मल्टी वैरायटी मैंगो फार्मिंग : आधुनिक बागवानी की ग्राफ्टिंग तकनीक ने कम जमीन वाले किसानों की किस्मत बदल दी है। अब एक ही आम के पेड़ पर दशहरी, लंगड़ा, चौसा और आम्रपाली जैसी कई लोकप्रिय किस्में एक साथ उगाई जा सकती हैं। यह अनूठी विधि न केवल फलों की उत्पादकता बढ़ाती है, बल्कि सीजन के अलग-अलग महीनों में फल देकर किसानों की कमाई को भी कई गुना बढ़ा रही है। फलों के राजा आम की खेती करने वाले किसानों के लिए आधुनिक बागवानी तकनीक वरदान साबित हो रही है।
अक्सर छोटे किसानों के पास अलग-अलग किस्म के बाग लगाने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों और बागवानों ने मल्टी वैरायटी मैंगो ट्री (Multi Variety Mango Tree) यानी एक ही पेड़ पर कई किस्म के आम उगाने की तकनीक को तेजी से बढ़ावा देना शुरू किया है। इस सफल प्रयोग से एक ही पेड़ की अलग-अलग डालियों पर दशहरी, लंगड़ा, चौसा और आम्रपाली के फल एक साथ लटकते दिखाई देते हैं।
मल्टी वैरायटी मैंगो ट्री क्या है और यह कैसे काम करता है?
मल्टी वैरायटी मैंगो ट्री एक ऐसा विशेष पौधा होता है, जिसकी अलग-अलग शाखाओं से विभिन्न स्वादों और आकारों के आम प्राप्त होते हैं। इस पेड़ को तैयार करने के लिए सबसे पहले बाग में लगे एक मजबूत, स्वस्थ और देसी आम के पेड़ का चुनाव किया जाता है, जिसे ‘रूटस्टॉक’ कहते हैं। इसके बाद जिन उन्नत किस्मों के आम आप उगाना चाहते हैं, उनकी स्वस्थ टहनियों को लाकर इस मुख्य पेड़ की कटी हुई शाखाओं पर विशेष वैज्ञानिक विधि से जोड़ दिया जाता है। कुछ ही हफ्तों में ये बाहरी टहनियां मूल पेड़ के ऊतकों के साथ मिलकर उसका स्थायी हिस्सा बन जाती हैं। जब यह पेड़ पूरी तरह बड़ा होता है, तो इसकी हर शाखा अपनी मूल वैरायटी के अनुसार अलग रंग-रूप के फल देती है। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: यूरिया के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं, सरकार ला रही नई डिजिटल सुविधा
ग्राफ्टिंग तकनीक क्या है और कलम कैसे बांधी जाती है?
एक ही पेड़ पर कई तरह के आम उगाने के पीछे ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधने की सदियों पुरानी और बेहद प्रभावी बागवानी तकनीक काम करती है। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए मानसून या अत्यधिक नमी वाला मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है। सबसे पहले मुख्य पेड़ की एक स्वस्थ शाखा पर चीरा लगाया जाता है। इसके बाद दूसरी लोकप्रिय किस्म की एक नई टहनी (सायन) को लाकर उस चीरे वाले स्थान पर पूरी सावधानी के साथ फिट कर दिया जाता है। दोनों शाखाओं को आपस में जोड़ने के बाद उस हिस्से को विशेष ग्राफ्टिंग टेप या मजबूत पॉलिथीन से कसकर बांध दिया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि जोड़ के अंदर हवा और पानी न जा सके, जिससे फंगस लगने का खतरा खत्म हो जाता है। करीब 30 से 45 दिनों के भीतर दोनों पौधों के ऊतक आपस में पूरी तरह जुड़ जाते हैं और कलम से नई हरी पत्तियां फूटने लगती हैं। इसी प्रक्रिया को पेड़ की अन्य शाखाओं पर अलग-अलग किस्में जोड़कर दोहराया जाता है।
आधुनिक तकनीक से किसानों की आमदनी कैसे बढ़ेगी?
मल्टी वैरायटी मैंगो फार्मिंग से किसानों को सीधा आर्थिक फायदा पहुंचता है। सबसे बड़ा लाभ यह है कि अलग-अलग किस्म के आम के पकने का समय अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए, जब बगीचे में दशहरी का सीजन खत्म होने की कगार पर होगा, तब उसी पेड़ पर चौसा या लंगड़ा आम पककर तैयार हो रहा होगा। इससे किसानों को लंबे समय तक मंडियों में अपनी फसल बेचने का मौका मिलता है और बाजार में आम की सप्लाई चेन कभी नहीं टूटती है। जब बाजार में किसी एक वैरायटी की आवक कम होती है, तब किसान दूसरी वैरायटी बेचकर दोगुना दाम वसूल सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तकनीक कम लागत में सीमित भूमि का शत-प्रतिशत उपयोग करने और प्रति एकड़ उत्पादकता बढ़ाकर किसानों की जेब भरने का सबसे सटीक जरिया बन चुकी है।












