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Hindu Nav Varsh 2025: हिंदू नववर्ष 30 मार्च से शुरू होगा नया संवत्सर, जानें क्या होगा खास

Hindu Nav Varsh 2025: हिंदू नववर्ष 30 मार्च से शुरू होगा नया संवत्सर, जानें क्या होगा खास
Hindu Nav Varsh 2025 raja: हिंदू नववर्ष 2025 (विक्रम संवत 2082) 30 मार्च से शुरू होगा। सिद्धार्थ संवत में सूर्य राजा, बुध अन्न स्वामी होंगे। पंचग्रही योग से व्यापार, फसल में लाभ, पर गर्मी बढ़ेगी। धर्म-आध्यात्म बढ़ेगा, राजनीति में बदलाव आएगा।

Hindu Nav Varsh 2025 detailed prediction in Hindi: हिंदू नववर्ष 2025 का आगाज 30 मार्च से होने जा रहा है, जिसे हिंदू पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2082 कहा जाएगा। इस बार संवत्सर का नाम "सिद्धार्थ" होगा और यह रविवार के दिन शुरू होगा। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि सूर्य इस संवत के राजा और मंत्री दोनों होंगे, जिससे मौसम और राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा, बुध अन्न-धन और खनिज का स्वामी होगा, जबकि मंगल खाद्य पदार्थों की जिम्मेदारी संभालेगा। संवत्सर का वाहन घोड़ा होगा, जो तेजी और प्रगति का प्रतीक माना जाता है।

Hindu Nav Varsh 2025: शुभ संयोग से होगी शुरुआत

30 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन हिंदू नववर्ष की शुरुआत होगी। इस दिन शाम 6:14 बजे तक रेवती नक्षत्र रहेगा, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा। सुबह 6:26 बजे तक मीन लग्न रहेगा, फिर मेष लग्न का प्रभाव शुरू होगा। खास बात यह है कि मीन राशि में सूर्य, बुध, राहु, शनि और शुक्र के एक साथ होने से पंचग्रही योग बनेगा। वहीं, केतु कन्या राशि में, बृहस्पति वृषभ में और मंगल मिथुन राशि में रहेंगे। यह दुर्लभ संयोग कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

किस क्षेत्र में होगा लाभ, कहां रहेगी चुनौती?

नए संवत्सर का प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों पर अलग-अलग पड़ेगा। व्यापारियों के लिए यह साल खासा लाभकारी रहेगा, क्योंकि संवत्सर का निवास वैश्यों के घर होगा। अन्न, भूमि, सोना, तकनीक और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में तेजी देखने को मिलेगी। फसलों की बात करें तो बुध के प्रभाव से गेहूं, धान और गन्ने की पैदावार बढ़ेगी, जबकि चंद्रमा के कारण मूंग, बाजरा और सरसों की उपज भी अच्छी होगी। हालांकि, सूर्य के प्रभाव से गर्मी ज्यादा रहेगी, जिससे जल संकट और अग्निकांड की आशंका बढ़ सकती है।

मौसम और महीनों पर असर

इस साल तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है, जिससे लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। चैत्र और वैशाख महीने मुश्किल भरे हो सकते हैं, जबकि आषाढ़ में तेज हवाएं चलेंगी। सावन में अनाज के दाम बढ़ेंगे, आश्विन में स्थिरता रहेगी, लेकिन कार्तिक में मंदी छा सकती है। अगहन, पौष, माघ और फाल्गुन में अशांति और शासकीय विरोध के योग बन सकते हैं।

राजनीति और प्रशासन पर प्रभाव

सूर्य के प्रभाव से भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विदेश नीति से लाभ होगा और कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन की संभावना है। प्रशासन में कठोरता बढ़ेगी, जिससे अनुशासन और परिश्रम को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, गर्मी से जलजनित और त्वचा संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।

आध्यात्म और समृद्धि का दौर

यह साल धर्म और अध्यात्म के लिए भी खास रहेगा। लोगों का झुकाव पूजा-पाठ और तीर्थ यात्राओं की ओर बढ़ेगा। बारिश संतोषजनक होगी, जिससे फसलों को बल मिलेगा और किसानों की आय बढ़ेगी। कुल मिलाकर, यह संवत्सर सुख, शांति और प्रगति का संदेश लेकर आएगा।

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