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Chaiti Chhath 2025 Puja Vidhi: चैती छठ 2025 सूर्य देव को समर्पित चार दिन का पवित्र पर्व, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Chaiti Chhath 2025 Puja Vidhi: चैती छठ 2025 सूर्य देव को समर्पित चार दिन का पवित्र पर्व, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
Chaiti chhath 2025 date, puja vidhi, samagri list, arghya samay in hindi, chaiti chhath 2025 sandhya arghya and usha arghaya time: चैती छठ 2025: 1 अप्रैल से शुरू हुआ पर्व 4 दिनों तक चलेगा। नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य (3 अप्रैल, 6:40 PM) और उषा अर्घ्य (4 अप्रैल, 6:08 AM) के साथ संपन्न होगा। निर्जला व्रत और सूर्य पूजा से छठी मैया से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
Chaiti Chhath 2025 Puja Vidhi Muhurat Arghya Time: उत्तर भारत में आस्था और श्रद्धा का महापर्व चैती छठ 1 अप्रैल 2025 से शुरू हो चुका है। चार दिनों तक चलने वाला यह त्योहार सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का अनूठा संगम है। हर साल चैत मास में मनाया जाने वाला यह पर्व नहाय खाय से शुरू होकर उषा अर्घ्य के साथ खत्म होता है। इस दौरान व्रती कठिन नियमों का पालन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। आइए, इस पवित्र पर्व की पूरी विधि, शुभ समय और महत्व को विस्तार से जानते हैं।

Chaiti Chhath 2025 Puja Vidhi: नहाय खाय: पवित्रता के साथ शुरुआत

चैती छठ का पहला दिन, 1 अप्रैल 2025, नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रती स्नान कर खुद को शुद्ध करते हैं और फिर सात्विक भोजन तैयार करते हैं। आम की लकड़ी से बने चूल्हे पर अरवा चावल, कद्दू की सब्जी और चने की दाल बनाई जाती है। ये भोजन न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि आत्मिक शुद्धि का भी प्रतीक माना जाता है। लोग इस दिन से ही छठ के नियमों का पालन शुरू कर देते हैं, ताकि अगले दिनों के लिए मन और शरीर तैयार हो सके।

Chaiti Chhath Puja Samagri 

खरना: 36 घंटे के निर्जला व्रत का आगाज

दूसरा दिन, 2 अप्रैल 2025, खरना का होता है। इस दिन व्रती सुबह से शाम तक बिना पानी के उपवास रखते हैं। संध्या में स्नान के बाद गुड़ और चावल से बनी खीर तैयार की जाती है। इसे छठी मैया को भोग लगाने के बाद व्रती और परिवार वाले इसे ग्रहण करते हैं। इसके बाद शुरू होता है 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत, जो इस पर्व की सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है। ये दिन भक्ति और संयम का अनोखा उदाहरण पेश करता है।

संध्या और उषा अर्घ्य: सूर्य को समर्पित श्रद्धा

तीसरा दिन, 3 अप्रैल 2025, संध्या अर्घ्य का होता है। शाम 6:40 बजे व्रती नदी या तालाब के किनारे पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। ये पल बेहद भावुक और आध्यात्मिक होता है, जब पूरा परिवार एक साथ सूर्य देव से आशीर्वाद मांगता है। इसके बाद चौथा दिन, 4 अप्रैल 2025, उषा अर्घ्य के साथ पर्व का समापन होता है। सुबह 6:08 बजे उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती अपना व्रत तोड़ते हैं। ये दोनों दिन प्रकृति और आस्था के गहरे जुड़ाव को दर्शाते हैं।

चैती छठ का महत्व: सुख-शांति की कामना

चैती छठ का यह पर्व संतान की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए खास माना जाता है। खासकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे बड़े उत्साह से मनाया जाता है। मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और छठी मैया हर मनोकामना पूरी करती हैं। यह पर्व न सिर्फ धार्मिक, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है, जहां लोग मिलकर इसे सेलिब्रेट करते हैं।

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