Haryana Milk Strike : हरियाणा के सिरसा स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा चिल्ला साहिब में शनिवार को किसानों, पशुपालकों और दूध कारोबारियों की एक बड़ी जिला स्तरीय महापंचायत हुई। इस महापंचायत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि 1 से 3 अक्टूबर तक प्रदेशभर में दूध की सप्लाई, खरीद और बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी। नकली दूध, सिंथेटिक पनीर और मिलावटी मावे के फैलते कारोबार के खिलाफ यह कड़ा फैसला लिया गया है ताकि पशुपालकों को उनके दूध का सही भाव मिल सके और आम जनता की सेहत सुरक्षित रहे।
इस राज्यव्यापी बंदी (Haryana Dudh Bandi) का सीधा असर शहरों की दैनिक दुग्ध आपूर्ति और त्योहारी सीजन की तैयारियों पर पड़ना तय है। सिरसा से शुरू हुआ यह आंदोलन अब जींद, हिसार, फतेहाबाद, कैथल और रोहतक समेत पूरे हरियाणा में प्रभाव दिखाने के लिए तैयार है।
कंपनियों से दूध न उठाने की अपील
महापंचायत ने वीटा (Sirsa Mahapanchayat Milk), वेरका, सरस और अमूल जैसी सभी बड़ी ब्रांडेड डेयरी कंपनियों से सीधा आह्वान किया है। इन कंपनियों से कहा गया है कि वे 1 से 3 अक्टूबर के दौरान हरियाणा के ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में दूध संकलन के लिए अपनी गाड़ियां न भेजें।
स्थानीय दुग्ध उत्पादकों, डेयरियों और फेरीवालों से भी अपील की गई है कि वे इन तीन दिनों में न तो एक बूंद दूध खरीदें और न ही शहर जाकर बेचें। इस बंदी का उद्देश्य आपूर्ति तंत्र को रोककर शासन और प्रशासन का ध्यान मिलावटखोरी के बड़े नेटवर्क की तरफ खींचना है।
नियम तोड़ने पर 51 हजार का जुर्माना
हड़ताल को जमीनी स्तर पर सख्त बनाने के लिए महापंचायत (Haryana Farmers Milk Strike) ने दंडात्मक प्रावधान भी लागू किए हैं। तय नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या डेयरी संचालक 1 से 3 अक्टूबर के बीच दूध बेचते पकड़ा गया, तो उस पर 51,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
इतना ही नहीं, दूध की ढुलाई में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को मौके पर ही रोककर जब्त किया जाएगा। जब्त किए गए दूध को नष्ट करने के बजाय आसपास की गरीब बस्तियों में जरूरतमंदों के बीच मुफ्त में वितरित किया जाएगा।
13 सदस्यीय जिला कमेटी का गठन
इस पूरे आंदोलन को सुनियोजित तरीके से चलाने और निगरानी रखने के लिए 13 सदस्यीय जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। इस समिति की कमान प्रमुख किसान नेता मैक्स साहुवाला को सौंपी गई है।
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समिति में जसबीर सिंह भाटी, भूपिंदर सिंह नंबरदार, उदय प्रताप सिंह गिल, गुरी सेखों, सोम चंद सरपंच, आकाश कंबोज, अर्जन कंबोज, गोरा बराड़, रोशन लाल, खुशदीप सिंह, बलजिंदर सूच और कुलविंदर सिंह को शामिल किया गया है। यह टीम अलग-अलग क्षेत्रों में निगरानी रखेगी और समितियों के साथ तालमेल बनाएगी।
नकली के खिलाफ जंग का लक्ष्य
किसान नेताओं और मैक्स साहुवाला (Max Sahuwala) ने दो टूक कहा कि उनका नारा ‘नकली के खिलाफ जंग, असली को प्रमोट’ है। रासायनिक तत्वों और डिटर्जेंट से बनने वाले नकली पनीर, घी और खोया ने असली दूध उत्पादकों की कमर तोड़ दी है।
दूध उत्पादकों का कहना है कि जब तक नकली और जहरीले दुग्ध उत्पादों (Fake Milk Products Haryana) पर स्थायी रोक नहीं लगती, तब तक गाय-भैंस पालने वाले किसानों को लागत के मुताबिक उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। यह आंदोलन उपभोक्ताओं को शुद्ध उत्पाद दिलाने और पशुपालकों की आजीविका बचाने के लिए शुरू किया गया है।











