नई दिल्ली (Fertilizer Booking App)। किसानों के लिए खाद खरीदना जल्द ही आसान होने वाला है। केंद्र सरकार ने खाद वितरण व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए नया मोबाइल ऐप तैयार किया है, जिसके जरिए किसान अपने आसपास उपलब्ध यूरिया और डीएपी का स्टॉक देख सकेंगे और घर बैठे बुकिंग भी कर पाएंगे। फिलहाल इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के रामपुर और सीतापुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जा रही है।
खेती-किसानी से जुड़े करोड़ों किसानों के लिए राहत देने वाली पहल शुरू की गई है। अब यूरिया और डीएपी जैसी आवश्यक खाद खरीदने के लिए दुकानों के चक्कर लगाने और लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी कम हो सकती है। केंद्र सरकार ने खाद वितरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए नया मोबाइल ऐप तैयार किया है, जिसके जरिए किसान अपने क्षेत्र में उपलब्ध खाद का स्टॉक मोबाइल पर देख सकेंगे और जरूरत के अनुसार अग्रिम बुकिंग भी कर पाएंगे। फिलहाल इस नई व्यवस्था को उत्तर प्रदेश के रामपुर और सीतापुर जिलों में पायलट परियोजना के रूप में लागू किया जा रहा है। यदि इसका परिणाम सकारात्मक रहा तो इसे देश के अन्य राज्यों तक भी विस्तारित किया जा सकता है। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों के किसानों को भी भविष्य में इसका लाभ मिल सकता है।
FFS ऐप क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
सरकार ने इस नई डिजिटल व्यवस्था का नाम FFS (Framework for Fertilizer Sale) रखा है। इसका उद्देश्य किसानों को खाद की उपलब्धता की सटीक जानकारी देना और वितरण प्रक्रिया को अधिक आसान बनाना है। अक्सर बुवाई और फसल सीजन के दौरान खाद की मांग बढ़ने पर किसानों को कई दुकानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नई व्यवस्था में किसान पहले ही यह जान सकेंगे कि किस विक्रेता के पास कितना स्टॉक उपलब्ध है।
किसान मोबाइल ऐप का उपयोग कैसे कर सकेंगे?
सरकारी योजना के अनुसार किसान अपनी किसान पहचान संख्या या आधार नंबर की मदद से ऐप में लॉगिन कर सकेंगे। इसके बाद वे अपने नजदीकी खाद विक्रेता का चयन कर जरूरत के अनुसार खाद आरक्षित कर पाएंगे। बुकिंग पूरी होने पर किसान को एक यूनिक बुकिंग नंबर और क्यूआर कोड जारी किया जाएगा। निर्धारित खाद विक्रेता के पास पहुंचकर किसान इस क्यूआर कोड या बुकिंग नंबर को दिखाकर पहले से आरक्षित खाद प्राप्त कर सकेंगे। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, खेतों की मिट्टी जांचने के लिए 2.5 करोड़ की लागत से आएंगी आधुनिक किट
नई व्यवस्था से किसानों को क्या फायदा होगा?
डिजिटल प्रणाली से किसानों का समय और श्रम दोनों बच सकते हैं। खाद की उपलब्धता की जानकारी पहले से मिलने पर अनावश्यक यात्राएं कम होंगी और भीड़भाड़ की स्थिति में भी राहत मिलेगी। इसके अलावा खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में दर्ज होगा। इससे वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और स्टॉक प्रबंधन बेहतर होने की उम्मीद है। प्रशासन भी वास्तविक मांग और उपलब्धता पर अधिक प्रभावी निगरानी रख सकेगा।
किसानों को किन बातों का ध्यान रखना होगा?
सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी किसान पहचान संख्या, आधार से जुड़ी जानकारी और मोबाइल नंबर को अपडेट रखें। मोबाइल नंबर सक्रिय होने पर बुकिंग और वितरण से संबंधित जरूरी सूचनाएं समय पर मिल सकेंगी। साथ ही किसानों को सरकार की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों और अपडेट पर भी नजर रखने की सलाह दी गई है ताकि नई व्यवस्था का पूरा लाभ लिया जा सके।
क्या यह व्यवस्था पूरे देश में लागू होगी?
फिलहाल यह योजना केवल रामपुर और सीतापुर जिलों में परीक्षण के तौर पर शुरू की गई है। यदि पायलट परियोजना सफल रहती है तो केंद्र सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य राज्यों में भी लागू कर सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खाद वितरण में तकनीक का उपयोग बढ़ने से किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।













