Chaiti Chhath 2025 Sandhya Arghya Time: चैत्र छठ आज है संध्या अर्घ्य का खास दिन, जानें समय, नियम और महत्व

Chaiti Chhath 2025 Sandhya Arghya Time: संध्या अर्घ्य का सही समय
छठ पूजा में संध्या अर्घ्य का मतलब है डूबते सूरज को जल अर्पित करना। आज, 3 अप्रैल को यह खास पल शाम 6:40 बजे तक रहेगा, जब सूर्यास्त होगा। इस समय को ध्यान में रखकर तैयारी करें, क्योंकि सूर्य देव को सही मुहूर्त में अर्घ्य देना बेहद जरूरी माना जाता है। यह पल न सिर्फ प्रकृति के साथ जुड़ने का मौका देता है, बल्कि आत्मिक शांति भी प्रदान करता है।
संध्या अर्घ्य के नियम
संध्या अर्घ्य का अपना खास तरीका है, जिसे श्रद्धालु बरसों से निभाते आ रहे हैं। इस दिन आपको किसी नदी, तालाब या पवित्र जल में कमर तक खड़े होकर अर्घ्य देना होता है। लोटे में जल भरें और उसमें कच्चा दूध, लाल चंदन, फूल, अक्षत और कुश डालें। इसके बाद सूर्य मंत्रों का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें। साथ ही, सूप में रखे प्रसाद को भी जल में समर्पित करें। ये नियम न सिर्फ परंपरा को जीवंत रखते हैं, बल्कि मन को शुद्ध करने का भी काम करते हैं।
क्यों खास है संध्या अर्घ्य?
संध्या अर्घ्य का महत्व हमारी संस्कृति में गहराई से जुड़ा है। मान्यता है कि डूबते सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन की सारी मुश्किलें दूर हो जाती हैं। यह आपके सपनों को सच करने और सौभाग्य को बढ़ाने का एक रास्ता माना जाता है। सूर्य देव की कृपा से परिवार में खुशहाली आती है, संतान को लंबी उम्र मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह अनुष्ठान न सिर्फ आध्यात्मिक शक्ति देता है, बल्कि हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता भी सिखाता है।
एक परंपरा, अनगिनत आशीर्वाद
चैत्र छठ का तीसरा दिन हर श्रद्धालु के लिए एक सुनहरा मौका है। संध्या अर्घ्य के जरिए आप न सिर्फ सूर्य देव का आशीर्वाद पाते हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना भी करते हैं। तो आज शाम 6:40 से पहले तैयार हो जाएं, अपने लोटे और सूप को सजाएं, और इस पवित्र पल का हिस्सा बनें। यह दिन आपके जीवन में नई रोशनी और उम्मीद लेकर आएगा।
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