नई दिल्ली, Cool Roof Paint Benefit: उत्तर और मध्य भारत में पारा लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है। झुलसाती धूप के कारण कंक्रीट के मकान, खासकर बहुमंजिला इमारतों के टॉप फ्लोर भट्टी की तरह तप रहे हैं। ऐसे में घरों को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने और बिजली का बिल बचाने के लिए लोग छतों पर चूने की कोटिंग या बाजार में मिलने वाले विशेष सफेद पेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। आम जनमानस में यह चर्चा हमेशा रहती है कि क्या यह घरेलू नुस्खा वैज्ञानिक रूप से भी कारगर है? आर्किटेक्ट और भवन निर्माण विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक आधार पर इसकी पुष्टि की है कि सफेद कोटिंग गर्मी रोकने में बेहद प्रभावी साबित होती है।
कैसे काम करता है सफेद रंग का विज्ञान?
विशेषज्ञों के अनुसार, कंक्रीट से बनी सामान्य सीमेंटेड छतें सूरज की थर्मल एनर्जी यानी गर्मी को तेजी से सोखती हैं और उसे नीचे के कमरों में ट्रांसफर कर देती हैं। इसके विपरीत, सफेद रंग में उच्च ‘सोलर रिफ्लेक्टेंस इंडेक्स’ (SRI) होता है। इसका मतलब है कि जब सूर्य की किरणें सफेद सतह पर पड़ती हैं, तो वह उसका एक बड़ा हिस्सा सोखने के बजाय वापस वायुमंडल में परावर्तित (रिफ्लेक्ट) कर देता है। पुराने समय में भी ग्रामीण इलाकों और कस्बों में लोग गर्मियों की शुरुआत से पहले छतों और बाहरी दीवारों पर चूने का लेप इसी वजह से लगाते थे।
तापमान में कितनी आती है गिरावट?
बिल्डिंग एक्सपर्ट्स का दावा है कि अगर सही तरीके से छत पर सफेद कोटिंग की जाए, तो भीषण गर्मी के दौरान भी घर के अंदरूनी तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की कमी महसूस की जा सकती है।
इस तापमान गिरावट का सीधा असर घर में चल रहे एयर कंडीशनर (AC) और कूलर पर पड़ता है। जब छत कम गर्म होगी, तो कमरों को ठंडा करने के लिए इन उपकरणों को कम मेहनत करनी पड़ेगी, जिससे बिजली की खपत में भारी कटौती होती है। इसका सबसे सीधा फायदा उन परिवारों को मिलता है जो मकान की सबसे ऊपरी मंजिल पर रहते हैं।
साधारण चूना बनाम कूल रूफ पेंट: कौन सा है बेहतर?
बजट और टिकाऊपन के लिहाज से बाजार में इसके दो विकल्प मौजूद हैं:
पारंपरिक चूना: यह सबसे सस्ता और आसान तरीका है। चूने में थोड़ा नमक और फेविकोल मिलाकर छत पर दो से तीन कोट किए जाते हैं। यह गर्मी तो बेहतर तरीके से रोकता है, लेकिन मानसून की पहली या दूसरी बारिश में ही बह जाता है। इसे हर साल दोबारा लगाना पड़ता है।
हीट रिफ्लेक्टिव पेंट (Cool Roof Paint): आजकल बाजार में विशेष केमिकल युक्त रिफ्लेक्टिव कोटिंग्स मिलती हैं। इनमें सूर्य की इन्फ्रारेड किरणों को रोकने की क्षमता ज्यादा होती है। यह चूने के मुकाबले काफी महंगे होते हैं, लेकिन वॉटरप्रूफिंग के साथ आते हैं और कम से कम 2 से 3 साल तक टिके रहते हैं।
इन मकानों में दिखेगा सबसे ज्यादा असर
यह तकनीक उन स्वतंत्र मकानों या फ्लैट्स में सबसे ज्यादा प्रभावी है जिनकी छत सीधे सूर्य की रोशनी के संपर्क में आती है और उनके ऊपर कोई अन्य मंजिल नहीं बनी है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर घर की दीवारों पर सीधी धूप पड़ रही है या कमरों में क्रॉस वेंटिलेशन (हवा के आने-जाने का रास्ता) खराब है, तो सिर्फ छत सफेद करने से पूरी राहत नहीं मिलेगी।
पेंट के अलावा घर को ठंडा रखने के लिए छत पर गमले रखना, ग्रीन नेट (हरी जाली) लगाना और दोपहर के समय खिड़कियों पर हैवी कर्टन या सन-फिल्म का इस्तेमाल करना भी बेहद जरूरी है।
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