Chandigarh PGIMER Khichdi Diet : उत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में भर्ती पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और चंडीगढ़-ट्राईसिटी के मरीजों के लिए खिचड़ी अब केवल सादा खाना नहीं, बल्कि इलाज का अहम हिस्सा बन चुकी है। अस्पताल का डाइटेटिक्स विभाग मरीजों की बीमारी की गंभीरता और पाचन तंत्र की क्षमता के अनुसार विशेष मेडिकल खिचड़ी तैयार कर रहा है।
पीजीआई की चीफ डाइटिशियन डॉ. नैन्सी साहनी (PGIMER Dietitian Dr Nancy Sahni) ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में एक ही रेसिपी सभी मरीजों पर लागू नहीं होती। मरीजों की डाइट में चावल का अनुपात बेहद कम रखा जाता है, ताकि ग्लाइसेमिक लोड न बढ़े और दालों व हरी सब्जियों के जरिए मरीज को एक ही कटोरे में अधिकतम प्रोटीन और फाइबर मिल सके।
कैसे बांटी गई है तीन तरह की खिचड़ी?
Chandigarh PGIMER की किचन में सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे भर्ती मरीजों के लिए मूंग छिलका दाल की खिचड़ी बनाई जाती है। छिलके वाली मूंग दाल में फाइबर, फोलिक एसिड और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेज करते हैं।
इसके उलट, उल्टी-दस्त, डायरिया और गंभीर गैस्ट्रो समस्याओं से पीड़ित बच्चों व वयस्कों को लो-फाइबर डाइट की दरकार होती है। ऐसे मरीजों के कमजोर पाचन तंत्र को आराम देने के लिए बिना छिलके वाली मूंग धुली दाल से खिचड़ी पकाई जाती है। वहीं, लेबर रूम में भर्ती महिलाओं और सर्जरी से उबर रहे मरीजों के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट के तौर पर ताजा पनीर और घिसी हुई मौसमी सब्जियां मिलाकर ऊर्जा से भरपूर डाइट दी जाती है।
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डाइटेटिक्स टीम की क्या भूमिका है?
डॉक्टरों की पर्ची पर लिखी दवाएं तभी पूरी ताकत से असर करती हैं जब मरीज के शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा और प्रोटीन मिले। पीजीआई के डाइटेटिक्स विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के साथ मिलकर हर वार्ड के मरीजों का डाइट चार्ट रोजाना मॉनिटर करते हैं।
डॉ. नैन्सी साहनी के मुताबिक, अगर किसी मरीज की रिकवरी धीमी है, तो उसकी खिचड़ी में दाल का घनत्व और पनीर की मात्रा बढ़ाकर अतिरिक्त कैलोरी व एमिनो एसिड की आपूर्ति की जाती है। यह प्रणाली मरीज के शरीर की टूट-फूट को तेजी से दुरुस्त करने और अस्पताल में भर्ती रहने के दिनों को कम करने में मददगार साबित हो रही है।
खिचड़ी बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
ट्राईसिटी समेत पूरे उत्तर भारत के घरों में पेट खराब होने पर अक्सर सिर्फ सफेद चावल और नाममात्र की दाल वाली पतली खिचड़ी बना दी जाती है। चीफ डाइटिशियन ने सलाह दी है कि घर पर भी पीजीआई (Hospital Khichdi Recipe) वाला फॉर्मूला अपनाना चाहिए, जहां चावल सिर्फ बांधने का काम करे और दाल व सब्जियों का अनुपात अधिक हो।
बुखार या संक्रमण के दौर में शरीर को प्रोटीन की भारी जरूरत होती है। पेट की स्थिति को देखते हुए छिलके वाली या बिना छिलके वाली दाल का चयन करें और मरीज की भूख व पाचन के हिसाब से ही उसमें घी, जीरा या कद्दूकस (Patient Nutrition Diet) किया हुआ पनीर शामिल करें। #PGIMERChandigarh #HealthTips #NutritionDiet










