Meri Fasal Mera Byora 2026 : हरियाणा के लाखों किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2026 के तहत फसलों का पंजीकरण कराने से वंचित रह गए किसानों को एक और अवसर प्रदान किया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल की विंडो को 21 से 27 सितंबर 2026 तक दोबारा सक्रिय करने का आधिकारिक फैसला लिया है।
करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, अंबाला से लेकर दक्षिणी बेल्ट के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और भिवानी तक जिन किसानों का पंजीकरण तकनीकी या अन्य कारणों से छूट गया था, वे अब सात दिनों के भीतर अपनी गिरदावरी दर्ज कर सकते हैं। बिना पंजीकरण (Haryana Kharif Crop Registration) के कोई भी किसान अपनी उपज मंडियों में सरकारी भाव पर नहीं बेच पाएगा।
धान और बाजरे का रकबा
प्रदेश में इस खरीफ सीजन के दौरान धान की खेती का कुल रकबा लगभग 30 लाख से 32 लाख एकड़ यानी करीब 12 से 14 लाख हेक्टेयर अनुमानित है। राज्य के कृषि वैज्ञानिकों और सांख्यिकी विभाग के अनुसार, अनुकूल मौसम के चलते इस बार 55 से 60 लाख मीट्रिक टन धान उत्पादन का अनुमान लगाया गया है।
वहीं प्रदेश के दक्षिणी और शुष्क जिलों रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी में बाजरा प्रमुख फसल बनकर उभरा है। इन क्षेत्रों में बाजरे का रकबा 10 लाख से 12 लाख एकड़ (लगभग 4.5 से 5 लाख हेक्टेयर) दर्ज हुआ है, जिससे 10 से 12 लाख मीट्रिक टन कुल उत्पादन मिलने की उम्मीद है।
हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: हरियाणा स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा संकट: 8 मेडिकल कॉलेजों में 2572 डॉक्टरों के पद खाली, मरीज परेशान
एमएसपी और सीधे भुगतान की शर्त
‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल (Meri Fasal Mera Byora Portal) पर दर्ज आंकड़े ही सरकारी खरीद प्रक्रिया की नींव हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग केवल उन्हीं किसानों की उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (Haryana MSP Crop Purchase 2026) पर खरीदेगा, जिनका विवरण पोर्टल पर सत्यापित होगा।
फसल बिक्री के बाद भुगतान की राशि बिना किसी आढ़ती या मध्यस्थ के सीधे किसान के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है। यदि किसान ने पोर्टल पर अपनी जमीन और फसल का ब्योरा नहीं दिया, तो वह अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचने से वंचित रह जाएगा।
भावांतर भरपाई और मुआवजा लाभ
यदि खुले बाजार में बाजरा या अन्य अधिसूचित खरीफ फसलों का भाव एमएसपी से नीचे जाता है, तो सरकार भावांतर भरपाई योजना (Bhavantar Bharpai Yojana Haryana) के तहत घाटे की भरपाई करती है। यह अंतर राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिसके लिए पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य शर्त है।
इसके अतिरिक्त, बेमौसम बारिश, जलभराव या कीटों के हमले से हुए नुकसान की भरपाई के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दावा करने के लिए भी यह पंजीकरण जरूरी है। जल संरक्षण से जुड़ी ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना (धान के स्थान पर वैकल्पिक फसल बोने पर ₹7,000 प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि) और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली भारी सब्सिडी का लाभ भी केवल पंजीकृत किसानों को ही मिलता है। #MeriFasalMeraByora #HaryanaFarmers #Kharif2026 #HaryanaNews










