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हरियाणा में DSR करने वाले किसानों को मिल सकते हैं 6 हजार रुपये प्रति एकड़, 2026-2030 की नई योजना तैयार

On: अगस्त 22, 2026 12:45 अपराह्न
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Haryana DSR Scheme: चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार धान की खेती में पानी की खपत कम करने और किसानों को कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की ओर ले जाने के लिए नई प्रोत्साहन योजना लागू करने की तैयारी में है। कृषि विभाग ने खरीफ सीजन 2026 से 2030 तक पांच साल की योजना का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत लगातार पांच साल तक धान की सीधी बिजाई यानी DSR करने वाले किसानों को 6,000 रुपये प्रति एकड़ तक प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव है।

हरियाणा में धान की खेती वाले इलाकों में भूजल बचाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी वजह से सरकार एक तरफ DSR को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ किसानों को धान छोड़कर मक्का, कपास, दलहन, तिलहन, बागवानी और अन्य फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की योजना पर काम कर रही है।

लगातार 5 साल DSR करने पर 6 हजार रुपये प्रति एकड़ का प्रस्ताव

कृषि विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, लगातार पांच साल तक धान की सीधी बिजाई करने वाले किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 4,500 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति एकड़ की जा सकती है। हालांकि योजना का लाभ केवल उसी जमीन के लिए होगा, जिस पर लगातार पांच साल तक DSR या तय वैकल्पिक फसल की खेती की जाएगी।

किसान को 2026 में जिस दर्ज किला नंबर पर पंजीकरण कराया जाएगा, उसी जमीन पर लगातार पांच साल तक योजना की शर्तों के अनुसार खेती करनी होगी। इससे किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि केवल एक-दो साल फसल बदलने से पांच साल वाले प्रस्तावित प्रोत्साहन का लाभ नहीं मिलेगा।

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धान की जगह दूसरी फसल लगाने पर मिल सकते हैं 10 हजार रुपये प्रति एकड़

सरकार ने धान की जगह वैकल्पिक फसल लगाने वाले किसानों के लिए भी प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। मौजूदा 8,000 रुपये प्रति एकड़ की राशि को बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति एकड़ करने की तैयारी है।

‘मेरा पानी- मेरी विरासत’ योजना के तहत धान की जगह मक्का, कपास, मूंग, उड़द, ग्वार, सोयाबीन, मोठ, तिल, अरंडी, मूंगफली, खरीफ प्याज, चारा, पोपलर-यूकेलिप्टस, बागवानी और सब्जियां उगाने वाले किसानों को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। खरीफ सीजन में धान की जगह खेत खाली रखने वाले किसान भी योजना के दायरे में होंगे।

DSR के लिए 1.31 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया पंजीकरण

इस बार धान की सीधी बिजाई के लिए 1,31,693 किसानों ने 6,85,757 एकड़ जमीन का पंजीकरण कराया है। इनमें से 73,563 किसानों की 3,49,182 एकड़ जमीन का सत्यापन पूरा हो चुका है।

सिरसा इस मामले में सबसे आगे है। जिले में 26,586 किसानों ने 1,90,401 एकड़ जमीन के लिए पंजीकरण कराया है। सरकार ने इस बार DSR के लिए 5 लाख एकड़ का लक्ष्य रखा है, जिसमें महेंद्रगढ़ को शामिल नहीं किया गया है।

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मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में किन जिलों के किसान आगे?

‘मेरा पानी- मेरी विरासत’ योजना के तहत इस बार 23,212 किसानों ने 38,585 एकड़ जमीन का पंजीकरण कराया है। धान के बजाय वैकल्पिक खेती को लेकर यमुनानगर के किसानों की भागीदारी सबसे अधिक दर्ज की गई है।

यमुनानगर में 5,348 किसानों ने पंजीकरण कराया है। इसके बाद अंबाला में 4,239 और जींद में 2,010 किसानों ने योजना के लिए पंजीकरण कराया है।

यह योजना खासतौर पर उन किसानों के लिए मायने रखती है जो धान की फसल में अधिक पानी की जरूरत को देखते हुए खेती का तरीका बदलने पर विचार कर रहे हैं। प्रोत्साहन राशि बढ़ने का प्रस्ताव लागू होता है तो किसानों को पानी बचाने के साथ खेती की लागत और आय के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।

बीच में योजना छोड़ी तो क्या होगा?

प्रस्तावित नियमों के अनुसार किसान को दर्ज किला नंबर पर लगातार पांच साल तक योजना के तहत खेती करनी होगी। यदि किसान किसी एक साल योजना छोड़ देता है तो उसे उस वर्ष की प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी।

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इसके बाद किसान उसी किला नंबर पर दोबारा पंजीकरण कराता है तो प्रोत्साहन राशि की गणना शुरुआती स्तर से शुरू होगी। इसलिए पांच साल की अवधि में खेती और पंजीकरण की निरंतरता योजना का सबसे अहम हिस्सा रहेगी।

सरकार का यह प्रस्ताव लागू होने के बाद DSR और वैकल्पिक फसलों को अपनाने वाले किसानों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन बढ़ सकता है। खासकर सिरसा, यमुनानगर, अंबाला, जींद और अन्य धान उत्पादक जिलों के किसानों के लिए यह योजना खरीफ की खेती की रणनीति तय करने में अहम साबित हो सकती है। #HaryanaFarmers #DSRScheme #MeraPaniMeriVirasat

राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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