दिल्ली, 04 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। दिल्ली से लेकर मुंबई तक और वेस्टइंडीज से लेकर अमेरिका तक, क्रिकेट की दुनिया में इस वक्त आईपीएल 2026 के ब्रॉडकास्ट की जमकर चर्चा हो रही है। भले ही कुछ जानकार इसकी तुलना ग्लोबल स्टैंडर्ड से कर रहे हों, लेकिन जिस पैमाने (Scale) पर जियो स्टार इस महाकुंभ को दर्शकों तक पहुँचा रहा है, वह अद्भुत है। मुंबई स्थित दो विशाल हेडक्वार्टर से एक ऐसा ऑपरेशन चल रहा है जिसका मुकाबला दुनिया का कोई भी स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर नहीं कर सकता। यहां 20 से ज्यादा प्रोडक्शन स्टूडियो और 15 छोटे कमेंट्री बूथ के जरिए हर मैच को 12 से ज्यादा भाषाओं में ढाला जाता है।
4 मिलीसेकंड में दुनिया की सैर
इस ब्रॉडकास्ट की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी रफ़्तार है। जब गेंदबाज के हाथ से गेंद निकलती है, तो वह आपके टीवी या मोबाइल स्क्रीन पर महज 4 मिलीसेकंड की देरी से पहुँचती है। तकनीकी दुनिया में इसे ‘कोई देरी नहीं’ माना जाता है। इसी सुपरफास्ट स्पीड की वजह से ‘रिमोट कमेंट्री’ संभव हो पाती है। कमेंटेटर दुनिया के किसी भी कोने में बैठा हो, उसे मैच फीड रियल टाइम में मिलती है और वह वहीं से अपनी भाषा में सीधा हाल सुना सकता है, मानो वह स्टेडियम में ही मौजूद हो। इसके लिए जियो स्टार भारत में ‘Vizrt’ ग्राफिक्स इंजन का सबसे बड़ा उपयोग कर रहा है।
हर भाषा का अपना रंग
जियो स्टार का ब्रॉडकास्ट सिर्फ अनुवाद (Translation) नहीं है, बल्कि हर भाषा के दर्शकों के लिए एक अलग अनुभव है। तमिल दर्शकों के लिए चेन्नई सुपर किंग्स का पीला रंग स्क्रीन पर हावी रहता है, तो तेलुगु कमेंट्री में सनराइजर्स हैदराबाद का ऑरेंज रंग। डॉल्बी एटम्स प्रोडक्शन रूम में हर माइक्रोफोन की आवाज को भाषा के हिसाब से रीमिक्स किया जाता है। हिंदी कमेंट्री को जहाँ सिनेमैटिक टच दिया जाता है, वहीं इंग्लिश को इंटरनेशनल दर्शकों के हिसाब से रखा जाता है। खास बात यह है कि दिव्यांगों के लिए ‘साइन-लैंग्वेज’ डिस्क्रिप्टिव फीड और मोबाइल यूजर्स के लिए वर्टिकल फॉर्मेट भी उपलब्ध है।
9 हफ्ते का नॉन-स्टॉप टेम्पो
आईपीएल का यह प्रोडक्शन लगभग 9 हफ्तों तक चलता है, जिसमें 1100 से ज्यादा लोगों का स्टाफ दिन-रात काम करता है। इसमें स्टेडियम में मौजूद क्रू और स्टूडियो की टीम शामिल है। टूर्नामेंट बदलते रहते हैं, लेकिन यहां काम का जुनून वही रहता है। जैसे ही आईपीएल खत्म होगा, इन स्टूडियो को आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप के रंग में रंग दिया जाएगा। दीवारों पर सिर्फ ग्राफिक्स और ब्रांडिंग बदलती है, लेकिन तकनीक का ढांचा वही रहता है जो कबड्डी और फुटबॉल जैसे खेलों के लिए भी इस्तेमाल होता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जियो स्टार ने भारत को स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग का ग्लोबल हब बना दिया है।
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