Haryana Petrol Pump UPI MDR Protest : हरियाणा भर के पेट्रोल पंप डीलर्स ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 5 रुपये मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाए जाने के फैसले का पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। ऑल हरियाणा पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन (एएचपीडीए) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को आधिकारिक पत्र भेजकर इस अतिरिक्त भार से तुरंत राहत देने की मांग उठाई है। एसोसिएशन ने सीधे तौर पर आगाह किया है कि अगर सरकार ने पेट्रोल पंपों को इस शुल्क से पूरी छूट नहीं दी, तो प्रदेश भर के सभी पंपों पर कैशलेस व्यवस्था पूरी तरह बंद करके सिर्फ नकद भुगतान लिया जाएगा।
गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, रोहतक और अंबाला समेत पूरे राज्य के 4,469 पेट्रोल पंपों पर इस फैसले से भारी हलचल मची हुई है। हरियाणा में रोजाना करीब 1.7 करोड़ से 2.1 करोड़ लीटर तेल (petrol diesel upi transaction) की बिक्री होती है और कुल कारोबार 150 से 180 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। इसमें से करीब 90 करोड़ से 120 करोड़ रुपये का लेन-देन डिजिटल माध्यमों से पूरा होता है, ऐसे में अचानक 5 रुपये का चार्ज लगने से सीधा असर पंप संचालकों की कमाई पर पड़ रहा है।
डीलर्स का विरोध क्यों?
पेट्रोल पंप डीलर्स का साफ कहना है कि साल 2017 के बाद से तेल कंपनियों की तरफ से उनके कमीशन में कोई इजाफा नहीं किया गया है। यह पूरा कारोबार पहले से ही बेहद कम मार्जिन पर चल रहा है, जहां बिजली का बिल, कर्मचारियों का वेतन, मशीनों की मरम्मत और इंटरनेट जैसे तमाम खर्चे निकालने के बाद डीलर के पास नाममात्र की बचत बचती है।
हिसार एसोसिएशन के प्रधान राजकुमार सलेमगढ़ (Rajkumar salemgarh hisar petrol) के मुताबिक, एक डीलर को प्रति लीटर डीजल की बिक्री पर केवल 2 रुपये और पेट्रोल पर लगभग 3 रुपये का शुद्ध मुनाफा मिलता है। ऐसे में अगर कोई ग्राहक 2,100 रुपये का पेट्रोल डलवाकर यूपीआई से भुगतान करता है, तो सीधे 5 रुपये एमडीआर के रूप में कट जाएंगे, जिससे डीलर की जेब पर सीधा नुकसान पहुंचेगा।
हरियाणा में डिजिटल कारोबार
एसोसिएशन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में कुल 4,469 पेट्रोल पंपों में से 2,547 यानी 57 फीसदी पंप सिंगल-ओनर या स्वतंत्र डीलरशिप मॉडल पर चल रहे हैं। राज्य में सबसे अधिक 232 पेट्रोल पंप गुरुग्राम में, 166 पंप फरीदाबाद में और 146 पंप हिसार जिले में संचालित हैं।
प्रदेश में रोजाना करीब 10 से 15 लाख यूपीआई ट्रांजेक्शन दर्ज किए जाते हैं। एसयूवी, कमर्शियल गाड़ियों और गाड़ियों में फुल टैंक ईंधन भरवाने के चलते इनमें से एक बड़ा हिस्सा 2,000 रुपये से अधिक के बिल का होता है।
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छोटे पंपों पर असर
गांवों, कस्बों और राज्य मार्गों पर स्थित छोटे पेट्रोल पंपों की दैनिक बिक्री बड़े शहरों के मुकाबले काफी कम रहती है। ऐसे पंपों पर बड़े लेन-देन पर कटने वाला 5 रुपये का शुल्क संचालकों के मासिक मुनाफे को बुरी तरह प्रभावित करेगा।
इसी वजह से एसोसिएशन ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि ईंधन क्षेत्र में पहले से लागू जीरो-एमडीआर व्यवस्था को बिना किसी बदलाव के जारी रखा जाए। इस फैसले पर तुरंत रोक न लगी तो ग्रामीण इलाकों के पंप सबसे पहले डिजिटल भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं।
नकद भुगतान का संकट
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार (Pappu yadav ahpda president) ने स्पष्ट किया कि डीलर्स पूरी तरह डिजिटल इंडिया (haryana petrol pump cash payment) मुहिम के साथ हैं, लेकिन जेब से घाटा सहकर सेवा देना मुमकिन नहीं है। अगर केंद्र सरकार ने इस शुल्क को तुरंत वापस नहीं लिया, तो पेट्रोल पंपों पर क्यूआर कोड हटा दिए जाएंगे और वाहन चालकों से सिर्फ नकद लेन-देन ही स्वीकार किया जाएगा।
अगर ऐसा हुआ तो आम वाहन चालकों को भारी असुविधा झेलनी पड़ेगी और चिल्लर व छुट्टे पैसों को लेकर पेट्रोल पंपों पर रोज विवाद बढ़ेंगे। डीलर्स ने केंद्र सरकार से नीति की तुरंत समीक्षा करने की अपील की है। #HaryanaNews #PetrolPump #UPIPayment #MDRCharges












