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11 साल की उम्र में लगा था जानलेवा घाव, अब अभिषेक नैन ने एशियन गेम्स में दागे निर्णायक गोल

On: अक्टूबर 4, 2026 12:11 अपराह्न
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Abhishek Nain Hockey Asian Games : एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने गोल्ड मेडल जीतकर पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है। इस सुनहरी कामयाबी में हरियाणा के सोनीपत जिले के युवा फॉरवर्ड खिलाड़ी अभिषेक नैन (Abhishek Nain Sonipat) ने आक्रामक खेल दिखाकर निर्णायक भूमिका निभाई। भारत की जीत की सीटी बजते ही सोनीपत स्थित अभिषेक के घर पर आतिशबाजी शुरू हो गई। परिजनों, खेल प्रेमियों और पड़ोसियों ने ढोल की थाप पर नाचते हुए एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया।

सोनीपत में आतिशबाजी और जश्न

फाइनल मुकाबले में भारत की ऐतिहासिक जीत (Indian hockey gold medal) दर्ज होते ही अभिषेक के पैतृक आवास पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। परिवार और स्थानीय लोगों ने जोरदार बम-पटाखे चलाकर पूरे इलाके को गुंजायमान कर दिया। माता-पिता ने पूरी भारतीय टीम को बधाई देते हुए इसे देश के सामूहिक प्रयास की जीत बताया। परिजनों ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक पदक नहीं है, बल्कि अभिषेक के बचपन के कड़े इम्तिहान और अडिग जज्बे की जीत है।

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जानलेवा हादसा और 15 टांके

अभिषेक के पिता जगदीश ने उनके बचपन का रूह कपा देने वाला वाकया (Abhishek Nain injury story) साझा किया। जब अभिषेक करीब 10-11 साल के थे, तब अभ्यास से पहले वह मैदान के पास लगे जामुन के पेड़ पर चढ़ गए थे। नीचे अपने कोच और शिक्षक शमशेर सिंह दहिया को खड़ा देखकर वे घबरा गए और उन्होंने छलांग लगा दी। कूदते समय उनका बायां हाथ दीवार पर लगी कंटीली तारों और कांच के टुकड़ों में बुरी तरह फंस गया, जिससे हाथ की नसें कट गईं।

अत्यधिक खून बहने की वजह से उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां वे दो हफ्ते तक गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती रहे और हाथ पर 15 टांके आए। डॉक्टरों ने परिजनों को आगाह कर दिया था कि 5 मिनट की देरी जानलेवा हो सकती थी और इस गंभीर चोट के बाद अभिषेक शायद कभी दोबारा हॉकी स्टिक न पकड़ सकें। इस हादसे के बाद घबराए माता-पिता ने हॉकी खेलने पर रोक लगा दी थी, लेकिन कोच शमशेर सिंह दहिया ने निजी गारंटी लेकर परिवार को दोबारा खेलने के लिए राजी किया।

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अभावों के बीच मां का हौसला

अभिषेक का शुरुआती खेल सफर भारी आर्थिक तंगहाली और संसाधनों की कमी के बीच बीता। स्थानीय मुकाबलों में भाग लेने के लिए पूरी टीम ऑटो रिक्शा में ठुंसकर सफर करती थी। एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान जब अभिषेक की तीन हॉकी स्टिक टूट गईं, तब मां ने उनका मनोबल बढ़ाते हुए 10 नई स्टिक दिलाने का भरोसा दिया था। इसी पारिवारिक संबल ने उन्हें मैदान पर कभी झुकने नहीं दिया।

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रिजेक्शन से सीनियर टीम का सफर

साल 2016 में जूनियर नेशनल कैंप के लिए न चुने जाना अभिषेक के करियर का सबसे बड़ा झटका था। इस नाकामी से टूटने के बजाय उन्होंने लोकल ट्रेनों से अकेले सफर तय कर अपनी ट्रेनिंग जारी रखी। वे सीनियर खिलाड़ी विवेक सागर प्रसाद के कड़े अभ्यास कार्यक्रम को देखकर खुद को तराशते रहे। इसी अटूट जिद के दम पर उन्होंने साल 2022 में भारतीय सीनियर टीम में जगह बनाई और आज एशियन गेम्स में तिरंगा लहराकर देश का गौरव बढ़ा दिया। #AsianGames #IndianHockey #AbhishekNain #SonipatNews

राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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