Haryana Doctor Vacancy : हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ का भारी अकाल पड़ा है। जून 2026 में हरियाणा विधानसभा में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार, राज्य के आठ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वीकृत 3,843 डॉक्टरों के पदों में से 2,572 पद खाली पड़े हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के न होने से सामान्य जिला अस्पतालों से लेकर बड़े रेफरल अस्पतालों तक मरीजों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है।
पैरामेडिकल स्टाफ (Haryana Paramedical) की स्थिति भी डॉक्टरों जितनी ही दयनीय है। कुल स्वीकृत 5,280 पदों में से 2,742 पद खाली पड़े हैं और केवल 2,538 कर्मी ही सेवाएं दे रहे हैं। लैब तकनीशियन, ओटी सहायक और फार्मासिस्ट की कमी के कारण जांच और उपचार प्रक्रिया में भारी देरी हो रही है।
नए मेडिकल कॉलेजों का हाल
डॉक्टरों की सबसे विकराल कमी नए स्थापित मेडिकल कॉलेजों में सामने आई है। जींद के सरकारी मेडिकल कॉलेज (Jind Medical College) में 559 स्वीकृत पदों के मुकाबले 555 पद खाली हैं, यानी वहां 99.3 प्रतिशत डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हैं।
महेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज में 559 पदों में से 492 (88 प्रतिशत) और भिवानी में 552 पदों में से 477 (86.4 प्रतिशत) पद खाली हैं। नूंह मेडिकल कॉलेज में 362 पदों में से 197 पद (54.4 प्रतिशत) और करनाल में 54.5 प्रतिशत पद खाली हैं। प्रदेश के सबसे बड़े संस्थान पीजीआईएमएस रोहतक में भी 852 में से 341 पद रिक्त हैं।
विशेषज्ञों की भारी कमी
सामान्य बीमारियों के अलावा गंभीर रोगों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद भी खाली पड़े हैं। राज्य में रेडियोलॉजी के 34 मानक पदों में से केवल 25 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं।
महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ (गाइनेकोलॉजी) के 321 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 109 डॉक्टर ही तैनात हैं। जनरल सर्जरी में 289 पदों के मुकाबले 83 और बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिक्स) के 290 पदों के मुकाबले केवल 73 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों पर बोझ
डॉक्टरों की भारी कमी के बावजूद सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली पर मरीजों का भरोसा और दबाव लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025 के दौरान राज्य के जिला अस्पतालों में 95.71 लाख ओपीडी परामर्श दर्ज किए गए। गुरुग्राम के सेक्टर 10 सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 2,000 मरीजों का ओपीडी लोड दर्ज किया जा रहा है।
पीपीपी मॉडल पर संचालित चार जिला अस्पतालों की कैथ लैब सुविधाओं में वर्ष 2024-25 के दौरान 83,798 दिल के मरीजों ने ओपीडी परामर्श लिया। इसी अवधि में जिला अस्पतालों में 1.5 लाख से अधिक सीटी स्कैन भी किए गए।
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डॉक्टरों के इस्तीफे की वजह
सरकारी तंत्र से डॉक्टरों का मोहभंग होना कोई नया मामला नहीं है। वर्ष 2023 में जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में 92 और मई 2023 तक 22 मेडिकल अफसरों ने नौकरी से इस्तीफा दिया था। इसी दौरान 13 डॉक्टरों ने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) ले ली थी।
डॉक्टरों के लगातार सेवा छोड़ने के कारणों की जांच के लिए सरकार ने एक समिति का गठन किया था। डॉक्टरों ने निजी क्षेत्र की तुलना में कम वेतन और सरकारी ड्यूटी के अत्यधिक कार्यभार को सेवा छोड़ने का मुख्य कारण बताया था। #HaryanaNews #HealthDepartment #DoctorVacancy #PGIMSRohtak











