Amritsar Jamnagar Expressway Update : गुजरात के जामनगर से पंजाब के अमृतसर तक बन रहा 1257 किलोमीटर लंबा छह लेन इकोनॉमिक कॉरिडोर अब अपने अंतिम चरण में है। करीब 80 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस हाईवे के शुरू होने से अमृतसर से जामनगर का 22 घंटे का सफर घटकर सिर्फ 13 घंटे रह जाएगा, जबकि दिल्ली से जामनगर की दूरी 26 घंटे से घटकर महज 16 घंटे में पूरी होगी।
Amritsar jamnagar economic corridor route map : देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में तेज रफ्तार कनेक्टिविटी के लिए तैयार हो रहा अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर अब पूरा होने की कगार पर है। गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब को आपस में जोड़ने वाला यह 1257 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे दोनों सीमावर्ती राज्यों के बीच सड़क यात्रा का समय 22 घंटे से घटाकर सीधे 13 घंटे कर देगा। करीब 80 हजार करोड़ रुपये के कुल बजट से बना यह छह लेन का एक्सप्रेसवे उत्तर भारत की कृषि और औद्योगिक मंडियों को सीधे गुजरात के कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों से जोड़ेगा। इससे आम व्यापारियों की ढुलाई लागत में सीधी कटौती होगी और सुरक्षा बलों के लिए सीमावर्ती आवाजाही भी बेहद सुगम बनेगी।
1257 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर और लागत
अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर कुल 1257 किलोमीटर लंबा है, जिस पर 80 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है। इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान में पड़ता है, जहां 637 किलोमीटर का मार्ग पहले ही पूरी तरह वाहनों के लिए शुरू किया जा चुका है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अनुसार देवगढ़ से गुजरात सीमा तक 27 किलोमीटर का हिस्सा और गुरुग्राम सेक्शन का रूट भी खोला जा चुका है। अब हरियाणा और पंजाब के साथ-साथ गुजरात के बचे हुए हिस्सों को इसी वर्ष दिसंबर तक चालू करने की पूरी तैयारी है।
दिल्ली से जामनगर का सफर 16 घंटे में
यह कॉरिडोर शुरू होने के बाद दिल्ली से जयपुर, उदयपुर और अहमदाबाद होते हुए जामनगर तक पहुंचने का समय 26 घंटे से घटकर केवल 16 घंटे रह जाएगा। दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे से जुड़ने के लिए दो मजबूत विकल्प मिलेंगे।
यात्री केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) या एनएच-44 के जरिए वेस्टर्न पेरिफेरल अथवा रोहतक होकर ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे का रास्ता चुन सकते हैं। यह मार्ग यात्रियों को सीधे सिरसा-डबवाली इंटरचेंज पर लाकर अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर से जोड़ेगा। इसके अलावा निर्माणाधीन दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे से संगरूर-मोगा के पास लुधियाना-बठिंडा लिंक के रास्ते और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए जयपुर-पचपदरा-जोधपुर लिंक से भी यहां पहुंचा जा सकेगा।
917 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड रूट
इस पूरे राजमार्ग का 917 किलोमीटर हिस्सा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के तौर पर तैयार किया गया है, जिस पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। रूट के तहत पंजाब में 155 किलोमीटर का रास्ता टिब्बा गांव से मोगा, धरमकोट और बठिंडा होते हुए संगत कलां तक जाता है।
हरियाणा में यह एक्सप्रेसवे 85 किलोमीटर की दूरी तय करता है, जो पंजाब सीमा पर मंडी डबवाली से चौटाला गांव तक फैला हुआ है। राजस्थान में 637 किलोमीटर का रूट हनुमानगढ़, सूरतगढ़, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर, सांचौर और जालोर से होकर गुजरता है। गुजरात में इसका 380 किलोमीटर का हिस्सा थराद, वासरदा, राधनपुर, संतलपुर और मालिया के रास्ते सीधे जामनगर को जोड़ता है।
रणनीतिक और आर्थिक मजबूती
यह हाईवे रणनीतिक और व्यापारिक दोनों नजरियों से देश के लिए रीढ़ साबित होगा। यह सीधे गुजरात के कांडला और मुंद्रा पोर्ट से जुड़ रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स का खर्च भारी स्तर पर कम होगा।
इसके साथ ही यह रूट बाड़मेर रिफाइनरी से भी सीधा संपर्क स्थापित कर रहा है, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति तेज होगी। सीमावर्ती सुरक्षा मोर्चे पर अमृतसर और जामनगर जैसे संवेदनशील सैन्य ठिकानों को जोड़ने के अलावा यह राजस्थान, गुजरात और पंजाब के पर्यटन सेक्टर में रोजगार के नए अवसर भी खोलेगा। #AmritsarJamnagarExpressway #NHAI #InfrastructureIndia
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हरियाणा के शहरों में जमा होने वाला ठोस कचरा अब परेशानी नहीं बनेगा, बल्कि उससे बिजली तैयार की जाएगी। प्रदेश सरकार ने इसके लिए ऑयल इंडिया के साथ करार किया है, जिसके तहत पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और हिसार में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाने की तैयारी है। (पूरी खबर पढ़ें)













