Punjab Haryana High Court , Haryana gets relief from water crisis: High Court orders to give 4500 cusecs of additional water to Punjab: पंजाब और हरियाणा के बीच चल रहे जल विवाद में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा को बड़ी राहत दी है।
कोर्ट ने पंजाब को भाखड़ा नंगल बांध से 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ने का आदेश दिया है। यह फैसला केंद्र के निर्णय का पालन सुनिश्चित करता है और हरियाणा के किसानों व नागरिकों के लिए उम्मीद की किरण लाया है। आइए, इस मामले की पूरी कहानी और इसके प्रभाव को समझें।
जल विवाद का पृष्ठभूमि Punjab Haryana High Court
पंजाब और हरियाणा के बीच भाखड़ा नंगल बांध के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से तनाव रहा है। 23 अप्रैल 2025 को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की तकनीकी समिति ने हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी छोड़ने का फैसला किया, जिसमें राजस्थान और दिल्ली का हिस्सा भी शामिल था।
हालांकि, पंजाब ने इसका विरोध करते हुए दावा किया कि हरियाणा और राजस्थान अपनी तय हिस्सेदारी से अधिक पानी मांग रहे हैं। इस बीच, पंजाब विधानसभा ने केंद्र के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर विवाद को और गहरा दिया।
पंजाब पुलिस का हस्तक्षेप
1 मई 2025 को स्थिति तब और जटिल हो गई, जब पंजाब पुलिस ने कथित तौर पर भाखड़ा नंगल बांध और लोहंड कंट्रोल रूम पर नियंत्रण ले लिया। बीबीएमबी ने इसे अपने अधिकारों में अवैध हस्तक्षेप बताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हरियाणा के वकील रविंदर सिंह ढुल और फतेहाबाद के मताना गांव की पंचायत ने भी जनहित याचिकाएं दाखिल कर हरियाणा को जल आपूर्ति की मांग की। इन याचिकाओं में पानी की कमी से किसानों और आम लोगों को हो रही परेशानियों का जिक्र किया गया।
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
हाईकोर्ट ने 2 मई 2025 को भारत सरकार के गृह सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के फैसले को लागू करने का आदेश दिया, जिसमें पंजाब को हरियाणा के लिए 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ने को कहा गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीबीएमबी एक केंद्रीय निकाय है,
जिसका संचालन पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 और बीबीएमबी नियम, 1974 के तहत केंद्र सरकार के अधीन है। पंजाब को बांध की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात करने की अनुमति दी गई, लेकिन कोर्ट ने सख्ती से कहा कि बांध के संचालन में हस्तक्षेप अस्वीकार्य है।
हरियाणा के लिए राहत
यह फैसला हरियाणा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पानी की कमी से राज्य के किसान और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग प्रभावित हो रहे थे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी असहमति की स्थिति में पंजाब को केंद्र सरकार के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से हस्तक्षेप करना चाहिए। इस आदेश से हरियाणा को न केवल तत्काल जल आपूर्ति मिलेगी, बल्कि भविष्य में भी जल बंटवारे में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
नागरिकों और किसानों के लिए इसका महत्व
हरियाणा में खेती और पेयजल आपूर्ति के लिए भाखड़ा नंगल बांध का पानी जीवनरेखा है। इस फैसले से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे फसल उत्पादन में सुधार होगा।
साथ ही, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की कमी से निपटने में मदद मिलेगी। नागरिकों से अपील है कि वे पानी का समझदारी से उपयोग करें और स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करें।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का यह फैसला जल विवाद में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल हरियाणा के लोगों को राहत देता है, बल्कि केंद्र सरकार की भूमिका को मजबूत करता है। यह आदेश दोनों राज्यों के बीच सहयोग और संवाद की जरूरत को भी रेखांकित करता है, ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके।











