई है। इसलिए इस अवधि में किसी बड़े फैसले से पहले पूरी जानकारी जुटाना और जल्द प्रतिक्रिया देने से बचना बेहतर माना गया है।

क्या सूर्य ग्रहण का असर 90 दिनों तक रहेगा?

ज्योतिषीय मान्यता में ग्रहण के प्रभाव को कुछ समय तक रहने वाला माना जाता है। इसी आधार पर इस ग्रहण से जुड़े प्रभावों को करीब 90 दिनों तक देखने की बात कही गई है।

Ganpati Sthapana 2026: ईशान कोण में क्यों रखें गणपति? जानें ज्योतिष और वास्तु का संबंध
Ganpati Sthapana 2026: ईशान कोण में क्यों रखें गणपति? जानें ज्योतिष और वास्तु का संबंध

इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे 90 दिनों तक लगातार नकारात्मक घटनाएं होंगी। इस अवधि में ग्रहण से जुड़े भाव और ग्रहों के विषय अलग-अलग परिस्थितियों के रूप में सामने आने की ज्योतिषीय संभावना बताई जाती है।

मेष राशि: घर और प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में सावधानी

मेष राशि से कर्क चौथा भाव है। ज्योतिष में चौथे भाव को घर, माता, प्रॉपर्टी, वाहन और मानसिक शांति से जोड़ा जाता है। इसलिए इस राशि के जातकों की निजी जिंदगी में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है।

घर में किसी बात को लेकर विवाद बढ़ सकता है या माता की सेहत और जरूरतों को लेकर चिंता हो सकती है। प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने की योजना बना रहे हैं तो दस्तावेज और भुगतान की शर्तों को अच्छी तरह जांचना जरूरी बताया गया है।

वाहन से जुड़े काम में भी लापरवाही से बचें। कामकाज का तनाव परिवार पर निकालने से रिश्तों में अनावश्यक दूरी बढ़ सकती है।

उपाय: ग्रहण के बाद सूर्य को जल दें और जरूरतमंद व्यक्ति को गेहूं व गुड़ का दान करें। महत्वपूर्ण काम शुरू करने से पहले माता-पिता का आशीर्वाद लेने की सलाह दी गई है।

कर्क राशि: मन और फैसलों पर ज्यादा असर

कर्क राशि वालों के लिए यह ग्रहण विशेष संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि सूर्य और चंद्रमा इसी राशि में ग्रहण की स्थिति में रहेंगे। चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है, इसलिए ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मानसिक दबाव और भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ सकती है।

परिवार से जुड़ी कोई बात ज्यादा परेशान कर सकती है। करियर में ऐसा फैसला सामने आ सकता है जहां भावनाओं और व्यावहारिक सोच के बीच असमंजस पैदा हो। रिश्तों में भी छोटी बात को ज्यादा सोचने से बचना जरूरी बताया गया है।

अश्लेषा नक्षत्र से जुड़ी ज्योतिषीय मान्यता के कारण सामने वाले के कम बोलने को तुरंत नाराजगी समझना उचित नहीं माना गया है।

Ganesh Chaturthi 2026: ज्योतिष के अनुसार इन राशियों के लिए खास है गणपति पूजा, जानिए उपाय
Ganesh Chaturthi 2026: ज्योतिष के अनुसार इन राशियों के लिए खास है गणपति पूजा, जानिए उपाय

उपाय: ग्रहण के बाद भगवान शिव को जल अर्पित करें और 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। सोमवार को दूध, चावल या किसी सफेद वस्तु का दान करने की सलाह दी गई है।

सिंह राशि: खर्च और विदेश से जुड़े काम में सावधानी

सिंह राशि से कर्क बारहवां भाव है। ज्योतिष में बारहवें भाव को खर्च, विदेश, नींद और एकांत से जोड़ा जाता है। सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस ग्रहण का असर इस राशि के जातकों को व्यक्तिगत स्तर पर अधिक महसूस होने की ज्योतिषीय मान्यता है।

अचानक खर्च सामने आ सकता है। विदेश यात्रा, नौकरी या पढ़ाई से जुड़े काम में देरी हो सकती है। पासपोर्ट, वीजा और अन्य दस्तावेजों में छोटी गलती भी परेशानी बढ़ा सकती है।

बुध के अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी होने के कारण ऑनलाइन लेनदेन और डिजिटल संवाद में भी सावधानी रखने की सलाह दी गई है। संदिग्ध संदेश या अनजान लिंक पर भरोसा न करने की बात कही गई है।

उपाय: ग्रहण के बाद गेहूं और गुड़ का दान करें। रोज सुबह सूर्य को जल देने और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने की सलाह दी गई है।

हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: देवगुरु बृहस्पति होंगे उदित, 6 राशियों के लिए ज्योतिष में बताए गए शुभ संकेत

धनु राशि: लोन, निवेश और दस्तावेज में जल्दबाजी से बचें

धनु राशि से कर्क आठवां भाव है। ज्योतिष में आठवें भाव को अचानक बदलाव, लोन, बीमा, कर, संयुक्त धन और विरासत से जुड़े मामलों का भाव माना जाता है।

ग्रहण के बाद कोई पुराना वित्तीय मामला दोबारा सामने आने की ज्योतिषीय संभावना जताई गई है। लोन, बीमा या पैतृक संपत्ति से जुड़े दस्तावेज ध्यान से जांचने की सलाह दी गई है।

2026 में पंचक के बीच शुरू होगा पितृपक्ष, क्या इस दौरान श्राद्ध करना शुभ है?
2026 में पंचक के बीच शुरू होगा पितृपक्ष, क्या इस दौरान श्राद्ध करना शुभ है?

निवेश के मामले में किसी की बात पर तुरंत पैसा लगाने से बचना बेहतर बताया गया है। पहले पूरी जानकारी जुटाने के बाद फैसला लेने की सलाह है। अश्लेषा से जुड़ी ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कोई छिपी जानकारी सामने आ सकती है, जो आगे किसी बड़े नुकसान से बचाने में मदद कर सकती है।

उपाय: ग्रहण के बाद भगवान शिव का अभिषेक करें और काले तिल का दान करें। वित्तीय समझौते या दस्तावेज को पढ़े बिना हस्ताक्षर न करने की सलाह दी गई है।

मकर राशि: रिश्ते और कारोबारी साझेदारी में संभलकर चलें

मकर राशि से कर्क सातवां भाव है। यह भाव विवाह, जीवनसाथी, कारोबारी साझेदारी, अनुबंध और सार्वजनिक व्यवहार से जुड़ा माना जाता है। ग्रहण के बाद पार्टनर के साथ किसी पुरानी बात को लेकर तनाव बढ़ने की संभावना ज्योतिषीय रूप से बताई गई है।

कारोबारी साझेदार के साथ किसी फैसले पर मतभेद हो सकता है। नई साझेदारी शुरू करने वालों को जल्दबाजी से बचने और जरूरी शर्तों को लिखित में रखने की सलाह दी गई है।

इस दौरान संवाद की कमी समस्या बढ़ा सकती है। रिश्तों में अनुमान लगाने के बजाय सीधे बात करना और कारोबार में हर जरूरी सहमति को लिखित रूप में रखना बेहतर माना गया है।

उपाय: ग्रहण के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। किसी जरूरतमंद दंपती को भोजन कराने या अपनी क्षमता के अनुसार जरूरी सामान दान करने की सलाह दी गई है।

नोट: यह खबर ज्योतिषीय मान्यताओं और दिए गए स्रोत में बताए गए ग्रहों के प्रभाव पर आधारित है। ग्रहण के राशियों पर प्रभाव से जुड़े दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणियां नहीं हैं। #SuryaGrahan #SolarEclipse2026 #Rashifal

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment