Neha Hockey Asian Games Gold : जापान में आयोजित एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 वर्षों के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक स्वर्णिम विजय में हरियाणा के करनाल जिले की बहू और अनुभवी हॉकी खिलाड़ी नेहा (Neha hockey player Karnal) ने मैदान पर शानदार प्रदर्शन किया। पूरे टूर्नामेंट में अपनी बेहतरीन मिडफील्ड और फॉरवर्ड ड्रिबलिंग से विपक्षी टीमों को पछाड़ते हुए उन्होंने भारत को शीर्ष पर पहुंचाया। जीत की खबर मिलते ही करनाल स्थित उनके ससुराल में खुशी का माहौल बन गया और ढोल की थाप पर जश्न शुरू हो गया।
दो साल का संकल्प और गोल्ड का वादा
साल 2024 में करनाल निवासी हॉकी खिलाड़ी सुनील के साथ विवाह बंधन में बंधने के बाद नेहा ने एक बड़ा फैसला लिया था। उन्होंने अपने ससुराल पक्ष से अपने खेल के सपने को जारी रखने के लिए दो साल की मोहलत मांगी थी। उनका स्पष्ट लक्ष्य था कि वे अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर खुद को साबित करेंगी। जापान रवाना होने से पहले उन्होंने परिवार से कहा था कि वे पहले कांस्य और रजत पदक जीत चुकी हैं, इस बार बारी सिर्फ सोने की है। उन्होंने मैदान पर अपना यह संकल्प शत-प्रतिशत सच कर दिखाया।
फटे जूते, 10 किमी पैदल सफर और मां का पसीना
नेहा (Savitri Devi Neha hockey) का यह मुकाम वर्षों के कड़े इम्तिहान और पारिवारिक त्याग से होकर निकला है। आर्थिक तंगहाली के उस दौर में वे कई बार फटे जूते पहनकर और खाली पेट मैदान पर पसीना बहाती थीं। अभ्यास स्थल तक पहुंचने के लिए वे रोजाना करीब 10 किलोमीटर पैदल चलती थीं। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के बावजूद उनकी मां सावित्री देवी ने हार नहीं मानी। मां ने दूसरों के घरों और कारखानों में मजदूरी करके पाई-पाई जोड़ी और बेटी के हॉकी खेलने के जुनून को कभी थमने नहीं दिया।
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छठी कक्षा से ओलंपिक तक का सफर
नेहा ने छठी कक्षा से ही हॉकी स्टिक थाम ली थी। साल 2016 में भारतीय रेलवे की तरफ से राष्ट्रीय मंच पर दमदार खेल दिखाने के बाद उनका चयन सीनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में हुआ। इसके बाद वे लगातार टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भी भारतीय दल का मजबूत स्तंभ रहीं। मैदान के बीचों-बीच गेंद पर गजब का नियंत्रण और तेज पासिंग उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है, जिसका सीधा फायदा भारतीय अग्रिम पंक्ति को मिलता रहा है।
करनाल में टीवी के सामने डटा रहा परिवार
फाइनल मैच के दौरान करनाल में नेहा के ससुराल में जबरदस्त रोमांच देखने को मिला। ससुर रामस्वरूप, जेठ अजय यादव और जेठानी कांता यादव शाम 4:30 बजे से टीवी स्क्रीन से नजरें गड़ाए बैठे थे और मुकाबला खत्म होने के बाद ही अपनी जगह से उठे। ससुर रामस्वरूप ने बताया कि नेहा के खेल के प्रति समर्पण को देखते हुए पूरे परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने की पूरी आजादी दी। जेठानी कांता यादव ने कहा कि नेहा ने यह साबित कर दिया है कि शादी के बाद भी महिलाएं अपने सपनों को नई ऊंचाई दे सकती हैं। #AsianGames #IndianHockey #WomenInSports #KarnalNews












