नई दिल्ली। देश में साइबर अपराध लगातार नए तरीके अपना रहे हैं और अब निशाने पर आम लोग नहीं बल्कि कंपनियां और उनके कर्मचारी हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और CyberDost ने “Boss Scam” को लेकर चेतावनी जारी की है। इस साइबर हमले में अपराधी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारियों से तत्काल भुगतान करवाने की कोशिश करते हैं। खतरा बढ़ रहा है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे फ्रॉड की शुरुआत एक संदिग्ध .ZIP या .ISO फाइल से होती है। साइबर अपराधी इन फाइलों को महत्वपूर्ण दस्तावेज, इनवॉइस, बैंक स्टेटमेंट, फाइनेंस रिपोर्ट या अन्य ऑफिस रिकॉर्ड बताकर कंपनी के CEO, मालिक या वरिष्ठ अधिकारी को भेजते हैं। देखने में यह फाइलें सामान्य लगती हैं, लेकिन इनके भीतर खतरनाक मैलवेयर छिपा होता है।
फाइल खुलते ही शुरू हो सकता है साइबर हमला
जैसे ही कोई अधिकारी ऐसी फाइल अपने कंप्यूटर में खोलता है, मैलवेयर सिस्टम में इंस्टॉल हो सकता है। इसके बाद हमलावर WhatsApp Web से जुड़ी जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में पीड़ित के WhatsApp अकाउंट या उसकी डिजिटल पहचान का दुरुपयोग कर कर्मचारियों से संपर्क किया जाता है। यहीं से शुरू होती है असली ठगी।
साइबर अपराधी CEO, मालिक या किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से कर्मचारियों को संदेश भेजते हैं। मैसेज में किसी सप्लायर को तुरंत भुगतान करने, गोपनीय वित्तीय लेनदेन पूरा करने या आपातकालीन ट्रांसफर का हवाला दिया जाता है। जल्दबाजी का दबाव बनाया जाता है। कर्मचारी यदि बिना पुष्टि किए भुगतान कर देता है तो कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
I4C ने क्या सलाह दी
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अज्ञात .ZIP या .ISO फाइल को डाउनलोड या ओपन नहीं करना चाहिए, चाहे वह किसी परिचित व्यक्ति या वरिष्ठ अधिकारी के नाम से ही क्यों न आई हो।
यदि किसी संदेश में तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाया जाए, तो पहले संबंधित अधिकारी से फोन कॉल, वीडियो कॉल या कंपनी के आधिकारिक संचार माध्यम के जरिए उसकी पुष्टि जरूर करें। केवल WhatsApp संदेश के आधार पर वित्तीय लेनदेन करना जोखिम भरा हो सकता है।
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ऐसे रखें अपनी कंपनी को सुरक्षित
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार केवल सत्यापित स्रोतों से प्राप्त दस्तावेज ही खोलें। कंप्यूटर में अपडेटेड एंटीवायरस और सुरक्षा सॉफ्टवेयर का उपयोग करें। कर्मचारियों को समय-समय पर साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग दें ताकि वे फर्जी ईमेल, संदिग्ध फाइल और सोशल इंजीनियरिंग हमलों की पहचान कर सकें। किसी भी भुगतान से पहले दो स्तर पर सत्यापन की व्यवस्था रखना भी प्रभावी सुरक्षा उपाय माना जाता है।
देश में साइबर ठगी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सतर्कता, तकनीकी सुरक्षा और कर्मचारियों की जागरूकता ही इस तरह के Boss Scam से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।













