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हरियाणा में फैमिली आईडी बनी बुजुर्गों की मुसीबत, 3 लाख की आय का नियम हजारों पेंशन पर भारी

On: जनवरी 27, 2026 1:36 अपराह्न
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हरियाणा में फैमिली आईडी बनी बुजुर्गों की मुसीबत, 3 लाख की आय का नियम हजारों पेंशन पर भारी
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डिजिटल डेस्क, हिसार: हरियाणा में सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा फैमिली आईडी में दर्ज आय को आधार बनाकर हजारों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की पेंशन रोकी गई है, जिससे जमीनी स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है।

हरियाणा में डिजिटलीकरण के दौर में परिवार पहचान पत्र यानी फैमिली आईडी अब बुजुर्गों और जरूरतमंदों के लिए चिंता का विषय बन गई है। प्रदेश भर में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों को एक अजीबोगरीब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक हजारों बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और दिव्यांगों की पेंशन केवल इसलिए रोक दी गई है क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी सालाना आय सीमा से ज्यादा दिखाई गई है। हिसार जिले में यह समस्या विकराल रूप ले चुकी है जहां 5 हजार से ज्यादा लोगों की पेंशन पर रोक लगा दी गई है।

क्या है 3 लाख रुपये का पेच

हरियाणा सरकार के नए नियमों के अनुसार बुढ़ापा पेंशन या अन्य सामाजिक सुरक्षा भत्तों के लिए परिवार की वार्षिक आय का पैमाना तय किया गया है।

  • नियम: यदि फैमिली आईडी में पति और पत्नी की संयुक्त वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक पाई जाती है तो सिस्टम स्वचालित रूप से उनकी पेंशन बंद कर देता है।

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  • समस्या: लाभार्थियों का आरोप है कि आय सत्यापन की यह प्रक्रिया जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। कंप्यूटर पर चढ़े आंकड़े और उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति में जमीन आसमान का अंतर है।

फसल बिक्री और कमाई का गणित

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नुकसान उन छोटे किसानों को हो रहा है जो ठेके पर जमीन लेकर खेती करते हैं।

  • सकल आय बनाम शुद्ध मुनाफा: जब कोई किसान अपनी फसल मंडी में बेचता है तो वह पूरी रकम उसकी आय के रूप में फैमिली आईडी में दर्ज हो जाती है।

  • खर्चों की अनदेखी: सिस्टम यह नहीं देखता कि उस फसल को उगाने के लिए किसान ने जमीन का महंगा ठेका, खाद, बीज, कीटनाशक और सिंचाई पर कितना खर्च किया है।

उदाहरण के तौर पर एक बुजुर्ग किसान ने बताया कि उन्होंने 15 एकड़ जमीन ठेके पर ली थी। मंडी में फसल बेचने पर जो पैसा आया उसे सरकार ने उनकी शुद्ध कमाई मान लिया। जबकि हकीकत यह है कि जमीन का किराया और लागत निकालने के बाद उनके पास दिहाड़ी मजदूर के बराबर भी पैसा नहीं बचा। लेकिन सरकारी आंकड़ों में वे अमीर बन गए और उनकी पेंशन काट दी गई।

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आय सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल

स्थानीय लोगों और प्रभावित पेंशनर्स का कहना है कि आय वेरिफिकेशन का तरीका पारदर्शी नहीं है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है फिर भी आय ज्यादा दिखाई गई है। जानकारों का मानना है कि ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल और फैमिली आईडी का डेटा आपस में लिंक होने से यह तकनीकी खामी आ रही है। सॉफ्टवेयर केवल आवक (Revenue) देख रहा है लागत (Cost) नहीं।

लाभार्थियों की सरकार से गुहार

पेंशन रुकने से बुजुर्गों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वे अब दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  1. आय का दोबारा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए।

  2. खेती की लागत को आय में से घटाया जाए।

  3. जरूरतमंदों की रुकी हुई पेंशन को ब्याज सहित बहाल किया जाए।

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सूत्रों के अनुसार सरकार को मिल रही शिकायतों के बाद आय सत्यापन प्रक्रिया की समीक्षा पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो कई पेंशनधारकों को राहत मिल सकती है।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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