Shardiya Navratri 2026 astrology remedies : ज्योतिषीय गणना के अनुसार वर्ष 2026 की शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर, रविवार से ग्रह-नक्षत्रों के अत्यंत दुर्लभ संयोग में शुरू हो रही है। वैदिक ज्योतिष में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का सीधा संबंध हमारे सौरमंडल के नवग्रहों से माना गया है। प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले इस अनुष्ठान में विशिष्ट रंगों के परिधान धारण करने से जातक के आभामंडल में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सही विधि से भोग अर्पित करने पर जन्मकुंडली में बैठे कमजोर और क्रूर ग्रहों के दुष्प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।
प्रथम तीन दिन: चंद्र, मंगल और शुक्र शांति
नवरात्रि के पहले दिन 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की पूजा से चंद्रमा बलवान होता है। जातक मानसिक अशांति दूर करने के लिए पीले वस्त्र पहनें और गाय का शुद्ध घी अर्पित करें।
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की साधना कुंडली में मंगल दोष (mangal dosh navratri remedies) और क्रोध को शांत करती है। इस दिन हरा रंग पहनने और शक्कर या सफेद मिष्ठान्न का नैवेद्य लगाने से साधक को असीम आत्मबल प्राप्त होता है।
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना शुक्र ग्रह को मजबूती प्रदान करती है। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि के लिए जातक ग्रे परिधान पहनकर देवी को दूध या खीर का भोग लगाएं।
मध्य तीन दिन: सूर्य, बुध और बृहस्पति कृपा
चौथे दिन आदिशक्ति मां कूष्मांडा की पूजा से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, जिससे समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। नारंगी वस्त्र (navratri 9 days astrological colors) पहनकर मालपुआ का भोग लगाने से तेज और विवेक का संचार होता है।
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पांचवें दिन स्कंदमाता की आराधना बुध ग्रह की अनुकूलता प्रदान करती है। संतान पक्ष की चिंता दूर करने और बुद्धि विकास के लिए सफेद वस्त्र में केले का भोग सर्वोत्तम माना गया है।
छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा बृहस्पति को सुदृढ़ कर शीघ्र विवाह और दांपत्य सुख के योग बनाती है। इस दिन लाल परिधान धारण करके शहद अर्पित करने से वैवाहिक अड़चनें पूरी तरह दूर हो जाती हैं।
अंतिम तीन दिन: राहु, केतु और शनि निवारण
सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना से राहु का कुप्रभाव और अज्ञात भय तत्काल शांत होता है। तंत्र बाधा और शनि-राहु जनित कष्टों से मुक्ति के लिए इस दिन शाही नीला रंग पहनकर पूजा करें।
आठवें दिन मां महागौरी की आराधना राहु-केतु के उपद्रव को शांत कर घर (Navratri graha shanti upay) में धन-धान्य का विस्तार करती है। गुलाबी वस्त्र पहनकर नारियल का भोग लगाने से कुंडली के सभी क्रूर ग्रह सौम्य फल देने लगते हैं।
नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की कृपा से जातक को केतु जनित मानसिक भटकाव से मुक्ति और समस्त नवग्रहों की अनुकूलता प्राप्त होती है। बैंगनी वस्त्र में हलवा-पूरी का भोग लगाकर कन्या पूजन करने से नवग्रह शांति का संपूर्ण फल मिलता है। #Navratri2026 #AstrologyRemedies #GrahaShanti #ShardiyaNavratri












