अंबाला जिले में नया वित्त वर्ष शुरू होते ही अचल संपत्ति के बाजार में बड़ा बदलाव आया है। जिला प्रशासन ने 1 अप्रैल 2026 से कलेक्टर रेट की नई सूची को हरी झंडी दे दी है, जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनों के दाम में 15 से 75 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। अंबाला सिटी और छावनी के पॉश इलाकों में राजस्व विभाग के इस फैसले से अब घर बनाना और खरीदना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो जाएगा। प्रशासन का तर्क है कि कई क्षेत्रों में सालों से रेट नहीं बढ़े थे, जबकि वहां बुनियादी ढांचे के विकास के कारण जमीन की वास्तविक बाजार कीमत काफी बढ़ चुकी थी।
कृषि भूमि के दाम में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी
नए कलेक्टर रेट का सबसे विनाशकारी असर अंबाला की ग्रामीण बेल्ट और विकासशील क्षेत्रों पर पड़ा है। आनंदपुर जलवेहड़ा क्षेत्र में कृषि भूमि की कीमतें ₹35.42 लाख से बढ़ाकर ₹44.27 लाख प्रति एकड़ कर दी गई हैं। वहीं, कलारहेड़ी में यह वृद्धि चौंकाने वाली है, जहां दरें 75 प्रतिशत तक बढ़कर ₹1.70 करोड़ प्रति एकड़ के स्तर को छू गई हैं। इसके अतिरिक्त, कर्धन क्षेत्र में रिहायशी जमीन के दाम ₹6,300 से उछलकर ₹11,025 प्रति वर्ग गज हो गए हैं। हालांकि, प्रशासन ने मोहड़ा और शाहपुर जैसे नेशनल हाईवे के कुछ रणनीतिक क्षेत्रों में दरों को फिलहाल स्थिर रखकर कुछ राहत जरूर दी है।
बिल्डर्स ने जताई नाराजगी
कलेक्टर रेट बढ़ने का सीधा प्रभाव रजिस्ट्री के समय दी जाने वाली स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty) पर पड़ेगा। वर्तमान में हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में पुरुषों को 7 प्रतिशत और महिलाओं को 5 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी देनी होती है। नए रेट लागू होने के बाद, अब खरीदारों को लाखों रुपये अतिरिक्त टैक्स के रूप में चुकाने होंगे। ‘रियल एस्टेट एंड बिल्डर्स एसोसिएशन’ के मुख्य संरक्षक ओंकार नाथ प्रुथी ने इस वृद्धि को ‘अवास्तविक’ बताते हुए कहा है कि यह फैसला जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। उनके मुताबिक, इससे मध्यम वर्ग पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और पहले से ही सुस्त पड़े प्रॉपर्टी बाजार में मंदी और गहरा जाएगी।
2027 तक यही दरें प्रभावी
अंबाला के उपायुक्त (DC) अजय सिंह तोमर और जिला राजस्व अधिकारी राजेश ख्यालिया ने स्पष्ट किया है कि नई दरों को लागू करने से पहले पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई थी। प्रशासन ने अपनी वेबसाइट पर प्रस्तावित रेट अपलोड कर जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। प्राप्त हुई तीन मुख्य आपत्तियों का जिला स्तरीय समिति द्वारा गहन अध्ययन और निपटारा करने के बाद ही इस अंतिम सूची को प्रकाशित किया गया है। अब ये नई दरें 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी, जिसका सीधा मतलब है कि अगले एक साल तक अंबाला में निवेश करने वालों को अपनी जेब ढीली करनी होगी।
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