Haryana Power Strike Industrial Crisis : हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल से पूरे राज्य की औद्योगिक गति थम गई है। निजी कंपनी इलेवन पावर को वितरण लाइसेंस दिए जाने के विरोध में कर्मचारी सड़कों पर हैं। गुरुग्राम के सेक्टर-37 और कादीपुर समेत कई क्षेत्रों में 1,800 से अधिक फैक्ट्रियों में 36 घंटे से उत्पादन ठप होने से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
हरियाणा की औद्योगिक रीढ़ पर बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल ने गहरा असर डाला है। निजी कंपनी ‘इलेवन पावर’ को गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस मिलने के विरोध में बिजली कर्मी बुधवार रात 10 बजे से हड़ताल पर उतर गए। इस फैसले के बाद प्रदेश के औद्योगिक हब गुरुग्राम के सेक्टर-37, कादीपुर और दौलताबाद जैसे प्रमुख इलाकों में करीब 1,800 कारखानों में 36 घंटे से बिजली गुल है। त्योहारों के सीजन में अचानक ठप हुई बिजली सप्लाई ने पूरे हरियाणा के निर्यात और घरेलू कारोबार को अधर में लटका दिया है।
हड़ताल का राज्यव्यापी कारण
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) द्वारा निजी कंपनी को 25 साल के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने से कर्मचारी यूनियनों में भारी आक्रोश है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि निजी हाथों में वितरण व्यवस्था सौंपने से सरकारी डिस्कॉम को भारी राजस्व नुकसान होगा और रोजगार पर खतरा मंडराएगा।
प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीर बताते हुए साफ किया है कि वह आयोग के इस फैसले को कानूनी तौर पर चुनौती देगी। मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री ने कर्मचारियों से जनहित और औद्योगिक गतिविधियों के मद्देनजर हड़ताल खत्म करने की अपील की है। इसके बावजूद समाधान न निकलने से पूरे हरियाणा में संकट गहरा गया है।
राज्य के उद्योगों पर असर
गुरुग्राम, नूंह, फरीदाबाद, रेवाड़ी, झज्जर, सोनीपत, करनाल और अंबाला तक फैले औद्योगिक और रिहायशी क्षेत्रों में हड़ताल का सीधा असर पड़ा है। अकेले गुरुग्राम के कादीपुर और सेक्टर-37 में टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और खाद्य सामग्री तैयार करने वाली 1,800 यूनिट्स का चक्का जाम हो गया है।
त्योहारी सीजन के चलते कंपनियों पर तय समयसीमा में घरेलू और विदेशी शिपमेंट भेजने का दबाव था। फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रक्रिया रुकने से अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के ऑर्डर निरस्त होने और भारी जुर्माना लगने की आशंका बढ़ गई है।
जनरेटर बने नाकाफी
बिजली ठप होने के बाद उद्योगों ने डीजल जनरेटर के सहारे काम चलाने का प्रयास किया, लेकिन दिल्ली-एनसीआर में लागू ग्रैप नियमों ने विकल्प सीमित कर दिए। इसके अलावा लगातार लोड के कारण जनरेटर गर्म होकर बंद हो रहे हैं।
उद्योगपति उमेश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अत्यधिक लोड से जनरेटर गर्म हो जाते हैं, जिन्हें ठंडा करने के लिए बार-बार बंद करना पड़ता है। इससे मशीनों का संचालन रुकता है और उत्पादन लागत कई गुना बढ़ जाती है।
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कारोबारियों में निराशा
उद्योगपतियों का कहना है कि बुनियादी बिजली आपूर्ति में बार-बार बाधा आने से हरियाणा के विनिर्माण क्षेत्र की साख को बट्टा लग रहा है। सरकारी अधिकारियों से संपर्क साधने के बाद भी तकनीकी खराबी ठीक करने के लिए जमीनी स्तर पर कर्मचारी मौजूद नहीं हैं।
लगातार बढ़ते आर्थिक नुकसान और अनिश्चितता को देखते हुए कई कारोबारियों ने राज्य से पलायन करने तक की चेतावनी दे दी है। उद्यमी अब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द समझौते और बिजली बहाली की राह देख रहे हैं। #HaryanaNews #PowerStrike #HaryanaIndustry #GurugramCrisis










