चंडीगढ़, 30 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल में शुरू हुई ‘ई-अधिगम योजना’ के तहत खरीदे गए 5 लाख टैबलेट, जो पिछले सत्र में लगभग निष्क्रिय हो गए थे, अब उन्हें नए स्वरूप में छात्रों को सौंपा जाएगा। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में विस्तृत योजना तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भेज दी है। इस पहल का सीधा उद्देश्य 10वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना है ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी घर बैठे कर सकें।
सिम कार्ड और 1 GB डेटा का नया टेंडर
नई व्यवस्था के तहत, सरकार केवल टैबलेट ही नहीं बल्कि उनके संचालन के लिए इंटरनेट की सुविधा भी खुद मुहैया कराएगी। शिक्षा विभाग जल्द ही टेलीकॉम कंपनियों से टेंडर मांगेगा ताकि छात्रों को सिम कार्ड दिए जा सकें। प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को हर महीने 1 GB डेटा मुफ्त मिलेगा। इसके अलावा, जिन टैबलेट में तकनीकी खराबी आ गई है, उनकी मरम्मत के लिए एक अलग कंपनी का चयन किया जाएगा। विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि जो छात्र स्कूल छोड़ चुके हैं या फेल हो गए हैं, उनसे टैब वापस लेकर नए शैक्षणिक सत्र के छात्रों को अलॉट किए जाएंगे।
सिर्फ पढ़ाई, मनोरंजन नहीं
अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता टैबलेट के दुरुपयोग को लेकर रहती थी, जिसका समाधान सरकार ने नए ‘सुरक्षा सॉफ्टवेयर’ के जरिए निकाला है। टैबलेट में अपडेटेड सॉफ्टवेयर डाला जाएगा जो यह सुनिश्चित करेगा कि छात्र केवल पाठ्यक्रम और शैक्षणिक सामग्री तक ही पहुंच पाएं। सोशल मीडिया या अन्य मनोरंजन ऐप्स इस पर नहीं चलेंगे। इस सॉफ्टवेयर के साथ ही पूरा नया सिलेबस (Curriculum) भी टैबलेट में लोड किया जाएगा, जिससे छात्रों को भारी-भरकम किताबों के बोझ से राहत मिलेगी।
HCS अधिकारियों के सर्वे के बाद लिया फैसला
इस योजना को दोबारा शुरू करने से पहले सरकार ने जमीनी हकीकत जानी। आठ एचसीएस (HCS) अधिकारियों ने राज्य के विभिन्न जिलों के सरकारी स्कूलों का दौरा किया और डिजिटल सुविधाओं की समीक्षा की। इस दौरान शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों से विस्तार से बात की गई और उनके सुझाव लिए गए। सर्वे रिपोर्ट में सामने आया कि यदि तकनीकी खामियों को दूर कर दिया जाए, तो टैबलेट शिक्षा के स्तर को सुधारने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार अब 700 करोड़ रुपये के इस निवेश को पूरी तरह प्रभावी बनाने जा रही है।
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