Bhagwan ka locket astrology rules : वैदिक ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के सिद्धांतों के अनुसार गले में देवी-देवताओं के चित्र या मूर्ति वाले लॉकेट धारण करना पूरी तरह वर्जित माना गया है। अक्सर लोग आस्था या ग्रहों को शांत करने की मंशा से सूर्यदेव, शिवजी या श्रीगणेश के चित्र वाला लॉकेट (gale me bhagwan ka locket astrology) पहन लेते हैं। ज्योतिष शास्त्र स्पष्ट करता है कि किसी भी ईश्वरीय विग्रह में प्राण-ऊर्जा की मर्यादा होती है, जिसे गले में लटकाकर निभाना आम जनजीवन में संभव नहीं होता।
ज्योतिष गणना के अनुसार मानव शरीर दैनिक दिनचर्या में लगातार पवित्र नहीं रहता। मल-मूत्र त्याग, भोजन करते समय जूठे हाथ लगना, पसीना और शयन के दौरान शरीर अशुद्ध अवस्था में चला जाता है। जब इन अशुद्धियों का सीधा संपर्क भगवान के स्वरूप से होता है, तो इसे ज्योतिषीय भाषा में ‘देव-अपराध’ माना जाता है। इसके चलते संबंधित ग्रह की शुभ रश्मियां दूषित होकर जीवन में प्रतिकूल परिणाम देने लगती हैं।
ग्रह दोष और राहु प्रभाव
सोते समय या दैनिक कामकाज के दौरान गले का लॉकेट (locket astrology benefits in hindi) मुड़ सकता है, घिस सकता है या चटक सकता है। ज्योतिष में खंडित विग्रह को शरीर पर धारण करना राहु के नकारात्मक प्रभाव को सीधा निमंत्रण देना माना जाता है।
कुंडली में सूर्य, गुरु या मंगल जैसे शुभ ग्रह भी विग्रह के अपमान से पीड़ित हो जाते हैं। इससे जातक के आत्मविश्वास में गिरावट, नौकरी-व्यापार में अकारण बाधाएं और घर में अशांति की स्थिति बनने लगती है।
यंत्र और प्रतीकों की शक्ति
यदि आप ग्रहों को बली करना चाहते हैं या ईश्वरीय (wearing god pendant effects on horoscope) कृपा पाना चाहते हैं, तो चित्रों के स्थान पर शास्त्रीय यंत्रों का चयन करें। भोजपत्र या निर्धारित धातु पर विधि-विधान से उत्कीर्ण और अभिमंत्रित ‘सूर्य यंत्र’ या ‘श्री यंत्र’ का लॉकेट पहनना सुरक्षित माना जाता है।
हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: तुला राशि में वक्री होंगे शुक्रदेव, करियर और व्यापार में इन राशियों को होगा तगड़ा फायदा
इसके अलावा ‘ॐ’ का प्रतीक ब्रह्मांडीय नाद का सूचक है, जिसमें किसी साकार विग्रह के खंडित होने का दोष नहीं लगता। ॐ का पेंडेंट धारण करने से चंद्र ग्रह संतुलित रहता है और मन के विकार दूर होते हैं।
रुद्राक्ष, तुलसी और रत्न विधान
ज्योतिष शास्त्र में रुद्राक्ष (grah dosha locket se) को भगवान शिव का प्रत्यक्ष अंश और साक्षात ऊर्जा का स्रोत माना गया है, जो किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है। एकमुखी से लेकर चौदह मुखी तक का रुद्राक्ष जातक अपनी जन्मपत्रिका के आधार पर सिद्ध करवाकर पहन सकता है।
वैष्णव परंपरा और बुध-गुरु के संतुलन के लिए तुलसी कंठी धारण करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। किसी भी प्रकार का धार्मिक पेंडेंट, राशि रत्न या धातु का चयन करने से पहले अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण जरूर करवाएं। #AstrologyTips #JyotishGyan #KundaliDosha











