Aaj Ka Panchang 26 April 2025 masik shivratri puja muhurt: वैशाख मास की त्रयोदशी तिथि पर 26 अप्रैल 2025 को मासिक शिवरात्रि का पवित्र पर्व मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव की आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन भक्त पार्थिव शिवलिंग की पूजा, रुद्राभिषेक, और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं, जो पुण्य प्राप्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का सुअवसर प्रदान करता है। आइए, आज के पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, और पूजा के विशेष कार्यों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
Aaj Ka Panchang 26 April 2025: मासिक शिवरात्रि का महत्व
मासिक शिवरात्रि भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा प्राप्त करने का विशेष दिन है। इस दिन भक्त विधिवत शिवलिंग पूजन करते हैं, जिसमें बेलपत्र, शहद, और इत्र अर्पित किए जाते हैं। शिवपुराण का पाठ और पवित्र नदियों में स्नान इस दिन को और पवित्र बनाते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव सभी बाधाओं को दूर करते हैं और भक्तों के कार्य निर्विघ्न पूर्ण होते हैं। मन को सात्विक और निर्मल रखना इस व्रत का मूल आधार है।
आज के पंचांग की मुख्य जानकारी
26 अप्रैल 2025 को विक्रम संवत 2082 के वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 8:28 बजे तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। यह शनिवार का दिन होगा, और सूर्योदय सुबह 5:43 बजे तथा सूर्यास्त शाम 6:54 बजे होगा। नक्षत्र में उत्तराभाद्रपद सुबह 6:26 बजे तक रहेगा, फिर रेवती नक्षत्र शुरू होगा। चंद्र राशि मीन और सूर्य राशि मेष रहेगी। योग में वैधृति सुबह 8:41 बजे तक रहेगा, इसके बाद विष्कुंभ योग शुरू होगा।
शुभ मुहूर्त: कार्यों के लिए सर्वोत्तम समय
आज के दिन कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, जो महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उपयुक्त हैं। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:54 से 12:45 तक रहेगा, जो किसी भी कार्य को शुरू करने के लिए शुभ है। विजय मुहूर्त दोपहर 2:21 से 3:24 तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:23 से 7:22 तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:05 से 5:09 तक रहेगा, जो पूजा और ध्यान के लिए आदर्श है। अमृत काल सुबह 6:02 से 7:43 तक और निशीथ काल रात 11:41 से 12:21 तक रहेगा। संध्या पूजन का समय शाम 6:21 से 7:09 तक रहेगा।
अशुभ मुहूर्त: राहुकाल से रहें सावधान
राहुकाल सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक रहेगा, इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से बचें। इसके अलावा, आज दिशा शूल पूर्व दिशा में रहेगा। इस दिशा में यात्रा करने से बचें। अगर यात्रा आवश्यक हो, तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर यात्रा करें। साथ ही, कुसंगति से दूर रहें, क्योंकि यह दिन आध्यात्मिक शुद्धता का है।
पूजा और दान के विशेष कार्य
मासिक शिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पार्थिव शिवलिंग बनाएं और रुद्राभिषेक करें। शिव मंदिर में जलाभिषेक करें और बेलपत्र, शहद, और इत्र अर्पित करें। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और शिवपुराण का पाठ करें। इस दिन फल, धार्मिक पुस्तकें, और अन्न दान करना अत्यंत पुण्यकारी है। गौशाला में गाय को पालक, गुड़, और रोटी खिलाएं। चींटियों को शक्कर और कुत्तों को रोटी दान करें। पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें। मंदिरों में भंडारे का आयोजन करें, जिससे समाज में सकारात्मकता फैले।
सात्विक जीवन का संदेश
मासिक शिवरात्रि का यह पर्व हमें सात्विक और निर्मल जीवन जीने की प्रेरणा देता है। भगवान शिव की भक्ति न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि जीवन की सभी बाधाओं को भी दूर करती है। इस दिन अपनी आत्मा को शुद्ध करें, दान-पुण्य करें, और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।













